अवैध खनन से परेशान रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बाघ
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अवैध खनन से परेशान रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बाघ
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अवैध खनन बाघों के लिए खतरा बन रहा है.

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अवैध खनन बाघों के लिए खतरा बन रहा है.

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रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अवैध खनन बाघों के लिए खतरा बन रहा है.

एक ओर बाघों को सुरक्षित आवास व स्वछंद विचरण के लिए वन विभाग करोड़ों रुपये खर्च करके गांवों को खाली करवा रहा है. वहीं दूसरी ओर खुद वन विभाग ही रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बफर एरिया को खनन की गतिविधि के लिए डिनोटिफाई करवाने की तैयारी में है.

मामले को लेकर संगठन अब जब एनजीटी पहुंचे हुए तो अब एनजीटी ने केंद्र से लेकर प्रदेश के सभी आला अफसरों से मामले पर जवाब तलब किया है.



नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रणथंभौर टाईगर रिजर्व में  अवैध खनन के मामले में सचिव टाईगर कन्जरवेशन व चीफ वाईल्ड लाईफ वार्डन सहित 5 से जवाब मांगा है. एनजीटी में लगाई गई याचिका के मुताबिक रणथंभौर टाईगर रिजर्व में माईनिंग व वन विभाग की घोर लापरवाही व मिलीभगत के चलते एसीसी यानी असोसिएटेड सीमेन्ट लिमिटेड लाखेरी द्वारा पिछले 11 वर्षों से लगभग 1100 हैक्टेयर भूमि पर केन्द्र सरकार व अन्य सम्बन्धित अथॉरिटी की बिना स्वीकृति से अवैध खनन किया जा रहा है.  जिसमें से  436.67 हैक्टेयर भूमि टाईगर बफर क्षेत्र की है और बकाया 600 हैक्टेयर सरकारी भूमि  है.
मामले में एनजीटी में जनहित याचिका लगाने वाले याचिकार्ता बाबूलाल जाजू ने अपनी याचिका में कहा है कि एसीसी लाखेरी द्वारा अवैध खनन करने पर सरकार के सम्बन्धित विभागों द्वारा पेनल्टी, जुर्माने व अन्य राशि समेत 50 करोड़ रूपये बकाया हैं.  जो भी विभागीय मिलीभगत के चलते जमा नहीं कराये गए हैं. लेकिन मौके पर आज भी अवैध खनन जारी है जो फोरेस्ट कन्जरवेशन एक्ट 1980 तथा वाईल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 का उल्लंघन है. संबंधित एरिया को बफर जोन घोषित करने के बाद मुख्य वन संरक्षक कोटा की ओर से 24 दिसंबर, 2013 पत्र क्रमांक 12353 और उप वन संरक्षक बूंदी ने 4 फरवरी 2014 पत्र क्रमांक 932के जरिए संबंधित फर्म एसीसी लिमिटेड को वन्यजीव (सुरक्षा) अधिनियम 1972 एवं वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत किसी भी तरह के खनन कार्य नहीं करने के लिए पाबंद किया था.
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