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Jaipur: रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने पूरी की बरसों पुरानी मुराद, 8 साल बाद पूरा भरा आमेर का मावठा

इस मावठे में आठ बरस पहले 2012 में चादर चली थी.

इस मावठे में आठ बरस पहले 2012 में चादर चली थी.

जयपुर (Jaipur) में तीन दिन पहले हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश (Heavy rain) ने आठ बरस से अधूरी चल रही मुराद को पूरा कर दिया. इस बारिश से आमेर का प्रसिद्ध मावठा तालाब (Mawtha Pond) पूरा लबालब हो गया.

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जयपुर. राजधानी जयपुर (Jaipur) में तीन दिन पहले शुक्रवार को हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने भले ही निजी और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया हो और शहर में बाढ़ सरीखे हालात पैदा कर दिये हों, लेकिन इसने एक सुकुन भरी खबर भी दी है. इस भारी बारिश के कारण जयपुर की बरसों से अधूरी चल रही मुराद (Wishe) पूरी हो गई. इस बारिश से जयपुर का ऐतिहासिक आमेर महल का मावठा तालाब (Mawtha Pond) लबालब हो गया है.

लंबे अरसे से इसे भरने के प्रयास किये जा रहे थे
इस मावठा तालाब को भरने के लिए लंबे अरसे से पर्यटन विभाग और सिंचाई विभाग मिलकर कोशिश कर रहे थे. लेकिन काफी महीनों तक कोशिशें करने के बाद भी बीसलपुर की पानी की लाइन से इसे महज़ आधा ही भरा जा सका था. लेकिन शुक्रवार हुई तेज़ बारिश के बाद मावठे में पानी की अच्छी आवक हुई और एक ही दिन में यह तालाब लबालब हो गया.

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वर्ष 2012 में आखरी बार चादर चली थी
इस मावठे में वर्ष 2012 में आखरी बार चादर चली थी. उसके बाद से मावठा तालाब लगातार खाली होता चला गया. इस इलाके में न तो पानी की अच्छी आवक हुई न ही आमेर इलके में अच्छी बरसात दर्ज की गई. हर साल मावठे में थोड़ा बहुत पानी आता था वो गर्मियां आने तक पूरा सूख जाता था. आमेर को वर्ष 2013 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए चुना गया था. पहाड़ी किलों की कैटेगरी में आमेर को दुनिया के सबसे अच्छे किलों में शामिल किया गया. लेकिन तब से ही इस किले की बदकिस्मती ये रही कि मावठा तालाब कभी पूरा नहीं भर पाया था.

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300 मिलियन लीटर पानी की भराव क्षमता है
पर्यटन विभाग और अन्य विभागों ने मिलकर कई बार इसे भरने की कोशिश भी की, लेकिन कभी लीकेज की वजह से तो कभी पानी की कमी की वजह से इसके पूरा भरने का यह ख्वाब अधूरा ही रहा. करीब 300 मिलियन लीटर पानी की भराव क्षमता वाले आमेर के मावठा तालाब को बीसलपुर से फिर से भरने की कोशिश की गई. पिछले 8 महीने तक लगातार की गई पानी की सप्लाई के बाद भी मावठे को आधा ही भरा जा सका था. लेकिन शुक्रवार को हुई तेज़ बारिश के बाद एक ही दिन में आमेर का मावठा लबालब हो गया. अब आमेर के मावठे में चादर चलने में महज़ 6 इंच पानी की और जरुरत है. इससे पहले जब 2012 में यहां पर चादर चली थी तब भी 1981 के बाद 32 साल में मावठे में इतना पानी आया था.

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