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Explained: राजस्थान में 13 लाख बीएड डिग्रीधारकों को HC से क्यों लगा बड़ा झटका?

एनसीटीई ने भी अपने नोटिफिकेशन में माना है कि नियुक्ति के बाद बीएड धारकों को एक ब्रिज कोर्स करना होगा.

एनसीटीई ने भी अपने नोटिफिकेशन में माना है कि नियुक्ति के बाद बीएड धारकों को एक ब्रिज कोर्स करना होगा.

REET Exam 2021 Update: रीट परीक्षा में लेवल-1 के जिस विवाद को लेकर लाखों अभ्यर्थी हाई कोर्ट में आमने सामने हैं वो एचआरडी मिनिस्ट्री (HRD Ministry) के एक निर्णय की देन है. यहां पढ़ें क्या है यह पूरा मामला.

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जयपुर. राजस्थान में आज हो रही रीट भर्ती परीक्षा (REET Exam 2021) के जिस लेवल-1 को लेकर लाखों अभ्यर्थी आमने सामने है वो विवाद एचआरडी मिनिस्ट्री (HRD Ministry) के एक निर्णय की देन है. केन्द्रीय विद्यालय संगठन कमिश्नर के एक लैटर पर एचआरडी मिनिस्ट्री ने निर्णय लेते हुए एनसीटीई (NCTE) को निर्देश दिया कि वो आरटीई एक्ट (RTE Act) में संशोधन करके देशभर में टीचर ग्रेड-3 के लिए बीएड डिग्री धारकों को भी योग्य माने. इस पर एनसीटीई ने संशोधन के बाद 28 जून 2018 को एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए टीचर ग्रेड-3 के लेवल-1 में बीएड डिग्री धारकों को पात्र घोषित करके कहा कि उन्हें नियुक्ति के दो साल के अंदर एक ब्रिज कोर्स पास करना होगा. बस यहीं से पूरे देश में विवाद शुरू हुआ. देश में पहली बार राजस्थान में NCTE के नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है.

आरटीई एक्ट आने के बाद स्कूल एजुकेशन में टीचर्स की योग्यता तय करने की जिम्मेदारी एनसीटीई को दी गई. 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई ने टीचर ग्रेड थर्ड के लेवल-1 के लिए 12th+ डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन और लेवल-2 के लिए ग्रेजुएशन+बीएड की योग्यता तय की थी. लेकिन एचआरडी मिनिस्ट्री के निर्देश पर एनसीटीई ने 28 जून 2018 के नोटिफिकेशन से देशभर में बीएड डिग्रीधारियों को भी लेवल-1 में योग्य मान लिया. इसके बाद सभी राज्य सरकारें एनसीटीई के इस नोटिफिकेशन को मानने के लिए बाध्य हो गई. लेकिन राजस्थान में जारी हुए रीट भर्ती 2021 के विज्ञापन में लेवल-1 के लिए बीएड डिग्रीधारियों को पात्र नहीं माना. इसके बाद नोटिफिकेशन का हवाला देकर बीएड अभ्यर्थी हाई कोर्ट पहुंच गए. वहीं दूसरी ओर बीएसटीसी अभ्यर्थियों ने भी हाई कोर्ट में एनसीटीई के नोटिफिकेशन को चुनौती दे दी.

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बीएसटीसी अभ्यर्थियों का तर्क
हाई कोर्ट में बीएसटीसी अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए तर्क-
– लेवल-1 में पहली से पांचवीं क्लास के बच्चों को पढ़ाना होगा.
– यह ट्रेनिंग केवल बीएसटीसी के दो साल के डिप्लोमा धारकों के पास है.
– बीएड की डिग्री में क्लास 6 से 8 तक के ब्च्चों को पढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है.
– एनसीटीई ने भी अपने नोटिफिकेशन में माना है कि नियुक्ति के बाद बीएड धारकों को एक ब्रिज कोर्स करना होगा.
– मतलब साफ है कि पहले दिन आप बच्चों को उस टीचर के हवाले कर रहे है, जिसके पास ट्रेनिंग ही नहीं है.
– यह अनुच्छेद 21(A) का भी उल्लंघन है. इसमें कहा गया है कि सरकार को क्वालिटी एजुकेशन देनी होगी.
– वहीं नियुक्ति के बाद अगर अभ्यर्थी ब्रिज कोर्स पास नहीं कर सका तो वह योग्य अभ्यर्थी की एक सीट खराब होगी.
– बीएड हायर एजुकेशन नहीं है. इसे सुप्रीम कोर्ट अपने दो और बॉम्बे हाई कोर्ट अपनी लार्जर बैंच के निर्णय में तय कर चुकी है.

बीएसटीसी अभ्यर्थियों के अधिवक्ता का यह है तर्क
बीएसटीसी अभ्यर्थियों के अधिवक्ता विज्ञान शाह का कहना है कि एनसीटीई (National Council for Teacher Education) के एक्ट को पहली बार हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. हमारा मानना है कि संशोधन से पहले एनसीटीई को एक्सपर्ट कमेटी की कोई राय लेनी चाहिए थी. वहीं एचआरडी मिनिस्ट्री ने एनसीटीई एक्ट की धारा 29(1) की पावर का इस्तेमाल करके निर्देश दिए थे. इसके तहत एनसीटीई एक्ट में संशोधन हो सकता है ना कि आरटीई एक्ट में. यह नोटिफिकेशन पूरी तरह से असंवैधानिक है.

बीएड अभ्यर्थियों के अधिवक्ता ने दिया तर्क
बीएड अभ्यर्थियों की ओर से हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा ने कहा कि एनसीटीई टीचर्स एलिजिबिलिटी के लिए एकेडमिक अथॉरिटी है. उसी को यह तय करने का अधिकार है कि किस लेवल के लिए कौनसी योग्यता होनी चाहिए. आरटीई एक्ट में भी इसी का प्रावधान किया गया है. सुप्रीम कोर्ट भी रामशरण मौर्य के जजमेंट में साफ कर चुका है कि एनसीटीई की गाइडलाइन सभी राज्य सरकारों को माननी होगी.

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