रिफाइनरी: केंद्र और कंपनी की खींचतान से राज्य सरकार को 1500 करोड़ का झटका

वर्ष 2020 में बाड़मेर में उत्पादन 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन था.

वर्ष 2020 में बाड़मेर में उत्पादन 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन था.

बाड़मेर (Barmer) में 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन हो रहा था. रिफाइनरी निर्माण तक इसे 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन करना है. लेकिन कमजोर दाम के चलते तेल के उत्पादन को नहीं बढ़ाया.

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  • Last Updated: March 27, 2021, 10:14 AM IST
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जयपुर. प्रदेश के निर्माणाधीन मेगा प्रोजेक्ट रिफाइनरी में उत्पादित हो रहे तेल से मिलने वाले राजस्व को तगड़ा झटका लगा है. यहां उत्पादित हो रहे तेल में प्रतिदिन 1.75 लाख बैरल की बजाए इस साल 1.50 लाख बैरल के करीब का औसत ही आया है. कोरोनाकाल में तेल की धार कम होने की एक वजह कंपनी और केंद्र सरकार के बीच हुए उत्पादन साझा अनुबंध के तहत मुनाफा बढ़ाने को लेकर चल रही खींचतान भी है. कंपनी इस मामले में उच्च न्यायालय तक पहुंच गई है और सरकार भी कंपनी को सिर्फ दो- दो माह का अनुबंध दे रही है.

दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल के कीमतों में कमी से तेल से मिलने वाली आय का गणित गड़बड़ा गया है. इस वित्तीय वर्ष में जनवरी माह तक बाड़मेर के तेल से 1422.26 करोड़ की आय हुई है. इस हिसाब से फरवरी- मार्च माह में अधिकतम 1700 करोड़ रूपए तक की आय होगी. आंकड़ों में बात करें तो यह पिछले नौ साल का न्यूनतम राजस्व होगा. बीते वर्ष तेल से 3220 करोड़ के करीब राजस्व की प्राप्ति हुई थी. इस हिसाब से करीब 1500 करोड़ का घाटा हो रहा है.

बॉम्बे हाई ही उच्चतम स्तर पर

तेल की कीमतों में कमी के अलावा दूसरा बड़ा कारण कंपनी और केंद्र सरकार में चल रही खींचतान भी है. इसी का परिणाम है कि बाड़मेर में तेल उत्पादन जो 2021 के अंत तक बॉम्बे हाई 2.80 लाख बैरल प्रतिदिन को पछाड़कर देशभर में रिकार्ड बनाने वाला था, वह गिरकर 1.50 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गया है. वर्ष 1999 में केयर्न कंपनी को उत्पादन साझा अनुबंध दिया गया था, जो 14 मई 2020 तक के लिए था. इस अनुबंध से ही कंपनी उत्पादन कर सकती है.
10 फीसदी और मुनाफा चाहता है केंद्र

केयर्न कंपनी ने वर्ष 2018 में इसके लिए केंद्र सरकार में फाइल लगा दी थी. इसके तहत अनुबंध 2030 तक दस साल के लिए बढ़ाने की मांग की गई. इसकी ऐवज में केंद्र सरकार ने कंपनी के सामने मुनाफे में दस प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ाने की शर्त रखी. यदि कंपनी यह डिमांड मानती है तो केंद्र सरकार की 60 फीसदी हिस्सेदारी हो जाती, क्योंकि ​फिलहाल कंपनी केंद्र सरकार को करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी दे रही है. इसे कंपनी ने घाटे का सौदा बताते हुए हाथ खींच लिए. इसके बाद से कंपनी और सरकार के बीच यह खींचतान चल रही है. कंपनी यह मामला हाईकोर्ट में भी ले जा चुकी है. सरकार भी कंपनी को सिर्फ दो- दो माह का अनुबंध दे रही है. इसका असर तेल उत्पादन पर भी नजर आ रहा है.

कोरानाकाल में और घट गया उत्पादन



बाड़मेर में 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन हो रहा था. रिफाइनरी निर्माण तक इसे 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन करना है. लेकिन कमजोर दाम के चलते तेल के उत्पादन को नहीं बढ़ाया. इसके विपरीत कोरोना काल में 25 लाख बैरल प्रतिदिन घटा दिया है. अब यहां 1.50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादित हो रहा है.

अब तक 38 हजार करोड़ के काम स्वीकृत

बाड़मेर में तेल का उत्पादन 2009 में शुरू हुआ था. अंतराष्ट्रीय बाजार में क्रूूड ऑयल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा होने के कारण वर्ष 2012- 13 और वर्ष 2013- 15 में तेल से क्रमश: 5059.88 करोड रूपए और 5953.11 करोड़ रूपए का सालाना राजस्व राज्य को मिला. दूसरी ओर राज्य में रिफाइनरी का कार्य गति पकड़ रहा है और 43 हजार 129 करोड़ की रिफाइनरी पर अब ​तक 38 हजार करोड़ तक के काम स्वीकृत हो चुके हैं.

बढ़ने के बजाए घट रहा उत्पादन

वर्ष 2020 में बाड़मेर में उत्पादन 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन था. रिफाइनरी निर्माण पर इसको 2021 के अंत तक 3 लाख बैरल प्रतिदिन 2021 में करने और 2022 में 5 लाख बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा था. इस लक्ष्य से यह उम्मीद जगी कि बाड़मेर बेसिन जल्द ही बॉम्बे हाई को पछाड़कर देश में उच्चतम स्तर पर होगा, लेकिन बदली परिस्थितियों में उत्पादन बढ़ने के बजाए और घट गया है. फिलहाल बाड़मेर को 1.50 लाख बैरल प्रतिदिन पर ला दिया है.

प्रदेश सरकार : कंगाली में आटा गीला

तेल उत्पादन की इन परिस्थितियां के​ लिए प्रदेश सरकार भी फिक्रमंद है. कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार को साल में 1500 करोड़ के राजस्व का झटका लग चुका है. यदि यही माहौल रहा तो कंपनी उत्पादन को और बढ़ाने के लिए तैयार नहीं होगी, इससे राजस्व का और नुकसान होगा.

कब कितना राजस्व

वित्तीय वर्ष राजस्व करोड़ रूपए में दाम डॉलर प्रति बैरल

2009-10 110.49 69.60

2010-11 1630.28 85.09

2011-12 3435.61 111.89

2012-13 5069.88 107.97

2013-14 5953.11 105.52

2014-15 2341.43 84.16

2015-16 2331.73 46.17

2016-17 2264.75 47.56

2017-18 2501.38 56.43

2018-19 3766.65 69.99

2019-20 3220.10 60.47

2020-21 1700.00 48.94

2020-21 का राजस्व अनुमानित है.
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