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फसली ऋण योजना में घोटाला, 6 लाख कथित किसान लोन के पैसे पर कर रहे थे मौज

Dinesh Sharma | News18 Rajasthan
Updated: October 6, 2019, 6:39 PM IST
फसली ऋण योजना में घोटाला, 6 लाख कथित किसान लोन के पैसे पर कर रहे थे मौज
राजस्थान देश में ऐसा पहला राज्य है, जहां फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है. (Demo Pic)

प्रदेश में करीब 6 लाख कथित किसान (Alleged farmers ) बरसों से बिना पात्रता (Without eligibility) के ही ब्याज मुक्त फसली ऋण (Interest free crop loan) का लाभ (Benefit) उठा रहे थे. पहली बार हुए ऑनलाइन फसली ऋण वितरण (Online crop loan disbursement) से यह चौंकाने वाला खुलासा (Revealed) हुआ है.

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जयपुर. राजस्थान प्रदेश में करीब 6 लाख कथित किसान (Alleged farmers) बरसों से बिना पात्रता (Without eligibility) के ही ब्याज मुक्त फसली ऋण (Interest free crop loan) का लाभ (Benefit) उठा रहे थे. पहली बार हुए ऑनलाइन फसली ऋण वितरण (Online crop loan disbursement) से यह चौंकाने वाला खुलासा (Revealed) हुआ है. इन अपात्र लोगों को फसली ऋण मिलना बंद होने से सहकारी बैंकों (Co-operative banks) का करीब 3 हजार करोड़ रुपया बच (Money saved) गया है. इन 3 हजार करोड़ की बचत का लाभ उन 5 लाख नए किसानों को मिलेगा, जिन्हें पहले कभी सहकारी बैंकों से ऋण नहीं मिल पाया था.

प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद खुली पोल
राजस्थान में किसानों को मिलने वाले ब्याज मुक्त फसली ऋण में अपात्र लोगों ने जमकर सेंध लगा रखी थी. प्रदेश में 6 लाख से भी ज्यादा लोग अपात्र होते हुए भी फसली ऋण का लाभ उठा रहे थे. राज्य सहकारी बैंक प्रबंधन के मुताबिक, ऑनलाइन फसली ऋण वितरण प्रक्रिया में 6 लाख से ज्यादा किसान इसलिए फसली ऋण की प्रक्रिया से बाहर हो गए, क्योंकि उनके नाम जमीन ही नहीं है. जबकि ये किसान पिछले कई बरसों से ब्याज मुक्त फसली ऋण का लाभ लेते रहे हैं. ऐसा ग्राम सेवा सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों की मिलीभगत से होता रहा है. सहकारी समितियों के व्यवस्थापक उन लोगों को भी लोन देते रहे जो हकीकत में किसान थे ही नहीं. लेकिन प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद यह पोल खुलकर सामने आ गई.

पहली बार लागू की गई ऑनलाइन फसली ऋण वितरण प्रक्रिया

राज्य सहकारी बैंक के एमडी इन्दर सिंह के अनुसार, राजस्थान देश में ऐसा पहला राज्य है, जहां फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है. पहली बार लागू की गई इस प्रक्रिया से अपात्र लोग फसली ऋण के दायरे से बाहर हो गए और सहकारी बैंकों का करीब 3 हजार करोड़ रुपए बच गए. पिछले साल खरीफ सीजन में जहां 18 लाख किसानों को 8 हजार करोड़ का ऋण वितरित किया गया था, वहीं इस बार महज 5 हजार करोड़ रुपए ही सहकारी बैंकों को वितरित करने पड़े.

परिवार के लोगों और रिश्तेदारों को ऋण दे देते थे
सहकारी बैंक प्रबंधन का कहना है कि समितियों के व्यवस्थापकों द्वारा भेदभाव तरीके से ऋण दिया जा रहा था. वहीं व्यस्थापक वास्तविक किसानों की बजाय अपने परिवार के लोगों और रिश्तेदारों को ऋण दे देते थे. लेकिन अब प्रक्रिया ऑनलाइन होने से यह बंद हो गया है.पाली: जिस बेटे का अंतिम संस्कार कर दिया वह जिंदा लौटा, आखिर क्या है माजरा ?

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First published: October 6, 2019, 4:45 PM IST
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