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Rajasthan: इस जिले में 1 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक, ऐसे बनेगा DL

Rajasthan: इस जिले में 1 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक, ऐसे बनेगा DL

Barmer driving license rule: बाड़मेर में जल्द ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर ट्रायल शुरू होगा.

Barmer driving license rule: बाड़मेर में जल्द ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर ट्रायल शुरू होगा.

Rajasthan News: राजस्थान के बाड़मेर (Barmer News) में अब ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लोगों को थोड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी. यहां 1 करोड़ की लागत से ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक बनाया जा रहा है. ड्राइविंग लाइसेंस (New Driving License Rule ) के लिए अब लोगों को ट्रायल पास करना होगा. सॉफ्टवेयर के जरिए रिजल्ट दिया जाएगा.

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बाड़मेर. एक जमाना हुआ करता था जब महज कागजी कार्रवाई से लोगों को वाहन चलाने का लाइसेंस मिल जाया करता था. लेकिन अब बदलते वक्त के साथ लाइसेंस की प्रक्रिया कई तकनीकों से गुजरने के बाद सफल हो पाएगी. राजस्थान (Rajasthan) के सरहदी बाड़मेर (barmer) में लाइसेंस की इस नई प्रक्रिया के आधार तैयार हो चुके है जिनकी विधिवत शुरुआत जल्द ही होगी. बाड़मेर में जिला परिवहन कार्यालय में अब जल्द ही ट्रायल ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक (automated driving track) पर होगा. पहले महज कागजों तक सीमित रहने वाला ट्रायल अब आसान नजर नहीं आएगा. बाड़मेर के परिवहन कार्यालय में करीब एक करोड़ रुपए की लागत से ट्रैक तैयार हो रहा है.

करीब तीन महीने में यह काम पूरा हो जाएगा. इसके बाद ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर ट्रायल शुरू होगा. ड्राइविंग ट्रैक पर कैमरों की निगरानी से चालक का परिणाम जारी होगा. गणित के 8 और अंग्रेजी के H पर गाड़ी चला कर दिखाना होगा तभी लाइसेंस मिलेगा.

जल्द तैयार होगा ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक

ड्राइविंग लाइसेंस की नई व्यवस्था ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक तैयार होने के बाद लागू हो जाएगी. इससे वाहन चालकों को ट्रायल के लिए लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा. आरटीओ कार्यालय में दोपहिया और कार के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के ट्रायल ऑटोमेटेड ट्रैक पर ली जाएगी. ट्रायल कार्य अब परिवहन निरीक्षक नहीं बल्कि कैमरे करेंगे. कैमरे ड्राइविंग ट्रायल दे रहे लाइसेंस आवेदक के वाहन चलाने के तरीके का विश्लेषण करेंगे और सॉफ्टवेयर उसी अनुरूप परिणाम जारी करेगा.

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अगर वाहन सही तरीके से चलाया तो आवेदक को पास करार दिया जाएगा. परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर बगताराम का कहना है कि ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में ऑटोमेटेड ट्रैक पर कैमरों के जरिए ट्रायल लेने से प्रक्रिया पारदर्शी होगी. नई प्रक्रिया में परिवहन विभाग के निरीक्षकों का दखल नहीं रहेगा. लाइसेंस जारी करने का कार्य सॉफ्टवेयर पर निर्भर होगा. इस दौरान कोई सवाल भी नहीं उठा पाएगा. करीब एक करोड़ रुपये की लागत से ट्रैक तैयार हो रहा है. एक तरफ जहां इस नवीन तकनीक के ट्रैक के बाद वाहन चालकों को हर कसौटी पर खरा उतरना पड़ेगा वहीं दूसरी तरफ छोटी सी भी कमी लोगों को लाइसेंस के अधिकार से दूर कर देगी.

Tags: Barmer news, Rajasthan news, Traffic rules

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