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Rajasthan: सांसद हनुमान बेनीवाल पर हमले का मामला गहलोत सरकार के गले की हड्डी बना, जानिये अब क्या हो रहा है

बेनीवाल ने इस मसले को गंभीर बताते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय से इसमें हस्तक्षेप की मांग की है. (फाइल फोटो)

बेनीवाल ने इस मसले को गंभीर बताते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय से इसमें हस्तक्षेप की मांग की है. (फाइल फोटो)

गत वर्ष बाड़मेर (Barmer) के बायतू में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) के काफिले पर हुआ हमला राज्य सरकार (State government) के गले की हड्डी बनता जा रहा है. इस मामले में लगातार एक के बाद एक पेंच फंसते जा रहे हैं.

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जयपुर. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) पर हमले का मामला राज्य सरकार के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है. राज्य सरकार अब इस मामले में विधिक राय (Legal opinion) ले रही है. इसके लिये गृह विभाग ने राय देने के लिए AAG को पत्र लिखा है. बेनीवाल पर हमले मामले की लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति में सुनवाई चल रही है. मुख्य सचिव और डीजीपी (Chief Secretary and DGP) को इस मामले में विशेषाधिकार हनन समिति को जवाब पेश करना है. पिछली सुनवाई में समिति ने मुख्य सचिव को 7 दिन में निर्णय से अवगत कराने के निर्देश दिए थे.

बाड़मेर में हुआ था बेनीवाल पर हमला
सांसद बेनीवाल पर हमला 12-13 नवम्बर 2019 की रात बाड़मेर में हुआ था. वहां सांसद हनुमान बेनीवाल के काफिले पर पथराव किया गया था. इस मामले में पुलिस ने बायतु थाने में मामला दर्ज कर लिया था. लेकिन 14 नवंबर को सांसद बेनीवाल ने इस मामले में पुलिस को ई-मेल किया था. इस पर पुलिस ने नया केस दर्ज नहीं कर उसे पूर्व की एफआईआर में ही शामिल कर लिया. इस पर सांसद बेनीवाल ने इसकी शिकायत लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति को की. समिति ने सांसद की शिकायत पर संज्ञान लिया था.

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कमेटी ने इसे एक ही वारदात माना
इस मामले में डीजीपी भूपेंद्र सिंह यादव की ओर से गठित चार सदस्यीय कमेटी ने एफआईआर और ई-मेल में उल्लेखित वारदात को एक मानते हुए दूसरी प्राथमिकी दर्ज नहीं करने की राय दी है. इसके बाद डीजी क्राइम एमएल लाठर ने एसीएस गृह से मामले में महाधिवक्ता (AG) या अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) से राय लेने की सलाह दी है.

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समिति ने दिये थे ये सुझाव
हमले मामले में मुख्य सचिव और डीजीपी गत 11 अगस्त को विशेषाधिकार हनन समिति के सामने पेश हुए थे. इसके बाद समिति ने इस केस में लॉ और सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का संदर्भ देते हुए सलाह दी. फिर समिति ने ई-मेल पर दूसरी एफआईआर दर्ज करने के बारे में विधिक राय लेने की भी सलाह दी थी. समिति ने मुख्य सचिव को इस मामले में एक सप्ताह में निर्णय लेने के निर्देश दे रखे हैं.

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