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Rajasthan News: पूनिया-राजे की तस्‍वीर पर भड़के RLP नेता बेनीवाल, बोले- टूटी हुई खाट और झुका हुआ जाट मंजूर नहीं

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी संयोजक हैं हनुमान बेनीवाल.

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी संयोजक हैं हनुमान बेनीवाल.

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी संयोजक हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने राजस्थान के भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ उनकी एक तस्‍वीर को लेकर जमकर निशाना साधा है.

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जयपुर. टूटी हुई खाट और झुका हुआ जाट, राजस्थान के जाटों को मंजूर नहीं होगा. यह दावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी संयोजक हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने किया है. उन्‍होंने भाजपा के राजस्थान के अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) की उस तस्वीर पर तंज कसा है, जिसमें भाजपा अध्‍यक्ष राजस्‍थान की पूर्व सीएम को खाना परोसते नजर आ रहे हैं. इस दौरान पूनिया रायते की मनुहार करते दिखे. जबकि टेबल पर खाना खा रहीं राजे उनको देखकर टेढ़ी नजरों से मुस्कराती नजर आईं. दरअसल, यह तस्वीर मंगलवार को भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के बाद लंच की है.

हनुमान बेनीवाल ने तंज कसा कि जाट सतीश पूनिया को अपना नेता मानने लगे थे. उनको अगला सीएम देखने लगे, लेकिन पूनिया जिस तरह राजे के आगे झुके उससे जाट निराश है. अब जाट पूनिया को नेता मानना छोड़ देंगे क्‍योंकि जाटों को कभी भी झुका हुआ जाट मंजूर नहीं होगा. बेनीवाल ने कहा,'मारवाड़ में जाटों में कहावत है कि टूटी हुई खाट और झुका हुआ जाट दोनों ही जाट नहीं स्वीकारते.' उनका इशारा इस तरफ है कि भाजपा पूनिया को सीएम प्रोजेक्ट नहीं करेगी. राजे को मनाने का मतलब फिर से वही भाजपा का सीएम का चेहरा हो सकती हैं. राजस्थान में जाट समुदाय में जाट सीएम का नारा बेहद चर्चित है और जाटों की भवानाओं से जुड़ा है.

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पूनिया और राजे की यह तस्वीर मंगलवार को भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के बाद लंच की है.




राजस्थान में जाट न सिर्फ सियासत में सबसे ताकतवर हैं बल्कि यह सबसे बड़ा और मजबूत वोट बैंक भी है. 2018 के विधानसभा चुनाव में जाटों के जबरदस्त समर्थन की वजह से ही जाट बहुल पश्चिम राजस्थान में हनुमान बेनीवाल ने भाजपा और कांग्रेस की हालत पतली कर दी थी. यही नहीं, बेनीवाल की वजह से ही कांग्रेस पश्चिम राजस्थान में 2018 के विधानसभा चुनाव में पिछड़ गई थी. इस दौरान बेशक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने तीन सीटें जीती हों, लेकिन मारवाड़ में पार्टी ने तीस से अधिक सीटों पर दोनों पार्टियों के जाट वोट बैंक में भारी सेंधमारी की थी. बेनीवाल तब से राजस्थान में सबसे बड़े जाट नेता के रुप में उभरे हैं.
भाजपा ने खेला दांव
जाटों में अपनी साख फिर कायम करने के लिए भाजपा ने जाट समुदाय के चेहरे सतीश पूनिया को प्रदेशअध्यक्ष की कमान सौंपी तो कांग्रेस ने भी जाट समुदाय से ही ताल्लुक रखने वाले गोविंद सिंह डोटसरा को राजस्‍थान प्रमुख बना डाला. जबकि पूनिया और डोटासरा लंबे समय से इस कोशिश में जुटे हैं कि जाटों को बेनीवाले के पाले अपनी-अपनी पार्टी की ओर ला सकें. वहीं, हनुमान बेनीवाल इस इंतजार में हैं कि इन दोनों की साख जाट समुदाय में गिरे तब ही वे जाट वोट बैंक पर पकड़ बना कर रख पाएंगे.

हनुमान बेनीवाल किसान आंदोलन से पहले तक एनडीए का हिस्सा थे, तब वे राजस्थान में भाजपा के सहयोगी दल थे, लेकिन अब उनकी जंग भाजपा और कांग्रेस से है. इस जंग में कामयाबी के लिए बेनीवाल की पहली चुन्नौती है खुद की मजबूत और ताकतवर जाट नेता की छवि को बनाकर रखना. वह जानते हैं कि जाट तब ही साथ देंगे जब उन्हें यह पता होगा कि न बीजेपी न कांग्रेस जाट नेता को सीएम प्रोजेक्ट करेगी, तब जाट गुस्से में न बीजेपी का साथ देंगे, न कांग्रेस का और फिर उनके ही साथ खड़े होंगे. हालंकि जाट समुदाय ने कई बार उनके बारे में राय को चुनाव में झुठलाया भी है.
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