देश में ऑटिज्म के रोल मॉडल अक्षय बस इसलिए KBC के शो में जाना चाहते हैं

राजस्थान के पहले आर्टिस्टिक ग्रेजुएट अक्षय भटनागर स्कूल, कॉलेज, खेल और सरकारी नौकरी के इम्तिहान में खुद को साबित कर चुके हैं और अब कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) के शो में जाना चाहते हैं.

sambrat chaturvedi | News18Hindi
Updated: August 12, 2019, 10:13 AM IST
देश में ऑटिज्म के रोल मॉडल अक्षय बस इसलिए KBC के शो में जाना चाहते हैं
फोटो- अक्षय भटनागर.
sambrat chaturvedi
sambrat chaturvedi | News18Hindi
Updated: August 12, 2019, 10:13 AM IST
राजस्थान के पहले ऑटिस्टिक ग्रेजुएट अक्षय भटनागर स्कूल, कॉलेज, खेल और सरकारी नौकरी के इम्तिहान में खुद को साबित कर चुके हैं और अब कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) के शो में जाना चाहते हैं. अक्षय चाहते हैं कि अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के सामने हॉट सीट पर बैठकर वो भी 'कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati)' के सवालों का जवाब दें. जयपुर के रहने वाले अक्षय सामान्य प्रतिभागी की तरह प्रतियोगी परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले देश के पहले ऑर्टिस्टिक के रूप में अपनी अनूठी पहचान रखते हैं.

क्यों जाना चाहते हैं KBC शो में अक्षय ?

अक्षय जैसा ऑल राउंडर ऑटिस्टिक युवक पूरे देश में ऑटिज्म बच्चों और बड़ों के बीच मिसाल बने हुए हैं. ऑटिज्म होने के बावजूद स्कूल से कॉलेज तक और फिर नौकरी हासिल करने तक असीमित प्रतिभा का लोहा मनवा चुके अक्षय को राष्ट्रीय स्तर पर कई अवॉर्ड मिल चुके हैं. अब अक्षय का एक ही सपना है कि वो केबीसी की हॉट सीट पर बैठे. दरअसल, अक्षय किसी ऑटिस्टिक के तौर पर उस वर्ग के वजूद को साबित करना चाहते हैं जिन्हें आज भी समाज में मंदबुद्धि और पागल समझने वालों की संख्या ज्यादा है. वो बताना चाहते हैं कि उनकी (ऑटिस्टिक) गति धीमी भले ही हो लेकिन वे मंजिल पर पहुंच सकते हैं.

कई सालों से KBC की दीवानगी, अब साबित करना चाहता है

प्रतिभा भटनागर बताती है कि पिछले कई सालों से अक्षय कौन बनेगा करोड़पति देखता आ रहा है. वो हर बार पूछता था कि क्या वाे भी केबीसी शो में जा सकता है. मैं हर बार कहती थी कि पढ़ों, तैयारी करो फिर तुम भी जा सकते हों. प्रतिभा कहती है, इस वर्ष अक्षय ने कहा कि अब तो वो ग्रेजुएट भी हो चुका है, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी ले चुका है. क्या अब भी वो केबीसी में नहीं जा सकता?

...और केबीसी से फोन आ गया

प्रतिभा ने बताया कि अक्षय की इच्छा के चलते इस साल मैंने केबीसी से संपर्क किया. जैसा सोचा था वहां से अच्छा रिस्पॉस मिला. करीब दो महीने पहले वहां से फोन आया. अक्षय से 3 सवाल पूछे गए. इनमें से दो सवालों के जवाब देने के बाद अक्षय ने तीसरे सवाल का जवाब देने में कुछ देर लगा दी. इसके बाद भी अक्षय को उम्मीद है कि केबीसी से फिर से उसके लिए फोन आएगा.
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फोटो- मां प्रतिभा भटनागर के साथ अक्षय.


हर स्तर पर संघर्ष, मां को नौकरी छोड़नी पड़ी

चार साल की उम्र में अक्षय के पेरेंट्स का पता चला की वो सामान्य नहीं ऑटिज्म का शिकार है. आगे का जीवन उसे विशेष योग्यजन के रूप में ही जीना होगा जो बेहद मुश्किलों भरा होगा. चूंकि ऑटिस्टिक के रूप में किसी बच्चे के लिए सामान्य पढ़ाई-लिखाई आसान नहीं होती इस लिए मां प्रतिभा भटनागर ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ कर अक्षय की देखभाल में जुट गई. बेटे के हौसला अफजाई के साथ समाज में उसे उचित स्थान दिलाना भी संघर्ष पूर्ण रहा. पहले स्कूल में दाखिले को लेकर तो फिर कॉलेज में पढ़ाई के लिए लड़ना पड़ा. कानूनी लड़ाई लड़ी और जीती तो जयपुर के एक कॉलेज में सामान्य बच्चों के बीच पढ़ने का मौका मिला. मां-बेटे का ये संघर्ष रंग लाया और अक्षय सामान्य प्रक्रिया के तहत प्रतियोगी परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाला पहला ऑटिस्टिक बना.

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फोटो- उपराष्ट्रपति के हाथों अवॉर्ड लेते हुए अक्षय.


ऐसे ऑटिस्टक का रॉल मॉडल

3 दिसंबर 2018 को रोल मॉडल श्रेणी में उपराष्ट्रपति के हाथों सम्मान. इसी साल 23 फरवरी को को एबिलिटी मास्टरी अवॉर्ड जीत चुके हैं. यह पूरे देश के 172 प्रतिभागियों में से सिर्फ पांच लोगो को मिला है. 2017 में पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप राजस्थान में एथलेटिक्स में स्वर्ण एवं कांस्य पदक तथा 7 मार्च 2019 को शॉटपुट में पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मेडल जीत चुके हैं. हाल ही चुनाव आयोग ने अपने स्वीप कार्यक्रम में ऑटिज्म श्रेणी में अक्षय भटनागर को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया था.

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फोटो- निर्वाचन आयोग के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में अक्षय भटनागर(एकदम दाएं)

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First published: August 9, 2019, 5:08 PM IST
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