दिव्यांगों की परेशानी समाज पर कलंक, उन्हें आत्मनिर्भर बनाए बिना समाज अधूरा- भागवत
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दिव्यांगों की परेशानी समाज पर कलंक, उन्हें आत्मनिर्भर बनाए बिना समाज अधूरा- भागवत
सरसंघचालक मोहन भागवत। फोटो: न्यूज18 राजस्थान

सरसंघचालक मोहन भागवत ने दिव्यांगों के प्रति समाज का नजरिया बदलने का आव्हान किया. उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की परेशानी समाज पर कलंक है. उन्हें आत्मनिर्भर बनाए बिना समाज अधूरा है.

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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने समाज से दिव्यांगों को स्वावलंबी बनाने में सहयोग देने का आव्हान किया है. संघ के 'सक्षम' प्रकल्प के दस साल पूरा होने के मौके पर जयपुर के जामडोली में आयोजित कार्यक्रम में रविवार को भागवत ने कहा कि दिव्यांगों को आज करुणा की नहीं बल्कि सहायता की जरूरत है. उनके सक्षम बनने तक हमारा अभियान नहीं रुकेगा.

सरसंघचालक मोहन भागवत ने दिव्यांगों के प्रति समाज का नजरिया बदलने का भी आव्हान किया. उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की परेशानी समाज पर कलंक है. उन्हें आत्मनिर्भर बनाए बिना समाज अधूरा है. दिव्यांगों के प्रति अपनत्व का भाव और उनकी समस्याओं का समाधान हमारी प्राथमिकताओं में होना चाहिए. इसलिए हमने सक्षम के जरिये दिव्यांगों का अखिल भारतीय संगठन खड़ा किया. दस साल में ही सक्षम अपने लक्ष्य की तरफ तेजी से आगे बढ़ने में कामयाब रहा है.

साढ़े तीन लाख दिव्यांगों को बनाया हुनरमंद
केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने मोदी सरकार की दिव्यांगों के कल्याण के लिए शुरू की गई योजनाओं को गिनाया. गहलोत ने कहा कि मोदी सरकार ने दिव्यांगों की अलग अलग केटेगरी बनाने के बाद यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू किया है, जिसमें राजस्थान पहले नंबर पर है. अब तक 7300 कैम्प आयेाजित किए गए हैं. उनमें करीब 12 लाख दिव्यांगों को साढ़े छह सौ करोड़ के उपकरण देकर उन्हें राहत देने की कोशिश की गई है. साढ़े तीन लाख दिव्यांगों को कौशल प्रशिक्षण के जरिये हुनरमंद बनाया गया है.
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