हाईकोर्ट में अनिवार्य शिक्षा का अधिकार पर 15 जनवरी तक सुनवाई टली

अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) से जुड़े मामले में होने वाले सुनवाई टल गई.
अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) से जुड़े मामले में होने वाले सुनवाई टल गई.

अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) से जुड़े मामले में होने वाले सुनवाई टल गई.

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राजस्थान हाईकोर्ट में मंगलवार को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) से जुड़े मामले में होने वाले सुनवाई टल गई. राज्य सरकार ने जवाब के लिए समय मांगा और इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी तक टल गई.

जस्टिस केएस झवेरी की खण्डपीठ में यह सुनवाई टली. प्रोफेसर राजीव गुप्ता और अन्य की जनहित याचिका पर मामले की सुनवाई होनी थी. याचिका में इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलप नहीं करने को चुनौती दी गई है.

बता दें कि शीतकालीन अवकाश के बाद मंगलवार को राजस्थान प्रदेश की अदालतों में फिर से कामकाज शुरू हुआ. हाईकोर्ट से लेकर अधीनस्थ अदालतों में इसी के साथ नियमित सुनवाई शुरू हो गई. हाई कोर्ट में 22 दिसम्बर और अधीनस्थ अदालतों में 23 दिसम्बर से शीतकालीन अवकाश चल रहे थे.



न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश दिनेश मेहता की खण्डपीठ ने प्रो. राजीव गुप्ता की इस जनहित याचिका पर पहले भी बच्चों को नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम की पालना को लेकर राज्य सरकार से शपथ पत्र मांगा था. कोर्ट ने पूछा था कि सरकार बताए कि अब तक इस कानून की पालना के लिए क्या-क्या प्रयास किए हैं?
प्रार्थीपक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2010 में बच्चों को नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हो गया। वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने इसकी पालना के लिए नियम बना दिए इसके तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के लिए छात्र-शिक्षक अनुपात व अन्य संसाधनों का प्रावधान है, लेकिन सरकारी स्कूलों को इनकी कमी से जूझना पड़ रहा है. इससे कानून का मकसद पूरा नहीं हो रहा है.
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