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Explained : पंजाब की तर्ज पर 'ऑपरेशन राजस्थान' की तैयारी, जानिए क्या है बदलाव का पूरा ब्लू प्रिंट

राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत, सचिन पायलट और सीपी जोशी की भूमिका बदल सकती है....

राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत, सचिन पायलट और सीपी जोशी की भूमिका बदल सकती है....

Rajasthan Congress Politics: पंजाब की तर्ज पर अब राजस्थान कांग्रेस में भी बदलाव का ब्लू प्रिंट तैयार हो रहा है. सूत्र बताते हैं कि एक नहीं बल्कि दो-दो विकल्पों पर विचार हो रहा हैं. इस ब्लू प्रिंट के आधार पर अशोक गहलोत, सचिन पायलट की भूमिका में बदलाव तो आएगा ही. पंजाब में जैसे दलित नेता की लॉटरी लगी है, वैसे ही यहां किसी ब्राह्मण या जाट नेता की भी तकदीर बदल सकती है.

  • News18Hindi
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जयपुर. पंजाब के बाद अब ‘ऑपरेशन राजस्थान’ की बारी है. राजस्थान में सियासी संकट के दौरान कहां तो राहुल गांधी 13 माह तक सचिन पायलट से नहीं मिले थे और अब सप्ताह में दो बार मुलाकात हो चुकी है. दूसरी बार मुलाकात में प्रियंका गांधी ने भी सचिन से बातचीत की. इस बीच चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा भी राहुल गांधी से मिले हैं. प्रदेश प्रभारी अजय माकन दोनों से मिल चुके हैं. इन मुलाकातों से लगता है कि राजस्थान में बदलाव का ब्यू प्रिंट पार्टी आलाकमान ने तैयार कर लिया है. इस ब्लू प्रिंट बहुत जल्द अमली जामा पहनाया जा सकता है. कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के भी एक अक्टूबर को जयपुर आने की संभावना है. वे यहां मं​त्री, विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक लेंगे. आइये विस्तार से जानते हैं क्या है बदलाव का ब्लू प्रिंट…

दरअसल, पंजाब आपरेशन के बाद 17 सितंबर को राहुल गांधी और सचिन पायलट की दिल्ली में चली लंबी बैठक बड़े बदलाव का संकेत देने लगी थी. राहुल करीब 13 माह बाद सचिन पायलट से मिले. इसके बाद सचिन पायलट की स्पीकर सीपी जोशी से जयपुर में मुलाकात हुई. इस मुलाकात की तस्वीर न सिर्फ जानबूझकर खिंचवाई गई है, बल्कि राजनीतिक विरोधियों तक पहुंचाई भी गई है. ताकि वे इसके निहितार्थ जान लें.

सीपी जोशी और सचिन की मुलाकात के मायने

पीसीसी अध्यक्ष रहते भले ही सचिन पायलट ने सीपी जोशी को ज्यादा भाव न दिया हो. लेकिन अब तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूं का जाप करते हुए दोनों की गलबहियां बताती हैं कि पंजाब की राजनीतिक फिल्म का रूपांतरण राजस्थान में भी हो सकता है. जैसे पंजाब में नवजोत और कैप्टन की लड़ाई का फायदा चरणजीत चन्नी ले उड़े. वैसे ही राजस्थान में पायलट और गहलोत की अदावत का फायदा किसी और को भी हो सकता है.

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प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा की कुर्सी को खतरा

दरअसल, इस मुलाकात की पटकथा तो उसी दिन लिखी जा चुकी थी, जिस तक सचिन पायलट की राहुल गांधी से लंबी मुलाकात हुई थी. इसमें तीन ही मुद्दों पर खास बात हुई. संगठन और सत्ता में बदलाव और खुद सचिन की भविष्य की भूमिका पर मंथन हुआ. संगठन में बदलाव के मायने यह निकाले जा सकते हैं कि शिक्षा मंत्री ओर प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की कुर्सी को खतरा हो सकता है.

कामराज प्लान से होगी मंत्रियों की छुट्टी

सत्ता में बदलाव में उन मंत्रियों की छुट्टी होगी, जिनका काम जनता और प्रदेश प्रभारी अजय माकन को पसंद नहीं आया. या फिर जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई रायशुमारी में विधायक जिन मंत्रियों के खिलाफ नजर आए. इसमें कामराज प्लान लागू हो सकता है. यानी काम के मंत्री ही राज में रहें और बाकी को संगठन के काम में लगाया जाए. खुद अजय माकन कह चुके हैं कि प्रदेश के कुछ मंत्री संगठन में जाने के इच्छुक हैं.

पंजाब फॉर्मूला राजस्थान में लागू करने की तैयारी

बड़ा सवाल सचिन पायलट की भावी भूमिका को लेकर है. जिस तरह पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू के चाहने के बावजूद उन्हें कैप्टन अमरिंदर की जगह मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष पद देकर संतुष्ट कर दिया गया और अब उनके चाहने पर दलित को मुख्यमंत्री बना दिया गया है. सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस हाईकमान कुछ ऐसे ही फार्मूले को राजस्थान में भी लागू करने पर विचार कर रहा है.

पहला ब्लू प्रिंट : सचिन प्रदेशाध्यक्ष व गृहमंत्री

कांग्रेस आलाकमान के ब्लू प्रिंट के एक मायने यह हो सकते हैं कि सचिन की बगावत के बाद उन्हें मुख्यमंत्री तो नहीं बनाया जाए, अलबत्ता उन्हें संगठन में प्रदेश अध्यक्ष और सत्ता में गृह मंत्री बना दिया जाए. इस तरह पिछले डेढ़ साल से अज्ञातवास भोग रहे सचिन पायलट के अच्छे दिन लौट सकते हैं. इसके अलावा गहलोत-पायलट की लड़ाई में अच्छे दिन सीपी जोशी के भी आ सकते हैं. कभी एक वोट से हारने के कारण मुख्यमंत्री की रेस से बाहर हुए सीपी जोशी के ग्रह अब अच्छे दिनों का संकेत दे रहे हैं.

ब्राह्मण या जाट नेता मुख्यमंत्री की रेस में

सूत्र बताते हैं कि उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए ब्राह्मण वोटों को अपने पाले में करने के लिए राजस्थान में किसी ब्राह्मण को सीएम बनाया जा सकता है. इस रेस में स्पीकर सीपी जोशी और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा सबसे आगे हैं. इसके अलावा राजस्थान की राजनीति की बात करें तो आलाकमान किसी जाट नेता को भी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर सकता है. इस रेस में हरीश चौधरी आगे बताए जा रहे हैं.

हाईकमान अब गहलोत को विश्वास में जरूर लेगा

पंजाब में बदलाव के बाद के हालातों से हाईकमान को यह सबक जरूर मिला कि जो बदलाव किया गया, उसमें न तो कैप्टन की सहमति ली गई और न ही उन्हें मुख्यमंत्री पद से ससम्मान हटाकर संगठन में कोई बड़ा पद दिया गया है. इससे कैप्टन खासे भड़के हुए हैं. उन्होंने राहुल—प्रियंका के खिलाफ भी बयान दिए हैं. ऐसे में पंजाब फार्मूला यहां लागू होता है तो हाईकमान न सिर्फ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को विश्वास में लेगा, बल्कि उन्हें संगठन में बड़ी ओहदा दिया जा सकता है.

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दूसरा ब्लू प्रिंट : गहलोत मुख्यमंत्री और सचिन गृह मंत्री

वैसे भी राजस्थान के गांधी और जादूगर के नाम से विख्यात गहलोत को राजनीति की बिसात पर आसानी से पटखनी नहीं दी सकती. दूसरे ब्लू प्रिंट के दौर पर उन्हें मुख्यमंत्री बने रहने दिया जाए और सचिन गृहमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालें. मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में सचिन पायलट समर्थकों को बराबर की भागीदारी मिले.

गहलोत माने तो राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष होंगे

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक यदि गहलोत यदि मुख्यमंत्री पद से हटने के लिए मान गए तो उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है. इससे नए मंत्रिमडल और राजनीतिक नियुक्तियों का भी रास्ता साफ हो जाएगा. जोशी—पायलट के एक होने से सचिन के समर्थक विधायकों को भी कैबिनेट में यथोचित जगह मिल जाएगी. कांग्रेस के दिल्ली दरबार में तेजी से बदल रहे समीकरणों से कई नेताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं. प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने कहा था कि बदलाव की सारी पटकथा लिखी जा चुकी है, बस में मुख्यमंत्री के स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे हैं और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी अब पूरी सक्रियता के साथ कामकाज करने लगे हैं.

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