Rajasthan News: सचिन का मिशन 'सत्ता' कांग्रेस पूरा करेगी या पायलट लिखेंगे कोई नई इबारत ?

पायलट दिल्ली पहुंचे तो उम्मीद थी उनकी बातों को पार्टी आलाकमान या पार्टी की रणनीतिकार प्रियंका गांधी सुनेंगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है.

Sachin Pilot's Mission Power: राजस्थान में सत्ता के लिये चल रहे संघर्ष के बीच आलाकमान से अपनी बातें मनवाने के लिये पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट गत छह दिन से दिल्ली (Delhi) में डेरा जमाये बैठे हैं. लेकिन वहां उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है.

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जयपुर. अपने सियासी मिशन को पूरा करने के लिए राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट  (Sachin Pilot) ने दिल्ली में डेरा डाल दिए हैं. सचिन पायलट का दिल्ली में आज छठा दिन है लेकिन अभी तक उनकी मुलाकात पार्टी आलाकमान या पार्टी की रणनीतिकार और महासचिव प्रियंका गांधी से नहीं हो पाई है. अपनी बात को मनवाने के लिए सचिन दिल्ली में है, लेकिन वहां उनकी सुनने वाला कोई नहीं है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राहुल गांधी सचिन पायलट से नाराज चल रहे हैं.

सीएम बनने के लिए राजस्थान की सियासत में सचिन पायलट की यह दूसरी लहर है जो अब ठंडी पड़ती दिखाई दे रही है. सचिन पायलट का एक स्टेटमेंट आया था की पार्टी ने उनसे जो वादा किया था वह पूरा करने में विफल रही है. उसके बाद यह मामला और तूल पकड़ गया. सचिन पायलट दिल्ली पहुंचे तो उम्मीद थी उनकी बातों को पार्टी आलाकमान या पार्टी की रणनीतिकार प्रियंका गांधी सुनेगी लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है.

प्रमोद कृष्णम मिलने पहुंचे पायलट से
इस दौरान देखा जाए तो प्रियंका गांधी और सचिन पायलट की टेलीफोन से वार्ता हुई है. यह बात सिर्फ सूत्रों के हवाले से है. सच्चाई क्या है सब जानते हैं. अगर बात हुई होती तो वे डेरा नहीं जमाते. सचिन पायलट की पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात हुई है. प्रियंका गांधी के करीबी आचार्य प्रमोद कृष्णम सोमवार शाम को खुद सचिन पायलट के घर 5 कैनिग लेन पहुंचकर उनसे मिले और बात की है. उसके बाद उनका पहला बयान था सचिन को राजस्थान की जनता बहुत प्यार करती है. उनकी ही अध्यक्षता में पार्टी जीती है. आचार्य प्रमोद कृष्णम तो सचिन को सीएम बनने का आर्शीवाद भी दे चुके हैं. आचार्य प्रमोद कृष्णम के बाद पार्टी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने भी उनसे मुलाकात की.

काजी निजामुद्दीन और पायलट की अहम मुलाकात
सचिन पायलट मंगलवार को सुबह 9 बजकर 20 मिनट पर अपने दिल्ली स्थित आवास से उत्तराखंड के मंगलौर रवाना हुए. वहां उन्होंने राहुल गांधी के करीबी और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन से मुलाकात की. कुछ दिनों पहले काजी निजामुद्दीन की मां का इंतकाल हो गया था. सचिन उनसे दुख बांटने भी पहुंचे थे. इस दौरान करीब एक घंटे तक काजी निजामुद्दीन और सचिन पायलट की मुलाकात अकेले में हुई है, जो कि महत्वपूर्ण है. यह मुलाकात राजस्थान की सियासी अटकलों को लेकर हुई है.

कुछ विधायक हालात को भांपकर बदलने लगे हैं खेमा
खुद सचिन पायलट ने मंगलौर जाते वक्त कहा कि हम वहां से जयपुर जा सकते हैं. लेकिन वे जयपुर न जाकर वापस दिल्ली आ गए हैं. सचिन पायलट आज बुधवार को दिल्ली में भी मौजूद हैं. अब सवाल यह है कि सचिन पायलट जयपुर कब जाएंगे ? क्या दिल्ली से अपनी बातों को मनवा कर जाएंगे या अपने लिए कोई नया रास्ता तैयार करेंगे. क्योंकि देखा जाए तो सचिन के जो समर्थक विधायक हैं वे लगातार अपने आपको हासिए पर महसूस कर रहे हैं. अब कुछ विधायक ऐसे भी हैं जो समय को भांपकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गुणगान करने लगे हैं. जैसे हाल ही में भंवरलाल शर्मा का स्टेटमेंट आया है अशोक गहलोत हमारे नेता हैं और अनुभवी हैं.

हासिये पर आये पायलट समर्थक
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने एक साल पहले राजस्थान के सियासत में बवंडर उठाया था और उसके बाद उनके लोगों को जिस तरह हासिए पर डाल दिया गया है उससे पायलट परेशान हैं. सचिन पायलट चाहते हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार कर उनके समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. लेकिन यह संभव होता दिखाई नहीं दे रहा है. क्योंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कोरोना संक्रमण का समय चल रहा है मैं दो महीने तक किसी से मिलूंगा नहीं. दूसरी तरफ सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक साल पहले जब गहलोत सरकार अस्थिर होने की स्थिति में थी तो बसपा के छह विधायक पार्टी छोड़कर के कांग्रेस में शामिल हुए थे. उन्होंने गहलोत सरकार को बचाने में पूरी मदद की थी.

क्या पायलट अब खुद रास्ता बनाएंगे ?
बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों की मंगलवार को विधायक संदीप यादव के घर पर बैठक हुई. अब ये विधायक भी दावेदारी कर रहे हैं कि असली कांग्रेसी तो हम हैं. क्योंकि जब सरकार को अस्थिर करने की कोशिश हो रही थी तो हमने उसे बचाया था. उन्हें भी सरकारी नियुक्तियों और मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए. ऐसे में बड़ा सवाल है सचिन पायलट का जो मिशन सत्ता है वह कैसे पूरा होगा ? क्या पार्टी आलाकमान या पार्टी की रणनीतिकार प्रियंका गांधी सचिन पायलट के लिए कोई नया रास्ता तैयार करेगी या पायलट अब खुद रास्ता बनाएंगे ?

पालयट और राजे के हालात एक जैसे हैं
राजस्थान की सियासत में एक और दिलचस्प चीज देखने को मिल रही है कि एक तरफ जहां कांग्रेस में सचिन पायलट हाशिए पर दिखाई दे रहे हैं वहीं में बीजेपी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे भी हाशिए पर हैं. बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय पर लगे होर्डिंग्स से वसुंधरा राजे का फोटो हटा दिया गया है. देखा जाए तो कांग्रेस में जो हालात सचिन पायलट की बनी हुई है वही बीजेपी में वसुंधरा राजे की बनी हुई है. सूत्र बताते हैं कि अगर समय रहते बीजेपी वसुंधरा राजे को और कांग्रेस सचिन पायलट को नहीं मनाती है कहीं ऐसा न हो आने वाले समय दोनों लोग मिलकर राजस्थान की सियासत में कोई नई इबारत लिखना शुरू कर दे.

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