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सचिन पायलट बोले- हम न भूलें कि कांग्रेस के 21 विधायक रह गए थे, अब सत्‍ता में लाने वालों को सम्‍मानित करने का वक्‍त

पायलट ने कहा कि जो कार्यकर्ता पार्टी को सत्ता में लेकर आए हैं उनको अब सम्मानित करने का समय है.
पायलट ने कहा कि जो कार्यकर्ता पार्टी को सत्ता में लेकर आए हैं उनको अब सम्मानित करने का समय है.

पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने जयपुर में बड़ा बयान दिया है. पायलट ने मकर संक्रांति पर पतंग के पेंच लड़ाते हुये कहा कि ि‍जिन कार्यकर्ताओं की बदौल कांग्रेस सत्‍ता में आई है, उन्‍हें अब सम्‍मानित करने का वक्‍त है.

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जयपुर. कांग्रेस में राजनीतिक नियुक्तियों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, लेकिन कभी कोरोना तो कभी चुनावों के कारण इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है. राजनीतिक नियुक्तियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे नेताओं के लिए पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) का बयान काफी राहत पहुंचाने वाला है. पायलट ने मकर संक्रांति के मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि जनवरी में राजनीतिक नियुक्तियां करने का फैसला किया गया था. उम्मीद है वह पूरा हो जाएगा.

पायलट ने कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपाते हुए कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे पास केवल 21 विधायक रह गए थे. ऐसे में जो कार्यकर्ता पार्टी को सत्ता में लेकर आए हैं, उनको अब सम्मानित करने का समय है. पायलट ने प्रदेश कांग्रेस की छोटी टीम पर पूछे गए सवाल पर कहा कि अजय माकन और डोटासरा ने छोटी, लेकिन एक संतुलित टीम बनाई है.





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'राहुल गांधी नेतृत्व करें'
राहुल गांधी को फिर से पार्टी का अध्यक्ष बनाने के सवाल पर पायलट ने कहा कि जल्द कांग्रेस के चुनाव होने वाले हैं. हम सब की यही राय है राहुल गांधी नेतृत्व करें. बीजेपी में अंतर्कलह पर पायलट ने कहा कि वह दूसरी पार्टी के विषय पर ज्यादा नहीं बोलेंगे, लेकिन जनता सब देख रही है.

राजनीतिक नियुक्तियों पर टिकी हैं नजरें
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष हुये सियासी घमासान के बाद कांग्रेस साफ तौर पर सीएम अशोक गहलोत और पायलट गुट में बंट गई थी. इस सियासी घमासान के करीब 9 माह बाद बनी प्रदेश कार्यकारिणी में पायलट अपने समर्थकों को अच्छे पद दिलवाने में सफल रहे हैं. वहीं, अब राजनीतिक नियुक्तियों पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं.

संतुलन का किया जा रहा है प्रयास
राजनीतिक नियुक्तियों में गहलोत और पायलट गुट में से किसको ज्यादा तवज्जो मिलेगी यह देखने वाली बात होगी. माना जा रहा है कि जिस तरह से प्रदेश संगठन में दोनों गुटों का संतुलन बिठाया गया है, उसी तरह से राजनीतिक नियुक्तियों में भी सामजंस्य बिठाने की कवायद में ही इसमें देरी हो रही है.
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