Sachin Pilot vs Ashok Gehlot: मंत्रिमंडल विस्तार से नाराजगी दूर करेंगे गहलोत, पायलट ने महासचिव पद ठुकराया

सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद से उपजे संकट का समाधान मंत्रिमंडल विस्तार से हो सकता है.

Rajasthan Political Crisis: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने समाधान ढूंढ लिया है. ढाई साल में पहली बार मंत्रिमंडल विस्तार के मिले संकेत. अभी तक प्रियंका गांधी से नहीं हो सकी है सचिन पायलट की मुलाकात.

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    जयपुर. गहलोत-पायलट के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर मचे घमासान के बीच नेताओं की दिल्ली की दौड़ जारी है. पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, राजस्व मंत्री हरीश चौधरी राजधानी में हैं. ताकि हाईकमान के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें. प्रियंका गांधी के शिमला में होने के कारण शनिवार को पायलट की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी. इस बीच सुलह फार्मूले में पायलट को पार्टी महासचिव बनने का आफर हाईकमान ने दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया है.

    कांग्रेस में जयपुर से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई है. गहलोत और पायलट गुट के विधायकों की अपने नेताओं के साथ मुलाकातें तेज हो गई हैं. इस बीच नाराजगी को दूर करने के लिए ढाई साल में पहली बार इसी माह में मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत मिले हैं. अभी सीएम गहलोत के अलावा दस केबिनेट और 10 राज्य मंत्री हैं. गहलोत कुल 30 मंत्री बना सकते हैं. इस तरह अभी 9 मंत्रियों का पद खाली है. मंत्रिमंडल विस्तार की लड़ाई इन्हीं नौ पदों को लेकर है. गहलोत के लिए इनमें नाराज विधायकों को एडजस्ट करना और ढाई से इंतजार कर रहे अपने खेमे के और निर्दलीय विधायकों को नाराज न करना बड़ी चुनौती है.

    पायलट की अभी प्रियंका से मुलाकात नहीं हो पाई
    दूसरी ओर, दिल्ली पहुंचे सचिन पायलट की प्रियंका से अभी मुलाकात नहीं हो पाई. पिछली साल सियासी संकट में प्रियंका ने ही सचिन से बात कर सत्ता संघर्ष पर विराम लगाया था. एक बार फिर पायलट और पार्टी की नजर उन्हीं की ओर है. सूत्रों का कहना है कि पायलट को पार्टी ने महासचिव पद का ऑफर किया था. लेकिन वे तब तक कोई पद नहीं लेंगे, जब तक कि उनके विधायकों और समर्थकों को सरकार और पार्टी में शामिल नहीं कर लिया जाता. वैसे भी पायलट की पहली प्राथमिकता राजस्थान है. वे प्रदेश से बाहर नहीं जाना चाहते.

    अपना पक्ष रखने के लिए राजस्व मंत्री का दिल्ली में डेरा
    उधर, राजस्व मंत्री हरीश चौधरी का दिल्ली दौरा भी पार्टी के सियासी हलकों में चर्चा में है. इस्तीफा दे चुके हेमाराम चौधरी और बाड़मेर के विधायकों ने उनपर अनदेखी के आरोप लगाए थे. उधर पंजाब के विधायकों को उनके मुख्यमंत्री के खिलाफ भड़काने का आरोप भी राजस्व मंत्री पर लगा था. ऐसे में उन्हें डर सता रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में यदि हेमाराम चौधरी को केबिनेट मंत्री बनाया गया तो उनका क्या होगा ? सूत्र बताते हैं कि वह आलाकमान को अपनी स्थिति स्पष्ट करने दिल्ली गए हैं.

    दस माह से कोई काम नहीं हो रहा : शेखावत
    पायलट समर्थक विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने एक दिन पहले विधायकों के फोन टेप कराने के आरोप का बम फोड़ा है. पायलट गुट में आरोपों के मामले में इस समय सबसे मुखर विधायक सोलंकी ही बने हुए है. अब पायलट गुट के विधायक दीपेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि प्रदेश में दस महीने पहले से जो हालात थे, वही अब भी हैं. न पहले विकास हो रहा था और न ही अब जनता और विधायकों के काम हो रहे हैं. दस माह पहले हमारी पीड़ा पर हाईकमान ने सुलह कमेटी बनाई थी, लेकिन अभी तक उस पर भी कोई काम नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि जिन लोगों की मदद से कांग्रेस की सरकार बनी है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए.

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