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सांभर झील के पानी की समय-समय पर होगी जांच

भाषा
Updated: November 28, 2019, 1:54 PM IST
सांभर झील के पानी की समय-समय पर होगी जांच
सांभर झील के पानी की समय-समय पर जांच होगी और इसका समुचित डेटा रखा जाएगा.

बड़ी संख्या में प्रवासी और अन्य पक्षियों की मौत के मद्देनजर अब सांभर झील (sambhar lake) के पानी (water quality testing) की समय-समय पर जांच होगी और इसका समुचित डेटा रखा जाएगा.

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जयपुर. सांभर झील (sambhar lake) के आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में प्रवासी व अन्य पक्षियों की मौत के मद्देनजर अब झील के पानी (water quality testing) की समय-समय पर जांच होगी और इसका समुचित डेटा रखा जाएगा. जयपुर जिला कलेक्टर (jaipur collector) जगरूप सिंह यादव ने बुधवार को यहां जिला पर्यावरण समिति की बैठक में यह निर्देश दिए. यादव ने कहा कि 'वर्तमान त्रासदी में यहां एल्गी टॉक्सेनिटी नहीं थी लेकिन इसकी आशंका को देखते हुए अब समय-समय पर झील के पानी की बायलॅाजिकल एवं कैमिकल जांच कर इसका डेटा भी रिकॉर्ड एवं शेयर किया जाना चाहिए.'

उल्लेखनीय है कि सांभर झील इलाके में हाल ही में हजारों की संख्या में प्रवासी व अन्य पक्षियों की मौत हुई है. बैठक में क्षेत्रिय वन अधिकारी क्षेत्रिय वन अधिकारी (डीएफओ) कविता सिंह ने बताया कि मंगलवार तक झील के जयपुर क्षेत्र में 9358 मृत पक्षियों के अवशेष हटाए जा चुके हैं, 632 पक्षियों को बचाया गया है एवं 143 को रिंग पहनाई गई है. यादव ने कहा कि सांभर झील में तत्परता से समय पर बचाव कार्य प्रारम्भ किए गए, जिससे लगातार पक्षियों की मौतों में कमी आई है.

यादव ने कहा है कि सांभर झील में तत्परता से समय पर बचाव कार्य प्रारम्भ किए गए, जिससे लगातार पक्षियों की मौतों में कमी आई है लेकिन स्थिति नियंत्रण में होने के बावजूद निरापद नहीं कही जा सकती जब तक कि एक भी संक्रमित कारकस झील क्षेत्र में रहे. उन्होंने सांभर सॉल्ट्स लिमिटेड के महाप्रबन्धक को निर्देश दिए कि जपोक डेम में कहीं-कहीं, गहराई वाले पानी में और पूरे झील इलाके में अभी भी मृत पक्षियों के शव हो सकते हैं और एक भी संक्रमित मृत पक्षी का शव चेन रिएक्शन से कई पक्षियों की जान ले सकता है, इसलिए हर हाल में कारकस झील क्षेत्र से दूर किया जाना चाहिए. उन्होंने 40 से 50 अतिरिक्त श्रमिकों की व्यवस्था कर कारकस निकलना सुनिश्चित करने एवं यह अभियान एक माह तक और जारी रखने के निर्देश दिए हैं ताकि लाखों की संख्या में झील में पहुंच रहे स्वस्थ पक्षियों को बोटूलिज्म प्रभावित मृत पक्षियों को खाने से बचाया जा सके. (भाषा इनपुट के साथ)

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First published: November 28, 2019, 1:54 PM IST
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