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पक्षियों की मौत: आज से अकेले सांभर साल्ट्स को रोजाना 25.58 लाख का घाटा, पढ़ें- नमक पर असर की कहानी

Arbaaz Ahmed | News18 Rajasthan
Updated: November 22, 2019, 6:58 PM IST
पक्षियों की मौत: आज से अकेले सांभर साल्ट्स को रोजाना 25.58 लाख का घाटा, पढ़ें- नमक पर असर की कहानी
नमक सप्लाई पर रोक लगाई गई है.

एवियन बोटुलिज़्म (Avian Botulism) की पुष्टी के बाद में ये फैसला लिया गया है, क्योंकि झील के पानी से ही नमक बनाया जा रहा है और उसी झील में ये बैक्टीरिया मौजूद है, ऐसे में इंसानों का इसका कोई नुकसान न हो इसलिए नमक सप्लाई पर रोक लगाई गई है.

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जयपुर. सांभर झील (Sambhar Lake) में पक्षियों की मौत के बाद सांभर साल्ट्स ने मौके पर नमक की सप्लाई रोकने का आदेश जारी कर दिया है. एवियन बोटुलिज़्म (Avian Botulism) की पुष्टी के बाद में ये फैसला लिया गया है, क्योंकि झील के पानी से ही नमक बनाया जा रहा है और उसी झील में ये बैक्टीरिया मौजूद है. ऐसे में इंसानों को इसका कोई नुकसान न हो इसलिए नमक सप्लाई पर रोक लगाई गई है. हालांकि सांभर साल्ट्स से देश के बड़े हिस्से में नमक की सप्लाई की जाती है. देश के नमक के दूसरे सोर्स सीधे समुंद्र से ताल्लुक रखते हैं जबकि बिना समुद्र का सबसे बड़ा नमक उत्पादन का सोर्स पूरे देश में सांभर झील ही है.

अकेले सांभर साल्ट्स (Sambhar Salts Limited) के मार्फत सांभर झील में सालाना लाखों टन नमक निकाला जाता है. यहां रोजाना 3500 टन कच्चे नमक का उत्पादन किया जाता है. जबकि रिफाइंड नमक की बात की जाए तो 2500 टन रिफाइंड नमक रोजाना सप्लाई किया जाता है, ये आंकड़ा केवल सांभर साल्ट्स का है, जिसके आधार नमक सप्लाई पर रोक के चलते अब करीब 25.58 लाख का घाटा रोजाना लगना तय है.

इस मामले में डिप्टी साल्ट कमिश्नर मोहिता ने नमक सप्लाई रोकने के आदेश जारी किए हैं. एक इंस्पेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद ये फैसला लिया गया है, हालांकि अभी ये तय नहीं है कि ये सप्लाई कितने दिन रुकी रहेगी.


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करीब 1000 नमक उत्पादक इकाईयों से नमक सप्लाई पर रोक लगाई गई है.


इंसानों तक पहुंचेंगा कीटाणु?

सांभर झील में जिस बैक्टीरिया के चलते पक्षियों की मौत हो रही है उसका इंसान पर क्या असर होगा? इसकी चिंता की जा रही है लेकिन जानकारी के अनुसार, नमक रिफाइनरी से शुद्ध किया जाता है, जहां पर 350 डिग्री सेल्सियस पर नमक को गर्म किया जाता है. इस तापमान पर किसी बैक्टीरिया या वायरस के जीवित रहने की संभावनाए नहीं रहती हैं. नमक की सप्लाई को रोकने के पीछे झील में मौजूद पानी को माना जा रहा है. ताकि झील में मौजूद इस बैक्टीयरिया को खत्म किया जा सके और उसका और नुकसान अब पक्षियों को न हो.

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सांभर झील में पक्षी त्रासदी का कारण एवियन बोटलिज्म बताया गया है. (Getty Images)

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बेरली की रिपोर्ट में पता चला क्यों मर रहे हैं पक्षी

सांभर झील में पक्षी त्रासदी का कारण बर्ड फ्लू नहीं ब्लकि एवियन बोटुलिज़्म (Avian Botulism) है. बरेली के IVRI (भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान Indian Veterinary Research Institute) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ. इससे पहले बीकानेर के अपेक्स सेंटर (Apex Centre for Animal Disease) के प्रो. एके कटारिया ले भी इसकी आशंका जताई थी.

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First published: November 22, 2019, 5:57 PM IST
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