लाइव टीवी

समता आंदोलन: संविधान संशोधन बिल के लिए पार्टी व्हिप रोकने की मांग, गिनाए ये तर्क

News18 Rajasthan
Updated: December 7, 2019, 5:49 PM IST
समता आंदोलन: संविधान संशोधन बिल के लिए पार्टी व्हिप रोकने की मांग, गिनाए ये तर्क
समता आंदोलन का कहना है कि यह करोड़ों मतदाताओं के साथ धोखा है. यह संसद की गरिमा को गिराने वाला है.

समता आंदोलन (Samta Andolan) ने संविधान के अनुच्छेद 334 में आरक्षण (Reservation) की अवधि को पुन: 10 वर्ष तक बढ़ाने के लिए लाए जाने वाले संविधान संशोधन बिल (Constitutional amendment bill) का विरोध करते हुए इसके लिए पार्टी व्हिप रोकने (Stop party whip) की मांग की है.

  • Share this:
जयपुर. समता आंदोलन (Samta Andolan) ने संविधान के अनुच्छेद 334 में आरक्षण (Reservation) की अवधि को पुन: 10 वर्ष तक बढ़ाने के लिए लाए जाने वाले संविधान संशोधन बिल (Constitutional amendment bill) का विरोध करते हुए इसके लिए पार्टी व्हिप रोकने (Stop party whip) की मांग की है. इसके साथ ही इसे सर्वोच्च न्यायलय (Supreme Court) की सहमति के लिए अनुच्छेद-143 के अधीन भेजने की अपनी मांग को भी दोहराया है. समता आंदोलन ने इस बिल को पूरी तरह से असैंवधानिक (Unconstitutional) बताते हुए कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र का मजाक है.

राज्यसभा और लोकसभा अध्यक्ष को भेजा ज्ञापन
समता ने इसके लिए राज्यसभा अध्यक्ष एम. वेंकैयानायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को ज्ञापन भेजा है. इनके अलावा राज्यसभा और लोकसभा के सभी सांसदों को भी इसकी प्रति भेजी गई है. समता ने इसके लिए कई तथ्यों और तर्कों का हवाला दिया है. समता आंदोलन का कहना है कि यह करोड़ों मतदाताओं के साथ धोखा है. यह भारतीय संसद की गरिमा को गिराने वाला है.

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं

समता आंदोलन के अध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा ने इसके तर्क गिनाते हुए बताया कि पूर्व में वर्ष 2000 और 2009 में किए गए इसी प्रकार के संशोधनों को निरस्त करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं. इनमें नोटिस जारी किए हुए हैं. वहीं वर्ष 2003 में इस मामले में पांच न्यायधीशों की संविधान पीठ गठित करने के आदेश भी हो चुके हैं.

पार्टी व्हिप जारी करना गैर विधिक
पाराशर ने दावा किया कि बहुत से सांसद इस जातिगत आरक्षण को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं. फिर भी राजनीतिक दल जातिवादी राजनीति के दबाव में आकर गैर विधिक रूप से पार्टी व्हिप जारी करके सांसदों को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से अपना मत रखने के अधिकार से वंचित कर देते हैं. राजनीतिक दलों का यह कृत्य करोड़ों नागरिकों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाने वाला है.किहोटो होलोहॉन के प्रकरण में दिए गए हैं निर्देश
पाराशर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा किहोटो होलोहॉन के प्रकरण में इस बात के स्पष्ट निर्देश दिए हुए हैं कि किसी भी राजनीतिक दल की ओर से संविधान संशोधनों को पारित करवाने के लिए तब तक कोई पार्टी व्हिप जारी नहीं किया जा सकता जब तक कि संविधान संशोधन के विषय को प्रमुख नीतिगत मुद्दा बनाकर जनादेश नहीं लिया गया हो.

घोषणा-पत्र में संविधान संशोधन लाने का मुद्दा समाहित नहीं किया गया है
पाराशर ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय अथवा क्षेत्रीय दल के चुनाव घोषणा-पत्र में अनुच्छेद-334 की अवधि बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन लाने का मुद्दा समाहित नहीं किया गया है. लिहाजा कोई भी राजनीतिक दल संविधान संशोधन बिल पारित करवाने के लिए व्हिप जारी नहीं कर सकता. अगर कोई राजनीतिक दल ऐसा करता है तो वह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अपमान है.

जोधपुर: राष्ट्रपति कोविंद ने किया हाईकोर्ट के नए भव्य भवन का उद्घाटन

शहादत को सलाम: 21 वर्षीय शहीद कमल को इकलौती छोटी बहन ने दी मुखाग्नि

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जयपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 7, 2019, 5:47 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर