स्कूल फीस मामला: CJR के नॉन सीटिंग होने से आज टली सुनवाई, अभिभावकों के सामने असमंजस की स्थिति

अब सीजे इंद्रजीत माहंती की खण्डपीठ राज्य सरकार और अधिवक्ता सुनील समदरिया (Sunil Samadaria) की अपील पर कल सुनवाई करेगी.
अब सीजे इंद्रजीत माहंती की खण्डपीठ राज्य सरकार और अधिवक्ता सुनील समदरिया (Sunil Samadaria) की अपील पर कल सुनवाई करेगी.

आज स्कूल फीस (School Fees) की पहली किस्त जमा कराने की अंतिम तिथि थी. अब मामले को लेकर कल सुनवाई होगी.

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जयपुर. निजी स्कूलों में फीस (School Fees) वसूली के मामलें में राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) में बुधवार को सुनवाई टल गई. मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहंती (Judge Indrajit Mahanti) के नॉन सीटिंग होने के चलते मामले को कल तक के लिए टाल दिया गया है. इसकी सूचना सभी पक्षों को कोर्ट स्टाफ द्वारा फोन पर दे दी गई है. लेकिन मामला टलने से अभिभावकों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है. दरअसल, सिंगल जज के फैसले के अनुसार आज फीस की पहली किस्त जमा कराने की अंतिम तारीख है. फीस जमा नहीं होने पर स्कूल प्रबंधन स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लासेज से वंचित कर सकते हैं. अब सीजे इंद्रजीत माहंती की खण्डपीठ राज्य सरकार और अधिवक्ता सुनील समदरिया (Sunil Samadaria) की अपील पर कल सुनवाई करेगी.



अभिभावकों के सामने असमंजस की स्थिति


मामला टलने से प्रदेश के लाखों अभिभावकों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है. संयुक्त अभिभावक समिति के प्रवक्ता अभिषेक जैन ने बताया कि मामला टलने की सूचना मिलने के साथ ही अभिभावकों के फोन आने शुरू हो गए. प्रत्येक अभिभावक यहीं जानना चाहता हैं कि अब क्या किया जाए, क्योंकि आज की सुनवाई से हमें उम्मीद थी कि डिवीजन बेंच से हमें राहत जरूर मिलेगी. लेकिन सुनवाई टलने से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, क्योंकि सिंगल जज के 7 सितम्बर के फैसले के अनुसार ट्यूशन फीस जमा कराने की पहली किस्त की अंतिम तारीख आज है. वहीं, फीस जमा नहीं कराने पर फैसले के अनुसार ही स्कूल प्रबंधन स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लासेज से भी वंचित कर सकता है. हमनें सभी अभिभावकों से यहीं कहा है कि वे संयम बनाए रखें. वहीं, स्कूलों के किसी भी तरह के दवाब को अपने आप पर हावी नहीं होने दें. अंत में जीत संघर्ष की ही होगी.

एकलपीठ के फैसले को दी गई है चुनौती
दोनों अपील में एकलपीठ के 7 सितम्बर के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें एकलपीठ ने निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का 70 प्रतिशत चार्ज करने की छूट दी थी. वहीं अभिभावकों को तीन किस्तों में यह पैसा जमा कराना था. राज्य सरकार की ओर से अपील पेश करने वाले अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने बताया कि राज्य सरकार ने  9 अप्रेल और 7 जुलाई के आदेश से फीस को केवल स्थगित किया था. किसी भी निजी स्कूल ने सरकार के सामने कोई प्रतिवेदन पेश नहीं किया. न ही स्कूल की ओर से अपने खर्चों का कोई ब्यौरा दिया गया.

ऑनलाइन क्लासेज की बात निजी स्कूल कर रहे हैं
हमारा तर्क है कि पहले स्कूल संचालक यह बताए कि लॉकडाउन में उनका कितना खर्चा हुआ है. जहां तक ऑनलाइन क्लासेज की बात निजी स्कूल कर रहे हैं, तो अधिकांश स्कूलों में इसे लेकर पहले से ही इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार था. इस पर भी ज्यादा खर्च हुआ हो ऐसा नहीं लगता. ऐसे में 70 प्रतिशत फीस का भार अभिभावकों पर डालना गलत है. इसी को आधार बनाते हुए हमने हाईकोर्ट में अपील पेश की है. वहीं, अधिवक्ता सुनील समदरिया ने अपनी अपील में कहा है कि सिंगल जज अपने अंतरिम आदेश से पूरी रिट को डिसाइड नहीं कर सकते है. वहीं, पूरे मामलें में स्कूलों की ओर से किसी भी अभिभावक को पार्टी नहीं बनाया गया था.

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