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Rajasthan: कृषि मंडियों में मंदी की मार ! 30-40 फीसदी तक कम बिकने आ रही है उपज, जानिये क्या है वजह

राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता के अनुसार किसान असमंजस में हैं कि वो अपनी उपज मंडियों के अन्दर बेचें या बाहर.(सांकेतिक तस्वीर)
राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता के अनुसार किसान असमंजस में हैं कि वो अपनी उपज मंडियों के अन्दर बेचें या बाहर.(सांकेतिक तस्वीर)

करीब एक महीने से चल रहे किसान आंदोलन (Kisan Andolan) का असर अब मंडियों पर साफ दिखाई देने लग गया है. इस बार गत वर्ष के मुकाबले मंडियों में 30-40 फीसदी तक कम उपज बिकने के लिये आ रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2020, 1:21 PM IST
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जयपुर. किसान आन्दोलन (Kisan Andolan) और नए कृषि कानूनों का असर प्रदेश की मंडियों पर दिखने लगा है. मंडियों (Mandis) में इस बार पिछले साल के मुकाबले कम उपज बिकने लिए आ रही है. मंडी व्यापारी आशंकित हैं कि इसी तरह चला तो मंडियां खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएंगी.

नए कृषि कानूनों से मंडी व्यापारियों को मंडियां खत्म होने की आशंकाएं सता रहीं थी. कृषि कानूनों से मंडियां समाप्त होगी या नहीं यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन किसान आंदोलन के कारण जरुर मंडियों पर संकट आने लग गया है. पिछले साल की मुकाबले इस बार मंडियों में कम उपज बिकने के लिए आ रही है. मंडी व्यापारियों के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस बार मंडी में उपज की आवक 30 से 40 फीसदी तक कम है. एक तो किसान आन्दोलन में व्यस्त है और दूसरा खेतों में रबी की फसल की व्यस्तता भी चल रही है. लिहाजा किसान मंडियों में उपज बेचने नहीं आ रहा है. वहीं कृषि कानूनों का असर यह है कि अब व्यापारी किसानों से सीधे उनके खेत तक पहुंचकर उपज खरीद करने लगे हैं. लिहाजा किसान मंडियों का रुख नहीं कर रहे हैं.

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असमंजस में हैं किसान


राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता के अनुसार किसान असमंजस में हैं कि वो अपनी उपज मंडियों के अन्दर बेचें या बाहर. यही वजह है कि कई किसानों ने अपनी उपज को रोककर भी रखा है. आंकड़ों की अगर बात करें तो प्रदेश में इस बार करीब 40 लाख टन बाजरे की पैदावार हुई है. इसमें से अनुमान के मुताबिक करीब 10 लाख टन बाजरा किसान अपने काम के लिए रखेगा. लेकिन शेष 30 लाख टन में से भी प्रदेश की मंडियों में करीब 10-12 लाख टन बाजरा ही आया है. वहीं मूंग की पैदावार करीब 13-14 लाख टन हुई है. लेकिन समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव के बावजूद मंडियों में 6-7 लाख टन ही मूंग आया है. उड़द की पैदावार 2 लाख टन हुई लेकिन मंडियों में 50 हजार टन ही आया है. मंडियों में अमूमन मोठ की आवक करीब 3 लाख टन होती है. लेकिन इस बार करीब 1.20 लाख टन ही मोठ मंडियों में आया है.

सभी जिंसों की आवक कम हुई है
मंडी व्यापारियों के मुताबिक इस बार पिछले साल के मुकाबले मंडियों में सभी जिंसों की आवक कम हुई है. बाजरा कुल उत्पादन का करीब 22 प्रतिशत, मक्का कुल उत्पादन की करीब 16-17 प्रतिशत और मूंग कुल उत्पादन का करीब 20-25 प्रतिशत ही मंडियों में आया है. मंडी व्यापारियों को आशंका है कि एक बार किसान का मन यदि अस्थिर हो गया तो फिर वह मंडियों में अपना माल लाना बंद कर देगा और मंडियां बर्बाद हो जाएंगी.
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