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Tokyo Olympics: जयपुर के लाल अर्जुन से देश को नौकायन में पदक की उम्मीद

जयपुर के लाल अर्जुन से नौकायन में है पदक की उम्मीद

जयपुर के लाल अर्जुन से नौकायन में है पदक की उम्मीद

Tokyo Olympics: नौकायन में जयपुर जिले के छोटे से गांव नया बास के अर्जुन ओलंपिक में पहुंचे हैं. उनके गांव में भले ही कोई झील, बड़े तालाब नहीं हों, लेकिन अर्जुन कुशलता से अपनी पतवार से लहरों का रुख मोड़ना बखूबी जानते हैं.

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जयपुर. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympic) में देश को अर्जुनलाल से सोने का मेडल (Medal) लाने की उम्मीद है. जयपुर जिले के नया बास गांव के अर्जुन टोक्यो में नौकायन (Sailing) में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. टोक्यो के सीफोरेस्ट वॉटर में उनकी रोइंग प्रतियोगिता 24 जुलाई को होगी. उनके गांव से लेकर प्रदेश तक सभी को उम्मीद है कि वे देश-प्रदेश का नाम रोशन करेंगे. उनके गांव में भले ही कोई झील, बड़े तालाब नहीं हों, लेकिन अर्जुन कुशलता से अपनी पतवार से लहरों का रुख मोड़ना जानते हैं.

अर्जुनलाल का खेलों में सफर आर्मी में जाने के बाद शुरू हुआ था. चौबीस साल के अर्जुन पहले निशानेबाजी में जाना चाहते थे, लेकिन इरादा बदला और नौकायन के लिए पहुंच गए. कोच बंजरंगलाल ताखर के निर्देशन में नौकायन में अभ्यास किया. अर्जुन की पहली बड़ी उपलब्धि रही 2019 में एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल करना.

पिता भावुक, मां को योग्यता पर विश्वास
अर्जुनलाल ने एशिया-ओसेनिया ओलंपिक कांटिनेंटल क्वालीफाइंग इवेंट में रजत पदक हासिल कर टोक्यो का टिकट पाया . जब टोक्यो ओलंपिक में वे क्वालिफाई कर रहे थे तब नया बास गांव में उनके किसान पिता अपने बेटे की सफलता पर भावुक हो रहे थे. आज भी अपने बेटे की मेहनत को लेकर रामस्वरूप जाट भावुक हो उठते हैं. अर्जुन की माता को विश्ववास है कि बेटे की योग्यता देश को जरूर मेडल दिलाएगी.

अर्जुन-अरविंद की जोड़ी से पदक की उम्मीद
हल्के डबल्स स्कल्स श्रेणी में उनके साथ यूपी के अरविंद हैं. दोनों की शारीरिक बनावट एक समान होने और वजन एक समान होने का भी उन्हें फायदा मिलेगा. इस मुश्किल खेल में ओलंपिक स्तर पर राजस्थान से अभी कोई भी मेडल नहीं जीत पाया है. इसलिए यह इतिहास बनाने का मौका है.

कड़ी चुनौती
परिवारजनों के साथ ही उनके कोच बजरंग लाल जाट भी आशा कर रहे हैं कि अर्जुन अपनी योग्यता से इस मुश्किल प्रतियोगिता को अपने नाम कर सकते हैं. ओलंपिक में प्रदेश के खिलाड़ियों ने क्वालिफाई जरूर किया है. लेकिन राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के अलावा बाकी को सफलता नहीं मिल सकी है. दरअसल, यह खेलों का ऐसा महाकुंभ है जहां दुनियाभर से खिलाड़ी शामिल होते हैं और चुनौतियां बेहद कड़ी होती हैं.

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