अब बस्ते के बोझ तले नहीं दबेगा बचपन, राज्य सरकार कल से करेगी नई शुरुआत

अब नौनिहालों को भारी बस्ते का बोझ नहीं झेलना होगा. राज्य सरकार (State government) बच्चों को बस्ते के बोझ से बचाने की दिशा में कड़े कदम (Strict steps) उठाने जा रही है. इसकी शुरूआत बुधवार से पायलट प्रोजेक्ट (Pilot project) के तौर पर प्रदेशभर (Statewide) के चयनित विद्यालयों में होगी.

News18 Rajasthan
Updated: September 3, 2019, 7:57 PM IST
अब बस्ते के बोझ तले नहीं दबेगा बचपन, राज्य सरकार कल से करेगी नई शुरुआत
बच्चों को भारी भरकम बस्तों के बोझ से निजात दिलाने के लिए अब सरकार बड़ा एक्शन लेने जा रही है. प्रदेश में इस एक्शन को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाना तय किया गया है.
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Updated: September 3, 2019, 7:57 PM IST
जयपुर. अब नौनिहालों को भारी बस्ते का बोझ नहीं झेलना होगा. राज्य सरकार (State government) बच्चों को बस्ते के बोझ से बचाने की दिशा में कड़े कदम (Strict steps) उठाने जा रही है. इसकी शुरूआत बुधवार से पायलट प्रोजेक्ट (Pilot project) के तौर पर प्रदेशभर (Statewide) के चयनित विद्यालयों में होगी. राज्य के सभी 33 जिलों में एक-एक विद्यालय को इस प्रोजेक्ट के लिए चयनित (Selected) किया गया है.

खास सिलेबस डिजाइन किया गया है
बच्चों को भारी भरकम बस्तों के बोझ से निजात दिलाने के लिए अब सरकार बड़ा एक्शन लेने जा रही है. प्रदेश में इस एक्शन को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाना तय किया गया है. इस प्रोजेक्ट के जरिए कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के बस्तों के बोझ को कम करने के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक स्कूल का चयन किया गया है. इन स्कूलों में बाकायदा एक खास सिलेबस डिजाइन किया गया है. यह सिलेबस कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए होगा. इसमें कम से कम किताबें स्कूल में ले जाने की जरूरत होगी. जयपुर जिले में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, वाटिका में खुद शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा इसकी शुरूआत करेंगे.

सभी स्कूली बच्चों की कमोबेश एक जैसी स्थिति है

उल्लेखनीय है आधुनिक शिक्षा के नाम पर बच्चे किताबों का भारी-भरकम बोझ उठाने के लिए मजबूर हैं. पहली कक्षा के बच्चे के स्कूली बैग में  ही अमूमन 10 से 15 पुस्तकें होती हैं. इसके साथ ही अन्य सामान भी होता है. मासूम नौनिहाल इन बैगों को जब कंधों पर उठाते हैं तो कइयों की तो कमर तक झुक जाती है. यह पीड़ा किसी एक स्कूल के बच्चों की नहीं होकर कमोबेश सभी की है. इसमें अभिभावक चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते हैं. ऐसे में अब राज्य सरकार ने इसका बीड़ा उठाया है और इसकी एक शुरुआत करने की ठानी है.

(रिपोर्ट: बाबूलाल धायल एवं महेश दाधीच)

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First published: September 3, 2019, 7:47 PM IST
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