दलित वोटों के लिए खींचतान, बाहरी नेता भी मौके की तलाश में

दो अप्रैल के भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद देश प्रदेश की राजनीति दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है. लेकिन कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों में से कोई भी एससी एसटी को नाराज नहीं करना चाहता.

Babulal Dhayal | News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 5:59 PM IST
दलित वोटों के लिए खींचतान, बाहरी नेता भी मौके की तलाश में
प्रतीकात्मक चित्र।
Babulal Dhayal | News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 5:59 PM IST
दो अप्रैल के भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद देश प्रदेश की राजनीति दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है. लेकिन कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों में से कोई भी एससी एसटी को नाराज नहीं करना चाहता. कांग्रेस दलित आंदोलन को हवा देकर सत्ता में लौटने के ख्वाब संजो रही है तो भाजपा एससी एसटी एक्ट के पुराने प्रावधानों को बहाल कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुरजोर तरीके से पैरवी में जुटी है. इस बीच प्रदेश में गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी की बढ़ती सक्रियता ने भाजपा में बेचैनी बढ़ा दी है. मेवाणी भाजपा को आड़े हाथ लेकर दलित मतदाताओं के बीच खुद की लोकप्रियता में इजाफा करने में जुटे हैं.

वसुंधरा सरकार जिग्नेश मेवाणी के मंसूबों पर पानी फेरने में जुटी है. उनके दौरों को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है. लाख कोशिशों के बावजूद मेवाणी दो दिन पहले मेड़ता नहीं जा पाए. वे मेड़ता में अम्बेडकर जयंती को लेकर हुए समारोह में जाने के लिए जयपुर तक तो आ गए, लेकिन मेड़ता नहीं जा पाए. उन्हें एयरपोर्ट पर ही पुलिस ने नागौर प्रशासन के कानून व्यवस्था से जुड़े नोटिस का हवाला देते हुए रोक लिया. जिग्नेश को मन मसोसकर उल्टे पांव गुजरात लौटना पड़ा.

मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने उन पर जमकर तंज कसे. प्रदेश की सामाजिक समरसता को खराब करने के आरोप लगाते हुए राठौड़ ने कहा कि वो जिस भी प्रदेश में गए वहां कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी. हम किसी भी सूरत में प्रदेश की गंगा जमु़नी तहजीब पर आंच नहीं आने देंगे. वहीं जानकार मेवाणी के आगे कांग्रेस के नतमस्तक होने को कांग्रेस की सबसे बड़ी विफलता मान रहे हैं.

प्रदेश में करीब अठारह फीसदी दलित आबादी है, वहीं चौदह फीसदी आदिवासी. बीजेपी दोनों ही तबकों से इस साल होने जा रहे चुनाव में फिर से समर्थन की उम्मीद कर रही है. वहीं कांग्रेस अपने परंपरागत वोट को करीब लाने की जद्दोजहद में जुटी है. इसलिए एससी एसटी एक्ट के बहाने राजनीति काफी गरमा रही है. इसमें अपनी रोटी सेंकने के लिए प्रदेश के बाहर के नेता भी खासी सक्रियता दिखा रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में दोनों ही वर्गों का करीब 100 सीटों पर दबदबा है. एससी-एसटी के लिए कुल 59 सीट रिजर्व हैं. इनमें एससी के लिए 34 और एसटी के लिए 25 सीटें रिजर्व हैं. प्रदेश में जिसके साथ एससी-एसटी होती है सूबे में उसकी ही सरकार बनती है.
IBN Khabar, IBN7 और ETV News अब है News18 Hindi. सबसे सटीक और सबसे तेज़ Hindi News अपडेट्स. Rajasthan News in Hindi यहां देखें.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर