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अजब संयोग: लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बाड़मेर का बायतू कनेक्शन

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से बाड़मेर जिले की बायतू विधानसभा क्षेत्र के अजीब संयोग जुड़े हुए हैं. बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से गत दो लोकसभा चुनावों से बायतू से विधानसभा चुनाव हारा हुआ प्रत्याशी ही चुनाव जीत रहा है.

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बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से बाड़मेर जिले की बायतू विधानसभा क्षेत्र के अजीब संयोग जुड़े हुए हैं. बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से गत दो लोकसभा चुनावों से बायतू से विधानसभा चुनाव हारा हुआ प्रत्याशी ही चुनाव जीत रहा है. इस बार मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री बने बाड़मेर सांसद कैलाश चौधरी भी हाल ही में बायतू से विधानसभा चुनाव हारे थे. वहीं बाड़मेर से सांसद का चुनाव हारे हुए दो प्रत्याशी बायतू के विधायक बन चुके हैं. इसके साथ ही एक और संयोग भी जुड़ा हुआ है. बाड़मेर में गत दो बार से लगातार बीजेपी प्रत्याशियों का सामना पिता-पुत्र से हो रहा है. गत बार बीजेपी के सामने पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह प्रतिद्वंदी थे तो इस बार उनके पुत्र पूर्व सांसद एवं विधायक मानवेन्द्र सिंह रहे.

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बायतू से हारकर सोनाराम बाड़मेर के सांसद बने
लोकसभा चुनाव-2014 में बाड़मेर से सांसद बने कर्नल सोनाराम ने 2013 में कांग्रेस के टिकट पर बायतू से विधानसभा का चुनाव लड़ा था. सोनाराम को बीजेपी के कैलाश चौधरी ने हरा दिया था. उसके बाद सोनाराम बीजेपी में शामिल हो गए. यहीं से बाड़मेर की राजनीति में उथलपुथल शुरू हो गई. बीजेपी ने अपने संस्थापक सदस्य रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह की बाड़मेर से टिकट देने की मांग को दरकिनार की सोनाराम को लोकसभा चुनाव में खड़ा कर दिया. इस पर जसवंत सिंह पार्टी से खफा होकर निर्दलीय चुनाव में उतर गए. लेकिन कड़े मुकाबले और मोदी लहर में सोनाराम चुनाव जीत गए तथा जसवंत सिंह हार गए.
कर्नल सोनाराम। फाइल फोटो।




कैलाश चौधरी भी बायतू से हारकर बाड़मेर सांसद जीते
उसके बाद हाल ही में पांच माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बायतू में अपने मौजूदा विधायक कैलाश चौधरी पर फिर दांव खेला. लेकिन इस बार कैलाश चौधरी सत्ता विरोधी लहर की चपेट में आ गए और कांग्रेस के हरीश चौधरी से चुनाव हार गए. कैलाश चौधरी चुनाव हारे ही नहीं, बल्कि तीसरे स्थान पर रहे. वहां दूसरे स्थान पर आरएलटीपी के उम्मेदाराम रहे.

कैलाश चौधरी। फाइल फोटो।


पिता की हार का बदला नहीं ले पाए मानवेन्द्र
दूसरी तरफ पिता के अपमान और हार का बदला लेने के लिए जसवंत सिंह के बेटे मानवेन्द्र सिंह ने विधानसभा चुनाव-2018 से पहले बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में मानवेन्द्र को बाड़मेर से अपना प्रत्याशी बना दिया. इससे बदले सियासी समीकरणों को देखते हुई बीजेपी ने फूंक-फूंककर कदम रखते हुए अपने मौजूदा सांसद कर्नल सोनाराम का टिकट काटकर बायतू से हारे कैलाश चौधरी को थमा दिया. फिर हुए कड़े मुकाबले और मोदी लहर में इस बार कैलाश चौधरी बाजी मार ले गए. उन्होंने मानवेन्द्र सिंह को बड़े अंतर से हरा दिया.

मानवेन्द्र सिंह। फाइल फोटो।


ये बाड़मेर से सांसद का चुनाव हारे, लेकिन बायतू से विधायक जीते
तीसरा संयोग भी बड़ा अजीब है. कर्नल सोनाराम ने वर्ष 2004 में कांग्रेस के टिकट पर बाड़मेर से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन वे मानवेन्द्र सिंह से हार गए. सोनाराम ने बाद में 2008 में बायतू से विधानसभा चुनाव लड़ा और वहां से विधायक जीत गए. उसके बाद लोकसभा चुनाव-2014 में हरीश चौधरी ने बाड़मेर से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गए. इस चुनाव में वे भी तीसरे स्थान पर रहे थे. दूसरे स्थान पर निर्दलीय जसवंत सिंह रहे. लेकिन हरीश चौधरी 2018 में चुनाव लड़ने बायतू पहुंचे और कैलाश चौधरी को हराकर वहां विधायक बन गए.

हरीश चौधरी। फाइल फोटो।


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