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बेल याचिकाएं सूचीबद्ध नहीं करने के राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
Jaipur News in Hindi

भाषा
Updated: April 3, 2020, 10:23 PM IST
बेल याचिकाएं सूचीबद्ध नहीं करने के राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) के एकल न्यायाधीश ने कहा था कि जमानत और सजा निलंबित करने के मामलों को ‘अत्यधिक जरूरी’ नहीं माना जा सकता, जब देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण पूरी तरह लॉकडाउन (Lockdown) है.

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नई दिल्ली-जयपुर. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान ‘अत्यधिक जरूरी मामलों’ की श्रेणी में जमानत और सजा निलंबित करने के आवेदन सूचीबद्ध नहीं करने के राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी. हाई कोर्ट ने कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन के दौरान ‘अत्यधिक जरूरी मामलों’ की श्रेणी में जमानत और सजा निलंबित करने के आवेदन सूचीबद्ध नहीं करने का आदेश दिया था.

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता के पीठ ने इस मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश के 31 मार्च के आदेश पर रोक लगा दी. पीठ ने इसके साथ ही इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस भी जारी किया.

लॉकडाउन के दौरान ये मामले अत्यधिक जरूरी नहीं
अदालत के एकल न्यायाधीश ने इस आदेश में रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि अत्यधिक जरूरी मामलों की श्रेणी में जमानत और सजा निलंबित करने जैसे आवेदन सूचीबद्ध नहीं किए जाएं. अदालत ने कहा था कि जमानत और सजा निलंबित करने के मामलों को ‘अत्यधिक जरूरी’ नहीं माना जा सकता, जब देश में पूरी तरह लॉकडाउन है.



दोषी को रिहा करना जरूरी मामले की श्रेणी में नहीं आता


अदालत ने कहा था कि इस तरह के मामलों को देश में लॉकडाउन वापस लिए जाने के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा. अदालत ने कहा था कि लॉकडाउन के आदेश की अनदेखी करना और अनेक जिंदगियों को जोखिम में डालने की कीमत पर दोषी को जमानत पर रिहा करना अत्यधिक जरूरी मामले की श्रेणी में नहीं आता है.

छुट्टियों के दौरान भी हाई कोर्ट नहीं करता ये काम
न्यायाधीश ने इस तथ्य का भी जिक्र किया था कि कुछ दिन से लेकर कुछ सप्ताह के होली, दशहरा, दीवाली और शीतकालीन अवकाश के दौरान भी हाई कोर्ट जमानत याचिकाओं और सजा निलंबित करने जैसे आवेदनों पर विचार नहीं करता है. अदालत ने जेल, महानिदेशक की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया था जिसमें कहा गया था कि जेलों में क्षमता से ज्यादा भीड़ नहीं है और जेल में कैदियों की नियमित मेडिकल जांच की जा रही है.

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First published: April 3, 2020, 10:05 PM IST
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