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Jaipur News: आकाशीय बिजली दुखान्तिका से लें सबक, जानिये क्यों जरुरी है तड़ित चालक, बता रहे हैं विशेषज्ञ

नाहरगढ़ किले और हवामहल सहित राजधानी में ऊंचाई पर मौजूद मॉन्यूमेंट्स पर लाइटनिंग रॉड (तड़ित चालक) नहीं लगे हैं.

नाहरगढ़ किले और हवामहल सहित राजधानी में ऊंचाई पर मौजूद मॉन्यूमेंट्स पर लाइटनिंग रॉड (तड़ित चालक) नहीं लगे हैं.

Jaipur celestial lightning tragedy: राजधानी जयपुर में आमेर में दो दिन पहले आकाशीय बिजली गिरने से एक साथ 11 लोगों की मौत हो गई थी. राजस्थान में इस तरह का यह पहला बड़ा हादसा था. ऐसे हादसों से बचने के लिये पढ़िये ये रिपोर्ट.

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जयपुर. राजधानी जयपुर के पास स्थित आमेर (Amer) में लंबे अरसे बाद एक ऐसा हादसा हुआ जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. आसमानी बिजली का कहर (celestial lightning tragedy) राजस्थान में आम बात नहीं है. यही वजह है कि इस कहर को राजस्थान में वक्त रहते गंभीरता से नहीं लिया गया. अगर लिया गया होता तो आमेर महल के पास सबसे ऊंचे वॉच टावर पर 11 लोगों की जान (Death) नहीं जाती. बिल्डिंग बायलॉज में तो ये अनिवार्य किया हुआ है कि आसमानी बिजली से सुरक्षा के लिए थंडर स्टिक यानी तड़ित चालक (Lightning-conductor ) लगाना अनिवार्य है. लेकिन खुद सरकारी इमारतें ही इस मामले मे फिसड्डी साबित हो रही हैं.

जयपुर में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन केवल तीन इमारतें ऐसी हैं जहां पर थंडर स्टिक लगी हैं. एक थंडर स्टिक आमेर महल के अंदर, एक जंतर मंतर में और एक अल्बर्ट हॉल में है. इसके अलावा चाहे हवामहल हो, नाहरगढ़ हो या फिर अन्य कोई भी सरकारी इमारत यहां तड़ित चालक नहीं लगाए गए हैं. महज 35 हजार रुपये के खर्चे में ये तड़ित चालक लगते हैं.

जहां हादसा हुआ वहां नहीं लगा था तड़ित चालक
आमेर महल के जिस वॉच टावर पर आसमानी बिजली गिरी, उस पर तड़ित चालक लगा ही नहीं था. नियमों में भी ऐसा है कि प्रदेश के ऊंचाई पर मौजूद स्मारकों और पर्यटन स्थलों के अलावा ऊंची इमारतों पर तड़ित चालक (थंडर स्टिक) अनिवार्य रूप से लगाया जाना चाहिए. इस पूरे मामले में सरकारी विभागों की लापरवाही जानलेवा है. राजस्थान में बिजली गिरने से जानमाल के नुकसान की यह अब तक कि सबसे बड़ी घटना है.

सभी मॉन्यूमेंट्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को रिव्यू करने की जरुरत
नाहरगढ़ किले और हवामहल सहित राजधानी में ऊंचाई पर मौजूद मॉन्यूमेंट्स पर लाइटनिंग रॉड (तड़ित चालक) नहीं लगे हैं, जबकि नाहरगढ़ और आमेर की पहाड़ियों समेत राजधानी के सभी पर्यटन स्थल ऊंचाई पर हैं. यहां बारिश के दिनों में बिजली गिरने का खतरा बना रहता है. प्रदेश के स्मारक सरकार के अधीन आते हैं, लेकिन इन पर थंडर स्टिक लगाने की दिशा में कभी ध्यान ही नहीं दिया गया. विशेषज्ञों के मुताबिक आकाशीय बिजली से इंसानों को जान बचाने के लिए हमें सभी मॉन्यूमेंट्स पर इंफ्रास्ट्रक्चर को रिव्यू करके वहां तड़ित चालक लगाने होंगे. तड़ित चालक आकाशीय बिजली का चार्ज सीधा जमीन में भेज देता है. नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की गाइडलाइन का प्रसार-प्रसार करना भी जरूरी है. बिजली जनित हादसों से पीड़ितों के रेस्क्यू की भी नए सिरे से एसओपी तैयार करनी होगी.

एक थंडर स्टिक लगाने में करीब 35 हजार रुपए की लागत आती है
आकाशीय बिजली से घायल अस्पताल जाएं तो जख्म के हिसाब से ही नहीं, बल्कि उनका मेंटल ट्रॉमा का भी इलाज होना चाहिये. तड़ित चालक या थंडर स्टिक तांबे की बनी स्टिक होती है. थंडर स्टिक को तांबे या धातु के तार से जोड़ा जाता है. उस तार को जमीन में गाड़ा जाता है. थंडर स्टिक या लाइटनिंग कंडक्टर पर बिजली गिरती है तो धातु के तार के जरिए उसका चार्ज जमीन में पहुंचा दिया जाता है. इससे उस भवन को नुकसान नहीं पहुंचता.

बड़े भवन हो तो एक से ज्यादा थंडर स्टिक लगाने की जरूरत होती है
आकाशीय बिजली के खतरे वाले राज्यों में हर सरकारी भवन पर तड़ित चालक लगा रहता है. आमेर जैसे बड़े महल में एक थंडर स्टिक लगाने में करीब 35 हजार रुपए की लागत आती है. भवन बड़े हो तो एक से ज्यादा थंडर स्टिक लगाने की जरूरत होती है. महल, किलों में कई थंडर स्टिक की जरूरत होती है. घरों में भी सबसे ऊंचे कोने में थंडर स्टिक लगाना जरूरी होता है.

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