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राजस्थान में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में वृद्धि की बात भ्रामक-DGP

प्रदेश में वर्ष 2020 में महिला अत्याचारों में 16% और साल 2019 की तुलना में 9% की कमी आई है.

प्रदेश में वर्ष 2020 में महिला अत्याचारों में 16% और साल 2019 की तुलना में 9% की कमी आई है.

Crime against women : भले ही राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध सुर्खियों में हों, लेकिन पुलिस की नजर में कोरोनाकाल में इनमें कमी आई है. डीजीपी का दावा है कि वर्ष 2020 में महिला अत्याचारों में 16% और साल 2019 की तुलना में 9% की कमी आई है.

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जयपुर. राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों (Atrocities on women) में वृद्धि को राजस्थान पुलिस के मुखिया एमएल लाठर ने गलत ठहराया है. उन्होंने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं. जबकि वास्तविकता यह है कि निर्बाध पंजीकरण की नीति के बावजूद प्रदेश में वर्ष 2020 में महिला अत्याचारों में 16% और साल 2019 की तुलना में 9% की कमी आई है.

लाठर ने इस मामले में सफाई देते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में प्रारंभ की गयी अपराधों के निर्बाध पंजीकरण की नीति से अपराध पंजीकरण में तो मामूली वृद्धि हुई है. लेकिन इस नीति से महिलाओं सहित समाज के कमजोर वर्गो को त्वरित न्याय मिल रहा है. पुलिस द्वारा प्रत्येक अपराध दर्ज कर उसका निष्पक्ष एवं त्वरित अनुसंधान किया जा रहा है.

सुरक्षा सखी योजना से समस्याएं सुलझीं
कुछ समय पूर्व ही प्रत्येक पुलिस थाने में सुरक्षा सखी नाम से एक नई योजना आरंभ की गई है. इसमें स्थानीय महिलाओं को जोड़कर महिलाओं से संबंधित समस्याओं एवं उनके निवारण के लिए पुलिस थाने के साथ समन्वित प्रयासों को गति मिल रही है. कुछ ही समय में 7700 से अधिक महिलाएं इस योजना से जुड़ चुकी हैं.

केस ऑफिसर स्कीम से प्रभावी ट्रायल
डीजीपी के मुताबिक 498-A IPC के प्रकरणों की श्रेणी में वर्ष 2020 में 13 हजार 765 प्रकरण दर्ज हुए थे, जो कि वर्ष 2019 से 25% कम हैं. अलवर, जयपुर, भरतपुर, दौसा सहित प्रत्येक घटना में तत्काल कार्रवाई कर अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया गया है. लाठर ने बताया कि न केवल कुशल अनुसंधान बल्कि कोर्ट में भी ऐसे जघन्य अपराधों को केस ऑफिसर स्कीम में लिया जाकर प्रभावी ट्रायल सुनिश्चित की जा रही है.

झालावाड़ प्रकरण में आरोपी तत्काल गिरफ्तार
कृष्णा वाल्मिकी की हत्या प्रकरण में झालावाड़ पुलिस ने घटना के दिन कुछ ही घंटों में अपराध में लिप्त 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. इस प्रकरण में अब तक 7 मुल्जिम गिरफ्तार हो चुके हैं और 8वां आरोपी भी पुलिस की गिरफ्त में है. डीजीपी ने बताया पीड़ित, शोषित, वंचित वर्ग के लिए ही राज्य सरकार सबसे अधिक संवेदनशील है.

नवाचारों से पीड़िताओं को मिल रहा त्वरित न्याय
उन्होंने बताया कि ऐसी अनेक योजनाएं एवं नवाचार हैं, जिनके माध्यम से न केवल पीड़ित व्यक्तियों, विशेष रूप से महिलाओं को त्वरित न्याय दिलवाया जा रहा है, बल्कि उनकी पूर्ण सुरक्षा एवं सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है. महिला पुलिस पेट्रोलिंग यूनिट का पूरे राज्य में विस्तार, अभय कमांड सेंटर, ERSS, Twitter Helpline, 1090, 100, 112 Helplines की सुविधा से त्वरित रेस्पोंस मिल रहा है.

महिलाओं को दिया जा रहा है आत्मरक्षा प्रशिक्षण
महिलाओं को पुलिस लाइन में आत्मरक्षा प्रशिक्षण, जन जागरूकता अभियान एवं सोशल मीडिया का प्रभावी प्रयोग सिखाया जा रहा है. Special Investigation Unit for Crime Against Women हर जिले में स्थापित की है. पहले इसमें DySP स्तर का अधिकारी था. हाल ही में इसका दर्जा बढ़ाकर Addl SP पद कर दिया गया है, जो महिला अत्याचारों के साथ-साथ SC-STअत्याचार एवं बच्चों के विरूद्ध अपराध और मानव तस्करी के अपराधों की रोकथाम की भी monitoring करेगा.

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