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राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में 'तमिलनाडु पैटर्न', 15 जिलों की कमान प्रमोटी IAS को सौंपी, जानें क्या है वजह

गहलोत का मानना है कि आरएएस अधिकारी को फील्ड की जानकारी सीधी भर्ती वाले अफसरों की बजाय ज्यादा रहती है. वे आमजन की समस्याओं का समाधान त्वरित गति से करते हैं.

गहलोत का मानना है कि आरएएस अधिकारी को फील्ड की जानकारी सीधी भर्ती वाले अफसरों की बजाय ज्यादा रहती है. वे आमजन की समस्याओं का समाधान त्वरित गति से करते हैं.

Tamil Nadu pattern bureaucracy in Rajasthan: राज्य सरकार ने दक्षिण भारत के अहम राज्य तमिलनाडु की तर्ज पर ब्यूरोक्रेसी में बदलाव करते हुए इस बार 15 जिलों की कमान प्रमोटी आईएएस अधिकारियों को सौंपी है.

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जयपुर. राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) बने अफसर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहली पसंद बनकर उभरे हैं. नई तबादला सूची के बाद अब प्रदेश के 33 में से 15 जिलों की कमान प्रमोटी आईएएस अफसरों (Promotee IAS Officers) को दी गई है. ऐसा माना जा रहा है कि ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) में बदलाव का यह नया रूप है.

पूर्वी राजस्थान के अहम जिलों अलवर, धौलपुर और सवाई माधोपुर में प्रमोटी आईएएस अफसरों को कलक्टर बनाया गया है. चूरू, हनुमानगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, सवाई माधोपुर, कोटा, झुंझुनू, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, झालावाड़ और प्रतापगढ़ में भी प्रमोटी आईएएस अफसर लगाए गए हैं. मुख्यमंत्री ने राजधानी जयपुर की कमान भी प्रमोटी आईएएस अफसर अंतर सिंह नेहरा को सौंपी हुई है. दरअसल दक्षिण भारत के अहम राज्य तमिलनाडु के दो प्रमुख क्षेत्रीय दल डीएमके और अन्ना डीएमके सीधी भर्ती वाले अफसरों की बजाय राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों पर भरोसा करते रहे हैं.

प्रमोटी IAS अफसरों को पसंद करने की यह है वजह
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई सार्वजनिक मंचों पर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कामकाज की तारीफ करते रहे हैं. आरएएस अफसरों का जुड़ाव सीधे जनता से रहता है. राज्य सरकार का मानना है कि आरएएस अधिकारी को फील्ड की जानकारी सीधी भर्ती वाले अफसरों की तुलना में ज्यादा रहती है. वे आमजन की समस्याओं का समाधान त्वरित गति से करते हैं. जबकि सीधी भर्ती वाले आईएएस अफसरों की स्थानीय मुद्दों पर उतनी मजबूत पकड़ नहीं होती. आरएएस अफसर लोक कल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में ज्यादा सक्रिय रहे हैं.
RAS अफसरों की पॉवर में बढ़ोतरी


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सत्ता संभालने के करीब 1 साल बाद ही राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की शक्तियों में बढ़ोतरी कर दी थी. इसके तहत एसडीएम अपने उपखंड में किसी विभाग का औचक निरीक्षण कर सकता है और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के दो इंक्रीमेंट रोकने की अनुशंषा संबंधित विभाग के मुखिया को कर सकता है.
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