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उदयपुर: 28 करोड़ रुपए में बिके बीड़ी बनाने वाले तेंदु पत्ते, अब आदिवासियों को मिलेगा रोजगार

तेंदू पत्ता इकट्ठा करने के लिए एक बड़े मेन पावर की जरूरत होती है. अभी जब सभी इकाइयां नीलाम हो गई है तो वनवासियों को अच्छे रोजगार की भी उम्मीद नजर आ रही है.
तेंदू पत्ता इकट्ठा करने के लिए एक बड़े मेन पावर की जरूरत होती है. अभी जब सभी इकाइयां नीलाम हो गई है तो वनवासियों को अच्छे रोजगार की भी उम्मीद नजर आ रही है.

उदयपुर संभाग (Udaipur Division) मेंं तेंदू पत्ते की नीलामी से वन विभाग को 28 करोड़ 69 लाख 84 हजार की आय हुई है. नीलामी के बाद अब आदिवासियों को रोजगार (Employment) की आस जगी है.

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उदयपुर. दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल (Tribal dominated) इलाके में बीड़ी का चलन आज भी कायम है. युवाओं में भले ही सिगरेट के प्रति लगन बढ़ रही हो लेकिन ग्रामीण अंचल में धूम्रपान सामग्री के रूप में बीड़ी को ही पसंद किया जाता है. उदयपुर संभाग में बीड़ी बनाने वाले तेंदू पत्ते (Tendu leaves) से वन विभाग को हुई करोड़ों की आय इस बात का प्रमाण है.

वन विभाग ने उदयपुर संभाग में बीड़ी बनाने में काम आने वाले तेंदू पत्ते की नीलामी की तो उसे इससे 28 करोड़ 69 लाख 84 हजार की आय हुई है. विभाग द्वारा तेंदू पत्ते के लिए 74 इकाइयों की नीलामी तय की गई थी. वन विभाग की इस बार सभी इकाइयां नीलाम हो गई और इससे विभाग को करोड़ों की आय भी हुई है.

74 इकाइयों की नीलामी तय की गई थी
उदयपुर वन विभाग के सीसीएफ आर के सिंह की अध्यक्षता में संभाग के तेंदू पत्ते नीलाम किये गये. वन विभाग को नीलामी के लिए 294 निविदाएं प्राप्त हुई थी. कुल 74 इकाइयों की नीलामी तय की गई थी. इसमें संभाग के वन मंडल उदयपुर, उदयपुर उत्तर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ वन मंडल शामिल थे. तेंदूपत्ता व्यवसायियों ने भी नीलामी बोली में खुलकर भाग लिया और राज्य सरकार को इससे अच्छे राजस्व की भी प्राप्ति हुई है.
नीलामी से करीब 4 गुने से ज्यादा खर्चा तेंदूपत्ता इकट्ठा करने में आता है


तेंदूपत्ता की सभी इकाइयां नीलाम होने से वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह अच्छी खबर है. क्योंकि तेंदूपत्ता इकट्ठा करने के लिए एक बड़े मेन पावर की जरूरत होती है. अभी जब सभी इकाइयां नीलाम हो गई है तो वनवासियों को अच्छे रोजगार की भी उम्मीद नजर आ रही है. तेंदूपत्ता नीलामी से करीब 4 गुने से ज्यादा खर्चा तेंदूपत्ता इकट्ठा करने के लिए आता है. ऐसे में वन क्षेत्र में रहने वालों को मजदूरी के मार्फत रोजगार मिल सकेगा.
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