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Rajasthan news : चुनाव के नतीजों की गूंज धरियावद और वल्लभनगर उपचुनाव में जरूर सुनाई देगी

राजस्थान पंचायतीराज चुनाव

राजस्थान पंचायतीराज चुनाव

Rajasthan Politics : आज रात नेताओं को नींद कम ही आएगी. बेचैनी बाड़ों में कैद सियासी परिंदों को परेशान करती रहेगी. कल का दिन नई उम्मीदों और संभावनाओं से भरपूर होगा. कहीं जीत की खुशी के नगाड़े बजेंगे तो कहीं गम के आंसू छलकेंगे. दोनों दलों के प्रदेश अध्यक्षों के लिए ये चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं.

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जयपुर. कल मतगणना (Vote counting) होगी उससे पहले ही आज उम्मीदवारों (candidates) से लेकर उनके समर्थक नेताओं के घरों और कार्यालयों तक दौड़-धूप करते रहे. जिला प्रमुख और पंचायत समिति प्रधान बनने—बनाने के लिए राजनेताओं (leaders) के दरवाजों पर खूब भीड़ उमड़ी. दोनों ही दलों के नेता दावे जीत के कर रहे हैं, मगर अभी भी भीतर ही भीतर बीजेपी और कांग्रेस को हार का डर सता रहा है. धरियावद और वल्लभनगर के उपचुनाव (by-election) में इस चुनाव के नतीजों की गूंज जरूर सुनाई देगी. पावटा पंचायत समिति का प्रधान बनाना चाहते हैं. इसलिए प्रदेश अध्यक्ष का आशीर्वाद लेने उनके घर जमे हैं. यहां आई भीड़ में किसी का भाई चुनाव लड़ रहा है तो किसी का बेटा या पिता. सब नेताओं की तरह अपनों की जीत के दावे कर रहे हैं.

जोधपुर से भरतपुर तक किस्सा कुर्सी का
प्रधान—प्रमुख की टिकट का जुगाड़ बैठा रहे हैं. जोधपुर से लेकर भरतपुर तक किस्सा कुर्सी का चल रहा है. पूर्व मंत्री रामनारायण डूडी तक अपनों के लिए कतार में हैं.भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां सब कुछ सामान्य होने का दावा कर रहे हैं. मगर चुनाव के नतीजे दोहरी चुनौती लेकर आएंगे.

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क्रॉस वोटिंग और भितरघात का भी डर
प्रधान ओर प्रमुख के उम्मीदवारों के लिए पार्टी को एकराय बनानी होगी. नहीं तो बहुमत हासिल होने के बावजूद पार्टी जीती जिताई बाजी हार जाएगी. क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडराएगा. भितरघात का डर सताएगा. पकड़ कमजोर हुई तो राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कमजोर खिलाड़ियों को ले उड़ेंगे.

चुनाव के नतीजे बाड़ाबंदी की किस्मत का फैसला लिखेंगे
इसलिये मौसम पहरे का है. बाड़ा बंदी का है. नतीजे ही बाड़े की किस्मत का फैसला लिखेंगे. बहुमत से दूर रहे तो बाड़ा कल ही खाली हो जाएगा. उम्मीदे जिंदा रहीं तो 7 सितंबर तक बाड़ाबंदी जारी रहेगी. भाजपा बाड़ेबंदी को अब भी ट्रेनिंग केम्प करार दे रही है.

इस चुनाव का प्रदेश की सियासत पर असर
भाजपा का पलड़ा भारी रहा तो सतीश पूनियां के दिल्ली दरबार में नम्बर और बढ़ेंगे. पार्टी में वो और मजबूत होंगे. भाजपा हारी तो वसुंधरा केम्प प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ आग उगलेगा. सियासी बयानबाजी बढ़ जाएगी. कांग्रेस के जीतने पर गहलोत और मजबूत होंगे व डोटासरा के नेतृत्व की सराहना होगी. हारे तो पायलट केम्प फिर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं चूकेगा. जीती हुई पार्टी का विधानसभा के सत्र में जोश उफान पर होगा.

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