राजस्थान: खतरनाक होगी कोरोना की तीसरी लहर ! आदिवासी बहुल इलाके बच्चों के लिए 'डेंजर जोन'

राजस्थान की बात करें तो यहां बच्चों की आबादी में से 60 फीसदी बच्चे एनिमिक हैं. राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों बारां, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बूंदी, उदयपुर और प्रतापगढ़ आदि में कुपोषित बच्चों की संख्या सर्वाधिक है.

राजस्थान की बात करें तो यहां बच्चों की आबादी में से 60 फीसदी बच्चे एनिमिक हैं. राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों बारां, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बूंदी, उदयपुर और प्रतापगढ़ आदि में कुपोषित बच्चों की संख्या सर्वाधिक है.

Third wave of corona: कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिये घातक साबित होने की आशंका जताई जा रही है. इसमें कमजोर इम्युनिटी (Weak immunity) वाले बच्चों के ज्यादा संक्रमित होने का खतरा बताया जा रहा है. राजस्थान में ऐसे बच्चों (Children) की संख्या 40 लाख से ज्यादा है.

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जयपुर. प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने राजस्थान में कोरोना की तीसरी लहर (Corona's third wave) की तैयारियों के बारे में कलेक्टर्स से बातचीत की. बीकानेर कलेक्टर ने बताया कि तीसरी लहर के लिए बच्चों के विशेष मास्क बनाने होंगे. मौजूदा मास्क उनके लिए पर्याप्त नहीं हैं. इसके अलावा चाइल्ड हास्पिटल को अपग्रेड करने का प्लान बनाया जा रहा है. प्रदेश में गांवों में क्या ब्लॉक स्तर पर भी चाइल्ड हास्पिटल की सुविधा नहीं है. ऐसे में तीसरी लहर का मुकाबला करने के लिए बड़ी तैयारी करनी होगी. खासकर उन 40 लाख से ज्यादा बच्चों के लिए जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं.

विशेषज्ञ कोरोना की तीसरी लहर को बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनने की आशंका बता रहे हैं. प्रदेश में यह लहर कब आएगी, इसके बारे में अभी कोई पुख्ता तिथि का खुलासा नहीं हुआ है. लेकिन यह तय है कि इस लहर से शारीरिक रूप से कमजोर, कुपोषित और एनिमिया के शिकार बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या 40 लाख से ज्यादा है. इसके बावजूद तीसरी लहर के मद्देनजर गांव ही नहीं, शहरों में भी विशेषकर बच्चों के लिए स्पेशल इंतजाम नहीं है.

प्रदेश में 40 लाख बच्चे एनिमिक और कुपोषित

राजस्थान की बात करें तो यहां बच्चों की आबादी में से 60 फीसदी बच्चे एनिमिक हैं. राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों बारां, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बूंदी, उदयपुर और प्रतापगढ़ आदि में कुपोषित बच्चों की संख्या सर्वाधिक है. इनमें से ज्यादातर बच्चों में खून की कमी है. जबकि 25 से 40 फीसदी का वजन कम है. कोरोना की तीसरी लहर के लिए सबसे ज्यादा खतरा ऐसे ही बच्चों के लिए है. इनका इम्युन सिस्टम कमजोर होने के कारण इनमें संक्रमण का खतरा दूसरे बच्चों की अपेक्षा ज्यादा है.
तीसरी लहर को देखते हुए इंतजाम करें

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में कहा कि सिंगापुर में मिला कोरोना का नया वैरिएंट भारत में तीसरी लहर ला सकता है और यह बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है. हालांकि सिंगापुर ने केजरीवाल के इस दावे को खारिज कर दिया है. लेकिन केजरीवाल से पहले भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी तीसरी लहर की चेतावनी दे चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्यों से तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए कहा है.

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