ये है 100 करोड़ की जमीन की मालकिन, पशुपालन कर पाल रही हैं बच्चे, यहां पढ़ें क्या है हकीकत

Rakesh sharma | News18 Rajasthan
Updated: July 5, 2019, 3:19 PM IST
ये है 100 करोड़ की जमीन की मालकिन, पशुपालन कर पाल रही हैं बच्चे, यहां पढ़ें क्या है हकीकत
संजूेदेवी। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

सीकर के नीमकाथाना इलाके की दीपावास गांव की ढाणी निवासी संजू देवी मीणा करीब 100 करोड़ की जमीन की मालकिन होने के बावजूद खेती और पशुपालन कर अपने बच्चों को पाल रही है. सुनकर यकीन नहीं होता, लेकिन यह सच है.

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सीकर के नीमकाथाना इलाके की दीपावास गांव की ढाणी निवासी संजू देवी मीणा करीब 100 करोड़ की जमीन की मालकिन होने के बावजूद खेती और पशुपालन कर अपने बच्चों को पाल रही है. सुनकर यकीन नहीं होता, लेकिन यह सच है. यह बात दीगर है कि खुद संजू देवी को भी नहीं पता कि उसके नाम पर ये कीमती जमीनें कहां पर हैं. वह तो बस इतना जानती है कि पति की मौत के बाद उसे हर माह कोई पांच हजार रुपए घर का खर्च चलाने के लिए भेजता था.

छह गांवों में खरीदी गई 64 बेनामी संपत्तियां
दरअसल मुंबई के हीरानंदानी ग्रुप की ‘हेजलनट कंस्ट्रक्शन’ कंपनी की करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खेल उजागर होने के बाद हैरान कर देने वाले यह कहानी सामने आई है. संजूदेवी के नाम से जयपुर-दिल्ली हाइवे पर छह गांवों में खरीदी गई 64 बेनामी संपत्तियों को आयकर विभाग की बेनामी निषेध यूनिट ने बेनामी संपत्ति अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत प्रोविजनल रूप से अटैच कर दिया है. इन जमीनों का बाजार मूल्य करीब 100 करोड़ रुपए बताया जा रहा है.

निरक्षर से लगवाया अंगूठा

बेनामी निषेध यूनिट की जांच में यह सामने आया कि संजू देवी के नाम जयपुर-दिल्ली हाइवे पर आमेर तहसील के कूकस, खोरामीणा, हरवर, ढन्ड, नांगल तुर्कान और राजपुर खान्या गांवों में स्थित ये जमीनें वर्ष 2006 में खरीदी गई थी. कुल 36 हैक्टेयर जमीन 64 अलग अलग विक्रय पत्रों के माध्यम से संजु देवी मीणा के नाम खरीदी गई. इनके लिए 12.93 करोड़ रुपए का भुगतान मुंबई की एक बड़ी कंपनी ‘हेजलनट कंस्ट्रक्शन’ ने किया था.

विक्रय पत्र पंजीकृत करवाने से पहले ले ली गई पावर ऑफ अटॉर्नी
संजू देवी मीणा के नाम से जमीनों के विक्रय पत्र पंजीकृत करवाने से पहले मुंबई निवासी एक व्यक्ति चंद्रकांत तारानाथ मालवंकर के नाम एक पावर ऑफ अटॉर्नी संजू देवी मीणा से ले ली गई थी. यह कंपनी मुंबई के हीरानंदानी ग्रुप से संबंधित है. संजू देवी से जब इस बारे में बात की गई तो उसका कहना है कि वह तो निरक्षर है. उससे तो कागजों पर अंगूठे लगावाए गए थे.
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पति और फुफेर ससुर करते थे मुंबई में काम
संजू देवी का पति नारूराम और फुफेर ससुर मुंबई में काम करते थे. वे जमीन खरीदने के बात कहकर वर्ष 2006 में उसे साथ ले गए थे. इस दौरान मुंबई के भी कुछ लोग आए थे. उन्होंने जमीन के कागजों पर उससे अंगुठे लगवाए गए थे. करीब दस वर्ष पहले उसके पति नारूराम की मौत हो गई.

प्रतिमाह पांच हजार रुपए आते थे
पति की मौत के बाद उसे घर चलाने के लिए प्रतिमाह पांच हजार रुपए भेजे जाने लगे. यह पैसे उसे पहले डाक से बाद में बैंक खाते में भेजे जाते. कई बार जयपुर में उसकी भुवा सास के घर भी भेज दिए जाते. वहां से वह लेकर आती थी, लेकिन पिछले तीन वर्ष से उसे कोई पैसा नहीं भेजा जा रहा है.

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First published: July 4, 2019, 11:18 PM IST
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