रणथंभौर में क्षमता से ज्यादा हुए बाघ, 71 के पार पहुंचा आंकड़ा, इंसानों के लिए बने खतरा

इस वर्ष 4 लोग बाघों के हमले में जान गंवा चुके हैं और 4 ही बुरी तरह घायल भी हो चुके हैं.
इस वर्ष 4 लोग बाघों के हमले में जान गंवा चुके हैं और 4 ही बुरी तरह घायल भी हो चुके हैं.

राजस्थान (Rajasthan) के सवाई माधोपुर (Sawai madhopur) में स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) में क्षमता से ज्यादा (Over capacity) बाघ हो चुके हैं. रणथंभौर में बाघों की तादाद शावकों समेत (tigers including cubs) गिनी जाए तो वो 71 के पार जा पहुंची है, जबकि यह इस टाइगर रिजर्व में महज 40 बाघों को ही संभालने की क्षमता है.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के सवाई माधोपुर (Sawai madhopur)  में स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) में क्षमता से ज्यादा (Over capacity) बाघ हो चुके हैं. लिहाजा वहां अब बाघों में टैरिटरी को लेकर संघर्ष (Struggle) भी बढ़ गया है. रणथंभौर में बाघों की तादाद शावकों समेत (tigers including cubs) गिनी जाए तो वो 71 के पार जा पहुंची है, जबकि यह इस टाइगर रिजर्व में महज 40 बाघों को ही संभालने की क्षमता है. हालात ये हैं कि करीब 15 से 16 बाघ रणथंभौर के जंगल की सरहदों (Forest frontiers) के आसपास इंसानी आबादी क्षेत्र (Human population area) में भटक रहे हैं.

4 लोग बाघ के हमले में जान गंवा चुके हैं
इसको देखते हुए वन विभाग की गश्त टीम ने अपनी रूटीन गश्त दुगुने कर दिए हैं. संवेदनशील गांवों में जनप्रतिनिधियों द्वारा लोगों को सतर्क रहने के भी निर्देश दिए जा रहे हैं. एक ओर जहां वन विभाग के पास स्टाफ की कमी है तो दूसरी ओर हालात पहले से ज्यादा खराब होते जा रहे हैं. इस वर्ष 4 लोग बाघों के हमले में जान गंवा चुके हैं और 4 बुरी तरह घायल भी हो चुके हैं. इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि एक ही वर्ष में बाघों ने इंसानों पर इतने हमले किए हों. इंसानों पर हमले की वजह से ही टी-104 को कैद करना पड़ा. वहीं दो अन्य बाघों को वन विभाग ने इंसानों पर हमले करने वाला मानते हुए उन्हें चिन्हित किया है.

शिफ्टिंग ही एक बेहतर विकल्प
वन विभाग के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर का मानना है कि रणथंभौर से कुछ बाघों को अन्य टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करना ही एक बेहतर विकल्प है. इसके लिए सबसे मुफीद अलवर का सरिस्का टाइगर रिजर्व है. क्योंकि वहां युवा नर बाघों की कमी है और मादाओं की संख्या ज्यादा है. इसके अलावा कोटा के मुकंदरा में भी अभी 5 बाघ और शिफ्ट किए जाने हैं तो कुछ बाघों को वहां शिफ्ट किया जा सकता है. इस शिफ्टिंग में एक नया ठिकाना बूंदी का रामगढ़ विषधारी जंगल भी है. हालांकि ये इलाका टाइगर रिजर्व का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन इस रेंज में पहले कई बाघ शांति से अपना इलाका बनाकर रह चुके हैं. यहां बाघ रहने के दौरान कभी किसी इंसान पर हमला भी नहीं हुआ.



बाघों को संभालने के लिए तैयारी पूरी नहीं
रणथंभौर में बाघों के ये हालात एक बड़ा सवा खड़ा करते हैं कि जिन बाघों को संरक्षण के लिए 1973 से प्रोजेक्ट टाइगर के जरिए लगातार संरक्षण के प्रयास कर रहे हैं, क्या वो इनकी बढ़ी हुई आबादी को संभालने की स्थिति में हैं या नहीं. क्योंकि हालात ये इशारा कर रहे हैं कि बाघों को संभालने के लिए तैयारी पूरी नहीं थी और इसका खामियाजा लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है.

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