राजस्थान में टाइगर को खतरा; सरिस्का में ताबीज के लिए मूंछ के बाल उखाड़े, रणथम्भौर में 6 बाघ-बाघिन गायब

बाघों पर खतरे को लेकर चर्चा में आए राजस्थान के सरिस्का और रणथंभोर राष्ट्रीय अभयारण्य. (File pic)

बाघों पर खतरे को लेकर चर्चा में आए राजस्थान के सरिस्का और रणथंभोर राष्ट्रीय अभयारण्य. (File pic)

राजस्थान के सरिस्का और रणथंभौर में बाघों को लेकर आई खबरों से मचा हड़कंप. सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ की मूंछों के बाल काटने की शिकायत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंची. रणथंभौर में 10 महीने में गायब हैं 6 बाघ-बाघिन.

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जयपुर. राजस्थान में बाघों के दीदार के लिए सरिस्का और रणथम्भौर राष्ट्रीय अभ्यारण्य देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं, लेकिन इन दिनों दूसरे कारणों से बाघों को लेकर ये जंगल चर्चा में आ रहे हैं. प्रदेश के दो मशहूर अभयारण्यों से बाघों के ऊपर खतरा मंडराने की खबरें आई हैं. सरिस्का में जहां टाइगर की मूंछ के बाल काट लिए गए, वहीं रणथंभौर में 10 महीने के भीतर 6 बाघ-बाघिनों के गायब होने के मामले ने हड़कंप मचा दी है. सरिस्का टाइगर रिजर्व में तो बाघ के मूंछों के बाल काटने की शिकायत मुख्यमंत्री तक जा पहुंची है. आरोप है कि ताबीज के लिए अफसरों ने बाघ की मूंछ की बाल काटे. दूसरी और रणथम्भौर में 10 माह में छह बाघ-बाघिन गायब होने पर भी सवालिया निशान खड़े हुए हैं.

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय में लिखित शिकायत पहुंची है कि सरिस्का में बाघ एसटी-6 की मूंछ के बाल काट लिए गए. शिकायत के मुताबिक इसी साल 10 जनवरी को जब बाघ को इलाज के लिए ट्रेंकुलाइज किया गया, तब अफसरों की मौजूदगी में ऐसा हुआ. ​ताबीज के लिए मूंछ के बाल काटने के दौरान रेंजर और डॉक्टर भी मौजूद बताए गए. वाइल्ड लाइफ एक्ट के शेड्यूल-1 के अनुसार किसी भी वन्य जीव के किसी भी अंग जैसे बाल-नाखून या दांत आदि से छेड़छाड़ अपराध की श्रेणी में आता है. सीएमओ स्तर पर अब इसकी जांच की जा रही है कि बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के दौरान कौन-कौन सा स्टाफ मौजूद था.

दूसरी ओर, सरिस्का टाइगर रिजर्व से जुड़े अफसरों ने मुख्यमंत्री के पास पहुंची शिकायत को बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा कि बाघ 15 साल का है और इस उम्र में बाल झड़ना सामान्य बात है. इसके अलावा बाघों की आपसी टकराहट के समय भी बाल झड़ जाते हैं.

रणथम्भौर: 15 साल में 30 बाघ गायब
इधर, राजस्थान का दूसरा टाइगर रिजर्व भी बाघों के गायब होने को लेकर चर्चा में है. वन विभाग के सूत्रों की मानें तो रणथम्भौर की बाघिन टी-73 और उसके दो वयस्क हो रहे शावक टी-64, टी-95 व बाघ टी-97 लापता हैं. इनके अलावा दो अन्य बाघों के फोटो भी ट्रैप कैमरों में नहीं मिले हैं. सरिस्का के अफसर भले ही यहां बाघों का कुनबा बढ़ने से खुश हों, लेकिन इस बीच छह बाघों के बारे में भी कोई जानकारी न होना, वन विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है. क्योंकि लापता हुए सभी बाघों का इलाका एक ही है. इन सभी बाघों का विचरण कचीदा वन क्षेत्र से लेकर धूंधरमल का दर्रा का क्षेत्र तक रहता था. इससे पहले भी 2006 से अब तक रणथम्भौर से 30 बाघ गायब हो चुके हैं. इनमें से सात बाघ उम्रदराज और 23 बाघ-बाघिन हैं. 23 में भी 12 बाघ और 11 बाघिन हैं.
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