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नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में किया गया पैंथर की इस दुर्लभ बीमारी का इलाज, रिसर्च पेपर होगा जारी

पैंथर की इस बीमारी का इलाज बड़ी उपलब्धि है. यह अपने आप में एक तरह का दुर्लभ मामला है.

पैंथर की इस बीमारी का इलाज बड़ी उपलब्धि है. यह अपने आप में एक तरह का दुर्लभ मामला है.

Nahargarh Biological Park News: जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में पैंथर के इलाज का अनोखा मामला सामने आया है. यहां ए ...अधिक पढ़ें

जयपुर. राजधानी जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क (Nahargarh Biological Park) में एक पैंथर की न्यूरोलॉजिकल बीमारी (Neurological disease of panther) को दूर करने का बहुत ही दुर्लभ मामला (Rare case) सामने आया है. कुछ दिन पहले जयपुर के पास लबाना से इस पैंथर को रेस्क्यू किया गया था. जयपुर में पिछले दिनों पड़ी कड़ाके की सर्दी के कारण इस पैंथर को निमोनिया हो गया था. निमोनिया की वजह से पैंथर के दिमाग पर काफी असर पड़ा था. पैंथर की हालत यह थी कि उसका दिमागी संतुलन बिल्कुल भी सही नहीं रहा. ऐसे हालात में पैंथर पिंजरे से अपने सिर को बार-बार टकराने लगा था.

उस दौरान पैंथर न तो सही तरीके से खड़ा हो पा रहा था और न ही चल पा रहा था. यहां तक कि भोजन भी नहीं कर पा रहा था. एक तरह से ये पैंथर बीमारी के कारण दम तोड़ने के कगार पर आ गया था. इस तरह के दुर्लभ मामले को लेकर नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉक्टर अरविंद माथुर ने भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, अहमदाबाद और हैदराबाद समेत देश के कई विशेषज्ञों से संपर्क कायम किया. उसके बाद इस पैंथर का इलाज शुरू किया.

पैंथर की हालत में काफी सुधार आया है
एक ओर कड़ाके की पड़ रही सर्दी में निमोनिया से बीमार इस पैंथर को बचाना था तो दूसरी ओर इसकी दिमागी बीमारी का भी इलाज करना था. गहन रिसर्च के बाद डॉक्टर माथुर की ओर से पैंथर के किये गये इलाज का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है. पिछले 1 सप्ताह में इस पैंथर की हालत में काफी सुधार आया है. इसके साथ ही पैंथर की न्यूरोलॉजिकल परेशानी को भी दूर कर दिया गया है. अब पैंथर अपने पिंजरे में आसानी से चहलकदमी करने लगा है और भोजन भी आराम से कर रहा है.

यह अपने आप में दुर्लभ मामला है
इससे पहले वन्य जीवों में इस तरह की न्यूरोलॉजिकल बीमारी के इलाज का मामला राजस्थान में कहीं देखने को नहीं मिला था. लेकिन जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में पैंथर में इस तरह की बीमारी का न केवल समय पर पता लगाया गया बल्कि उसका सही इलाज भी किया गया है. यह वन विभाग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. यह अपने आप में एक तरह का दुर्लभ मामला है.

रिसर्च पेपर पब्लिश किया जाएगा
इससे अब देशभर में पैंथर समेत अन्य दूसरे वन्यजीवों में भी इस तरह की दिमागी बीमारियों को दूर करने में मदद मिलेगी. नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क की ओर से पैंथर के इलाज के मामले में जल्दी ही एक रिसर्च पेपर पब्लिश किया जाएगा ताकि वन्य जीवों में ऐसे दुर्लभ मामले में इलाज के तरीके को आसानी से समझा जा सके.

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