राजस्थान : मृत प्रोफेसर की पत्नी बनकर लेना चाहती थी इंश्योरेंस क्लेम, ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज

इंश्योरेंस क्लेम लेने के लिए युवती ने प्रोफेसर का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया. (प्रतीकात्मक फोटो)

नगर निगम ग्रेटर जयपुर ने ज्योति नगर थाने को एफआई दर्ज करने के लिए पत्र लिखा. इसमें कहा गया कि मृत्यु पंजीकरण में प्रो. जगदीश प्रसाद की मृत्यु महावीर जयपुर राजस्थान अस्पताल में दिखाई गई है, जबकि उनकी मृत्यु अस्पताल में नहीं हुई.

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जयपुर. किराएदार युवती ने मृत मकान मालिक की पत्नी बनकर उनके नाम के इंश्योरेंस पॉलिसी (Insurance Policy) का क्लेम लेने की कोशिश की है. नगर निगम ग्रेटर जयपुर (Municipal Corporation Greater Jaipur) ने इस मामले में एफआई दर्ज करने के लिए ज्योति नगर थाना पुलिस को पत्र लिखा है. नगर निगम ने अपने पत्र में सुशीला नाम की युवती को आरोपी बनाया है.

मामला राजस्थान यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत्त हुए प्रोफेसर जगदीश प्रसाद से जुड़ा है. उनकी मृत्यु 7 मई को हो गई थी. जगदीश प्रसाद के परिजनों का आरोप है कि प्रोफेसर का फर्जी डेथ लेटर एक निजी अस्पताल से जारी करवा कर 50 लाख रुपये के इंश्योरेंस का क्लेम किया गया. जब इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि ने वेरिफिकेशन के लिए जैसे ही जगदीश प्रसाद के नंबर पर फोन किया तो उनका फोन उनकी पत्नी ने उठाया और पूरे मामले का खुलासा हो गया.

इस बात का पता चलने के बाद जगदीश प्रसाद की बेटी ने पूरे मामले की जानकारी नगर निगम को दी. उसने पूछा कि जब प्रोफेसर अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए तो यहां से मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ? उन्होंने इसे लेकर निगम पर भी सवाल खड़े किए. जन्म मृत्यु पंजीयन रजिस्ट्रार के यहां भी इनडोर व आउटडोर में कोई एंट्री नहीं है. अस्पताल वालों ने भी इसकी पुष्टि नहीं की. ज्योति नगर थाने में इस मामले को लेकर नगर निगम की ओर से भी शिकायत दी गई हैं, जिसमें सुशीला नाम की युवती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है.

नगर निगम ग्रेटर जयपुर ने इस मामले में एफआई दर्ज करने के लिए ज्योति नगर थाना पुलिस को पत्र लिखा. इसमें सुनीता काजल द्वारा शिकायत को आधार बताते हुए कहा गया कि मृत्यु पंजीकरण में प्रो. जगदीश प्रसाद की मृत्यु महावीर जयपुर राजस्थान अस्पताल में दिखाई गई है, जबकि वास्तव में जगदीश प्रसाद की मृत्यु अस्पताल में नहीं हुई. अस्पताल ने भी दिनांक 09.06.2021 के पत्र में बताया कि जगदीश प्रसाद की मृत्यु उनके अस्पताल में नहीं हुई.
निगम के इस पत्र में कहा गया है 'निगम द्वारा प्रकरण की जांच करने पर यह पाया गया कि मृत्यु प्रतिवेदन फार्म पर सूचनादाता के स्थान पर सुशीला के हस्ताक्षर है जिसमें सुशीला को मृतक की पत्नी दर्शाया गया है. साथ ही महावीर जयपुर राजस्थान अस्पताल की मोहर व उस पर हस्ताक्षर भी अंकित है. अस्पताल में इससे सम्बन्धित कोई रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं है. स्पष्ट है कि सुशीला द्वारा अस्पताल में मिलीभगत कर झूठे दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया है. अतः इसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए.'

दरअसल सुशीला प्रोफेसर के यहां किराए पर रहती थीं. उन पर जगदीश प्रसाद की संपत्ति हड़पने के आरोप भी परिजनों ने लगाए हैं. जगदीश प्रसाद की बेटी सुनीता का कहना है कि सुशीला नाम की एक युवती 2016 से उनके घर पर किराए पर रहती थीं. जगदीश प्रसाद की 7 मई को पैतृक गांव में मृत्यु हो गई थी. 13 मई को ग्राम पंचायत दुल्हेपुरा सीकर से मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हुआ. लेकिन सुशीला ने अन्य लोगों के साथ मिलकर गांव की जमीन और जयपुर स्थित आगरा रोड के प्लॉट, बैंक इंश्योरेंस हड़पने के लिए एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया. अब मामले की जांच पुलिस को करनी है. मामले में नगर निगम ग्रेटर ने भी पुलिस थाना ज्योति नगर को अपनी शिकायत दी है.

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