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    Rajasthan: उद्योग मंत्री शांति धारीवाल ने खोला अजमेर संभाग कमिश्नर के खिलाफ मोर्चा, जानें वजह

    धारीवाल का कहना है कि संभागीय आयुक्त को नगर परिषद के अधिकारी पर कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है.
    धारीवाल का कहना है कि संभागीय आयुक्त को नगर परिषद के अधिकारी पर कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है.

    Minister-officer controversy: यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल का कहना है कि अजमेर संभागीय आयुक्त आरुषि मलिक (Ajmer Divisional Commissioner Aarushi Malik) को कानून की समझ नहीं है. मंत्री ने मुख्य सचिव से कमिश्नर की लिखित शिकायत की है.

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    जयपुर. प्रदेश में एक बार फिर मंत्री-अफसर विवाद (Minister-officer controversy) सामने आया है. यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal) ने अजमेर संभागीय आयुक्त आरुषि मलिक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अजमेर संभागीय आयुक्त द्वारा नागौर नगर परिषद के आयुक्त को नोटिस देने और एसीबी में रिपोर्ट भेजने पर धारीवाल ने कड़ी आपत्ति करते हुए तल्ख टिप्पणी (Comment) की है. धारीवाल ने फाइल पर तल्ख टिप्पणियां करते हुए मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर संभागीय आयुक्त को भविष्य में इस तरह की कार्रवाई से करने से रोकने की हिदायत दी है.

    यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि अजमेर संभागीय आयुक्त को नगर परिषद के अधिकारी पर कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है. 16 सीसी या 17 सीसी का नोटिस देना अवैधानिक है. बकौल धारीवाल वे पहले भी विवादों में रही हैं और अब भी विवादों में हैं. स्वायत्त शासन विभाग के जिले के अफसर के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार केवल एलएसजी सचिव के पास है. मंत्री की मंजूरी बाद ही किसी ईओ या स्वायत्त शासन संस्था के किसी अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. स्वायत्त शासन संस्था के बीच में कोई कलक्टर, संभागीय आयुक्त या अन्य अफसर नहीं आता है. यह स्वायत्त शासन विभाग है इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है. धारीवाल ने कहा कि अजमेर संभागीय आयुक्त को कानून की समझ ही नहीं है. मुख्य सचिव को लिख दिया है. जरूरत पड़ने पर सीएम को भी अवगत करवाया जाएगा.

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    आयुक्तों को अधिकार पर विवाद
    विवाद की असली जड़ संभागीय आयुक्तों को जिले के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार हैं. अजमेर संभागीय आयुक्त ने नागौर परिषद के आयुक्त के खिलाफ 17 सीसी का नोटिस दिया था और एसीबी को भी कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी थी. इसी पर विवाद हो गया है. 18 फरवरी 2020 को कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी करके संभागीय आयुक्त को उसके संभाग में नियुक्त राज्य सेवा के सभी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार दिए थे.

    तीन इंक्रीमंट रोकने तक के अधिकार
    अधिसूचना के मुताबिक संभागीय आयुक्त को उसके संभाग में कार्यरत क्षेत्रीय स्तर के राज्य सेवा के अफसरों के खिलाफ सिविल सेवा नियम के तहत 17- सीसी का नोटिस जारी करने और तीन इंक्रीमंट रोकने तक के अधिकार दिए थे. संभागीय आयुक्त को दिए गए ये अधिकार अब मंत्री अफसरों के बीच टकराव का कारण बनते दिख रहे हैं. यूडीएच मंत्री का तर्क है कि स्वायत्त शासन विभाग के मामले में यह अधिकार लागू नहीं होते. फरवरी में सर्कूलर निकला होगा लेकिन संभागीय आयुक्त जिले के अधिकारियों पर कार्रवाई कर सकते हैं. स्वायत्त शासन के अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं कर सकते.
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