सिकंदर को फांसी मिलना तय, इनके दम पर 'जीवाणु' के अंत का हुआ पक्का इंतजाम!

जयपुर के सीरियर रेपिस्ट सिंकदर उर्फ जीवाणु को इस बार उसके किए कि सजा मिलकर रहेगी. यहां पढ़ें, जीवाणु के खात्मे का इंतजाम...

Sachin Kumar | News18 Rajasthan
Updated: July 9, 2019, 9:53 AM IST
सिकंदर को फांसी मिलना तय, इनके दम पर 'जीवाणु' के अंत का हुआ पक्का इंतजाम!
फोटो- सीरियर रेपिस्ट सिंकदर को कोर्ट से जेल जाते हुए सुरक्षाकर्मी.
Sachin Kumar | News18 Rajasthan
Updated: July 9, 2019, 9:53 AM IST
जयपुर के शास्त्री नगर में मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी  के आरोपी सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ जीवाणु को मौत की सजा मिलना लगभग तय है. हालांकि पूरे मामले में अभी लंबा ट्रायल चलेगा लेकिन जिस तरह से उसे लेकर आए दिन खुलासे हो रहे हैं. उससे जनमानस भी अब उसे सजा-ए-मौत देन की मांग कर रहा है. यूं तो वकीलों ने उसकी पैरवी करने से इनकार कर दिया है लेकिन उसकी पैरवी कितनी भी मजबूत हो उसको फांसी तक पहुंचाने के इंतजाम प्रदेश सरकार पहले ही कर चुकी है. हम बात कर रहे है साल 2018 में हुए स्टेट क्रिमिनल लॉ अमेंडेट बिल 2018 की. इसमें 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ यौन शोषण के मामले में राज्य सरकार ने फांसी की सजा का प्रावधान कर दिया है. इसके साथ ही पॉक्सो एक्ट में भी इस तरह के अपराधों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है.

पॉक्सो कोर्ट में हुए संशोधन और स्टेट में क्रिमिनल लॉ में हुए संशोधन के बाद इस तरह के अपराधों में फांसी का प्रावधान कर दिया गया है. वहीं अगर अदालत इस मामले को रेअर टू रेरेस्ट मानती है तो भी जीवाणू को फांसी होना तय है.


जीवाणु को फांसी तक पहुंचाने के ये बनेंगे आधार
- पॉक्सो एक्ट में संशोधन के बाद इस तरह के मामलों में फांसी का प्रावधान

- राज्य सरकार ने भी मार्च 2018 में क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 2018 में किया प्रावधान
- धारा 376AB जोड़कर 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के मामलें किया फांसी का प्रावधान
- वहीं अपराध के रिपिटेशन के मामले में भी दी जा सकती है फांसी की सजा
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- सुप्रीम कोर्ट के भी कई जजमेंट है इसके पक्ष में
- इन सबके अलावा रेअस टू रेरेस्ट केस में भी जज विवेकानुसार सुना सकता है सजा

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फोटो- पुलिस गिरफ्त में सिकंदर.


कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

इन सबके अलावा जीवाणु के पास पूरी ट्रायल के दौरान सिंकदर का पक्ष रखने के लिए कोई वकील नहीं होगा. दी बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राजेश कर्नल के अनुसार एसोसिएशन ने यह फैसला लिया है कि कोई भी वकील जीवाणु का केस नहीं लड़ेगा. अगर ऐसा होता है तो भी जीवाणु का पक्ष काफी कमजोर हो जाता है.

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First published: July 9, 2019, 9:45 AM IST
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