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Jaipur: COVID-19 ने तोड़ दिया गुलाबी नगरी का 160 साल पुराना यह रिकॉर्ड

Jaipur: COVID-19 ने तोड़ दिया गुलाबी नगरी का 160 साल पुराना यह रिकॉर्ड

अलविदा जुमे की नमाज में यहां नमाज़ियों का एक समंदर सा नज़र आता है.  फाइल फोटो

अलविदा जुमे की नमाज में यहां नमाज़ियों का एक समंदर सा नज़र आता है. फाइल फोटो

यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज सिटी (UNESCO World Heritage City,) का खिताब हासिल कर चुकी गुलाबी नगरी जयपुर (Jaipur) की जामा मस्जिद का अपना एक अलग इतिहास है. 160 साल पहले जयपुर की जामा मस्जिद (JAMA Masjid) को बनाया गया था.

जयपुर. यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज सिटी (UNESCO World Heritage City,) का खिताब हासिल कर चुकी गुलाबी नगरी जयपुर (Jaipur) की जामा मस्जिद का अपना एक अलग इतिहास है. 160 साल पहले जयपुर की जामा मस्जिद (JAMA Masjid) को बनाया गया था. तब से लेकर अब तक कई बड़े बदलाव हुए. प्रथम विश्वयुद्ध से लेकर के दूसरा विश्व युद्ध और आजादी की लड़ाई भी हुई. लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ जयपुर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में अलविदा जुमे की नमाज ना हुई हो. लेकिन कोरोना संकट ने 160 साल पुराने इस इतिहास के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. 1860 के बाद साल 2020 में पहली बार ऐसा हुआ कि यहां रमजान के आखिरी जुमे पर एक साथ लाखों रोजेदार अल्लाह के बारगाह में एक साथ सजदा नहीं कर पाए. इस बार शुक्रवार को महज पांच नमाजियों ने अलविदा जुमे की नमाज पढ़ी.

कोरोना वायरस ने वो कर दिया जो सदियों से बड़ी से बड़ी त्रासदी न कर सकी
जयपुर की अलविदा जुमे की नमाज़ आस्था के सैलाब की एक जीती जागती मिसाल है. पूरे राजस्थान ऐसी कोई दूसरी जगह नहीं है जहां एक साथ इतने नमाज़ी नमाज़ अदा करते हों. बुजुर्ग लोग बताते हैं कि पूरे मुल्क में भी बहुत कम जगह ही ऐसा नजारा देखने को मिलता है. जयपुर में होने वाली इस नमाज़ में 5 से 7 लाख तक लोग एक साथ नमाज़ में शामिल होते रहे हैं. यहां तक अलविदा जुमे की नमाज में नमाज़ियों का एक समंदर सा नज़र आता है. यह आस्था की ही नहीं गंगा जमनी तहज़ीब की मिसाल भी मानी जाती है.

जौहरी बाजार के व्यापारी खुले दिल से इस्तक़बाल करते हैं
वो इसलिए क्योंकि यहां होने वाली नमाज़ में शामिल होने जब मुस्लिम समाज के लोग आते हैं तो जौहरी बाजार के व्यापारी इनका खुले दिल से इस्तक़बाल करते हैं. नमाज़ियों के लिए छाया का इंमताम करते हैं. वुज़ू का इंतज़ाम करते हैं और नमाज़ पढ़ने के लिए खुद ज़मीन पर कपड़ा बिछाने का इंतज़ाम भी करते हैं. इससे यहां से आपसी भाईचारे का संदेश सदियों से दुनिया को दिया जाता रहा है.

1860 के करीब जामा मस्जिद वजूद में आई
जामा मस्जिद कमेटी के सदर नईम कुरेशी ने बताया कि 1860 के करीब जब ये जामा मस्जिद वजूद में आई तब सौदागर शम्सी खानदान की एक महिला रोशन बेग़म ने 22 हज़ार रुपये उस वक्त में मस्जिद के लिए दान दिये थे. जब दुकानों के ऊपर की जगह खरीद कर मस्जिद बनाई गई थी. उस दौरान न तो बरामदे थे और न हो जौहरी बाजार से ऊपर जाने का रास्ता था. जुमातुल विदा की नमाज़ में लोग लकड़ी के फट्टे लगाकर ऊपर चढ़ा करते थे.

Jaipur: COVID-19 ने तोड़ दिया गुलाबी नगरी का 160 साल पुराना यह रिकॉर्ड unesco world heritage city- jama masjid- goodbye jume prayers- 160 year old record breaked
वर्ष 1940 में अलविदा जुमे की नमाज के दौरान का दृश्य। फाइल फोटो


पहले कभी ऐसा नहीं हुआ
20 अप्रैल 1860 को जब यहां 28वें रमज़ान को जुमातुल विदा की नमाज़ हुई तब महज़ कुछ हजार लोग ही नमाज़ में शामिल हुए थे. उसके बाद इसका दायरा बढ़ता गया और इस मस्जिद को बनाने से लेकर इसमें लगातार नमाज़ियों की तादाद बढ़ती ही चली गयी. इस दौरान दुनियाभर में ऐसी कई बड़ी घटनाएं हुई जिसका पूरी दुनिया पर बड़ा असर हुआ. लेकिन कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि उन घटनाओं की वजह से अलविदा जुमे की नमाज़ न हुई हो. लेकिन कोरोना वायरस ने पिछले 160 साल का ये रिकॉर्ड तोड़ दिया है और इस साल अलविदा जुमे की नमाज़ नहीं हुई.

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जोहरी बाजार से पहले दरगाह हज़रत मौलाना साहब में ये थी जयपुर की पहली जामा मस्जिद. फाइल फोटो


पहले दरगाह मौलाना साहब में थी जामा मस्जिद
जौहरी बाजार की जामा मस्जिद से पहले दरगाह हज़रत मौलाना ज़ियाउद्दीन साहब की चार दरवाजे स्थित मस्जिद जयपुर की पहली जामा मस्जिद बनी थी. अरबी स्थापत्य शैली में बनी ये मस्जिद आज भी दरगाह में मौजूद है. लेकिन यहां जगह कम होने लगी तब जौहरी बाजार की जामा मस्जिद बनाई गई थी. हज़रत मौलाना ज़ियाउद्दीन साहब ने 1799 में जयपुर की पहली मस्जिद बनाई थी जो बाद में हज़रत की दरगाह भी बनी. उससे पहले जयपुर नहीं था, लेकिन नमाज़ अदा करने के लिए लोग आमेर जाया करते थे. जयपुर के अस्तित्व में आने से पहले एक मस्जिद बनाई गई थी. इस मस्जिद का नाम अकबरी जामा मस्जिद है. अकबरी जामा मस्जिद आमेर की पहली मस्जिद थी. ये मस्जिद बादशाह अकबर के वेलकम के लिए सन 1569 में राजा भारमल द्वारा बनवाई गई थी.

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Tags: Jaipur news, Rajasthan news

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