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राजस्थान: वैक्सीन की बर्बादी पर मचे बवाल के बीच चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने किया ये बड़ा दावा

चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि अन्य राज्यों के मुकाबले प्रदेश के उदयपुर, झुंझनूं, प्रतापगढ़, जैसलमेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, बासंवाड़ा और जयपुर द्वितीय वैक्सीन वेस्टेज जीरो है.

Wastage of corona vaccine: कोरोना वैक्सीन की बर्बादी को लेकर मच रहे बवाल के बीच प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने दावा करते हुये कहा कि आठ जिलों में तो वैक्सीन वेस्टेज जीरो है. जबकि अन्य स्थानों पर भी यह वेस्टेज के राष्ट्रीय औसत के मु़काबले बेहद कम है.

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जयपुर. राजस्थान में कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान इसके डोज की बर्बादी के मुद्दे को लेकर सियासत पूरी तरह से गरमाई हुई है. वैक्सीन की बर्बादी (Vaccine waste) के मसले पर अब प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा (Dr. Raghu Sharma) ने बड़ा दावा किया है. चिकित्सा मंत्री का कहना है कि प्रदेश के 8 जिलों में वैक्सीनेशन के दौरान वेस्टेज माइनस में रहा है. इन जिलों में वैक्सीनेशन का समुचित उपयोग कर एक भी डोज वेस्टेज नहीं होने दी गई है. बल्कि एक वाइल में मौजूद अधिकतम 11 डोज तक लगाई गई है. प्रदेश के अन्य जिलों में भी वेस्टेज का प्रतिशत शून्य तक लाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि कोरोना वैक्सीनेशन कार्यक्रम के तहत वैक्सीनेशन की संख्या और न्यूनतम वेस्टेज की दृष्टि से राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 68 लाख से ज्यादा वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कोरोना वैक्सीन का 10 प्रतिशत तक वेस्टेज स्वीकार किया जा सकता है. इस समय देशभर में वैक्सीन वेस्टेज का औसत 6 प्रतिशत है. इसके मुकाबले में राजस्थान में वैक्सीन वेस्टेज 18 से 44 वर्ग में शून्य और 45 से अधिक उम्र में 2 प्रतिशत रहा है.

आठ जिलों में वैक्सीन वेस्टेज जीरो
चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि अन्य राज्यों के मुकाबले प्रदेश के उदयपुर, झुंझनूं, प्रतापगढ़, जैसलमेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, बासंवाड़ा और जयपुर द्वितीय वैक्सीन वेस्टेज जीरो रहा है. बकौल चिकित्सा मंत्री निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार वाइल को एक बार खोलने के बाद मात्र 4 घंटे तक ही उसका उपयोग किया जा सकता है. यदि 8 व्यक्तियों का वैक्सीनेशन हो जाए और 4 घंटे तक कोई व्यक्ति वैक्सीनेशन के लिए नहीं आए तो उसके शेष हिस्से को वेस्टेज का माना जाता है.

यह है पूरा प्रोसेस
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के बायोमेडिकल वेस्ट मैनजेमेंट नियमों के अनुसार यूज्ड, एक्सपायर्ड एवं डिस्कार्डेड वाइल्स का निस्तारण किया जाता है. टीकाकरण सत्र समाप्ति के बाद यूज्ड, अनयूज्ड एवं डिस्कार्डेड आदि समस्त वैक्सीन वाइल्स को प्रोटोकॉल के अनुरूप संबंधित चिकित्सा संस्थान पर ही जमा करवाया जाता है. उपयोग में लेने के बाद खाली वाइल्स, एक्सपायर्ड एवं डिस्कार्डेड वाइल्स को पीले बैग में डाला जाता है. उपयोग में ली जाने वाली वाइल्स को निर्धारित तापमान पर संग्रहित कर आगामी सत्रों में उपयोग लिया जाता है.

ये है वैक्सीन का हिसाब-किताब

- अब तक 1 करोड़ 68 लाख से ज्यादा वैक्सीन लगाई गई है.

- 45+ के लिए अब तक 1 करोड़ 73 लाख, 65,660 डोज मिली.

- इनमें से 2 लाख 15 हजार 180 वैक्सीन आर्मी के हैल्थ वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स को दी गई.

- 1 करोड़ 70 लाख 27,680 डोज सभी जिलों को आवंटित की गई है.

- राज्य स्तर पर कुल 1 लाख 22 हजार 800 डोजेज बची हैं.

- 18 + के लिए अब तक कुल 17 लाख 87,720 वैक्सीन डोज प्राप्त हुए.
Published by:Sandeep Rathore
First published: