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बीजेपी में CM फेस की रोचक जंग! वसुंधरा राजे की सेल्फी के जवाब में किसानों के बीच पहुंचे पूनिया

बीजेपी में CM फेस की रोचक जंग! वसुंधरा राजे की सेल्फी के जवाब में किसानों के बीच पहुंचे पूनिया

Rajasthan BJP CM Face Race: राजस्थान बीजेपी में वसुंंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर रोचक जंग चल रही है..

Rajasthan BJP CM Face Race: राजस्थान बीजेपी में वसुंंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर रोचक जंग चल रही है..

Vasundhara Raje Vs Satish Poonia: राजस्थान बीजेपी में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर रोचक जंग छिड़ी हुई है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने 'सीएम फेस' की जंग यह कहकर छेड़ दी कि बीजेपी से अगला सीएम वही होगा जिसे जनता चाहेगी, जनता में लोकप्रिय होगा, न कि खुद के चाहने से कोई मुख्यमंत्री बन पाएगा. राजे की महिलाओं के साथ मिट्टी के कुल्लड़ में बाजरे की राबड़ी और सेल्फी की भी बहुत चर्चा हुई थी. अब बारी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) की थी तो वह भी जोधपुर में ओसिया के नजदीक एक खेत में पहुंचे. खेत में किसान बाजरे की फसल निकाली.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) बीजेपी में लोकप्रियता की जंग चल रही है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) जोधपुर में ओसिया के नजदीक एक खेत में पहुंचे. खेत में किसान बाजरे की फसल निकाल रहे थे. पूनिया भी किसानों के साथ जुट गए और फसल निकालने में मदद की. उन्होंने खेत में किसानों के साथ काम किया फिर साथ चाय पी. सोशल मीडिया पर पूनिया का इसी इलाके से एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पूनिया ट्रेक्टर पर सवार है. आगे पीछे भारी भीड़ चल रही है और नारे लगा रहे है देखो कौन आया, राजस्थान का सीएम आया, सतीश पूनिया आया. सीएम फेस की इस जंग की शुरुआत पिछले हफ्ते ओसियां में ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने शुरू की. पिछले करीब दो साल से सियासी फील्ड से गायब वसुंधरा राजे ओसियां गईं तो पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा के निधन पर शोक जताने, लेकिन राजे ने बीजेपी में फिर मुख्यमंत्री फेस की जंग यह कहकर छेड़ दी कि बीजेपी से अगला सीएम वही लोग होंगे जिसे जनता चाहेगी. जनता में लोकप्रिय होगा, न कि खुद के चाहने से कोई सीएम बन पाएगा.

इस बयान से पहले खुद को लोकप्रिय लीडर दिखाने के लिए राजे पहुंची थीं एक गांव में और महिलाओं के साथ मिट्टी के कुल्हड़ में बाजरे की राबड़ी पी. फिर महिलाओं के साथ सेल्फी ली. इसके जरिए राजे ने दो संदेश पार्टी नेतृत्व और पार्टी में सीएम फेस वाले नेताओं को देने की कोशिश की कि अब भी जनता में लोकप्रिय नेता वहीं हैं. इसलिए सीएम फेस का फैसला लोकप्रियता की कसौटी पर होना चाहिए. सतीश पूनिया ने उसी इलाके में जाकर उसी अंदाज में लोकप्रियता की कसौटी से जबाब दिया. समर्थकों के नारे से जबाब दिया कि वे लोकप्रिय भी है और रेस में भी है. पूनिया ने खेत में तीन कृषि बिलों पर चाय पर चर्चा कर पार्टी हाईकमान को संदेश देने की कोशिश की कि उनके किसानों के बीच जाने का मकसद शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि किसानों तक रीच के पार्टी के एजेंडे को पूरा करना, शक्तिशाली वोट बैंक जाट समुदाय को साधना है.

किसानों के नेता कौन?

दरअसल, यह जंग सिर्फ इतनी नहीं है. राजस्थान बीजेपी में यह भी सवाल खड़ा होता रहा है कि किसानों के नेता कौन है यानी जाट बिरादरी का समर्थन किसके पास अधिक है. पश्चिम राजस्थान जाटों के प्रभाव वाला इलाका माना जाता है. वसुंधरा राजे अपने आपको जाटों की सूबे की सबसे बड़ी नेता मानती आई है. राजे के ओसियां में किसान महिलाओं के साथ राबड़ी पीना और सेल्फी लेने का एक मकसद यह भी कि वे यह संदेश दे सके कि बीजेपी नेता के रूप में राजस्थान में जाटों में अब भी वे ही सबसे अधिक लोकप्रिय नेता है. राजे खुद को जाट बहु मानती हैं, लेकिन वसुंधरा राजे की अगुवाई में लड़े गए 2018 के चुनाव में बीजेपी को सबसे बड़ा धक्का ही जाट बहुल पश्चिम राजस्थान में लगा.

यहां बीजेपी को समर्थन करने वाला जाट मतदाता हनुमान बेनिवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के समर्थन में चले गए. जाट बीजेपी, कांग्रेस और आरएलपी में बंट गए थे. बेनिवाल इस समुदाय के नेता बनकर उभरे. इसी वजह से 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने वसुंधरा राजे के न चाहने के बावजूद बेनिवाल के साथ गठबंधन किया और नागौर की सीट बेनिवाल को दी. मकसद था बेनिवाल के जरिए जाटों का फिर समर्थन हासिल करना, लेकिन बीजेपी के सामने पार्टी की जाट लीडरशिप का संकट खड़ा हो गया.

जाट लीडरशिप के क्या है मायन?

2023 से पहले जाट लीडरशिप खड़ी करने के लिए बीजेपी ने 2019 में सतीश पूनिया को कमान सौंपी. पूनिया बीजेपी की रणनीति के हिसाब से काफी फिट है. वे सोफ्ट जाट चेहरा है जिनकी दूसरी जातियों  में स्वीकार्यता है. हार्डकोर जाट लीडर से बीजेपी को डर लगता है कि उसका मजबूत वोट बैंक अगड़ी जातियां दूर न हो जाए. वसुंधरा राजे को डर है कि सतीश पूनिया अगर उनकी जगह ले लेते हैं तो फिर अगली सीएम रेस के मुकाबले में वे पिछड़ सकती हैं. इसलिए राजे के निशाने पर भी पूनिया  है.
हालांकि राजे और पूनिया के  जोधपुर में ही अपनी लोकप्रियता का मीटर दिखाने की एक और वजह है.

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जोधपुर सियासी किला है केद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का. शेखावत जोधपुर से सांसद हैं. वसुंधरा राजे और शेखावत के बीच मुकाबला 2017 से चला आ रहा है जब राजे सीएम थी और पार्टी हाईकमान शेखावत को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भेज रहा था, लेकिन राजे की खिलाफत के बाद पार्टी को फैसला बदलना पड़ा था. शेखावत तब से सीएम फेस की रेस में है. सतीश पूनिया और शेखावत दोनों संघ की पसंद है. राजे के खिलाफ दोनों साथ भी है, दोनों होड़ भी. जोधपुर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है. जाहिर इसका भी एक मकसद है संदेश देना कि किसान किसके साथ है. हालांकि ऐसा नहीं है कि 2023 की सीएम रेस की फेस में बीजेपी में मुकाबला सिर्फ तीन के बीच ही है.फाइट अष्टकोणीय है.​

Tags: Ashok gehlot, Jaipur news, Rajasthan news, Rajasthan Politics, Satish Poonia, Vasundhara raje

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