लाइव टीवी

JLF 2020: सावरकर RSS का हिस्‍सा नहीं थे- विक्रम संपथ

Mahendra Singh | News18 Rajasthan
Updated: January 23, 2020, 11:30 PM IST
JLF 2020: सावरकर RSS का हिस्‍सा नहीं थे- विक्रम संपथ
हमारी अज्ञानता और कम शोध की वजह से सावरकर पर भ्रम है.

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (Jaipur Literature Festival) में 'विवेकानन्द, सावरकर एंड पटेल-एकोज फ्रॉम द पास्ट' सेशन खास रहा. इस दौरान वीर सावरकर पर किताब लिखने वाले विक्रम संपथ ने कहा कि सावरकर को आरएसएस से जोड़ा जाता है, लेकिन वे इसका हिस्सा नहीं थे.

  • Share this:
जयपुर. डिग्गी पैलेस में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (Jaipur Literature Festival) के 13वें संस्करण का आगाज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया और पहले दिन विभिन्न विषयों पर 37 सत्र आयोजित हुए. सत्रों में देश-विदेश के जाने-माने साहित्यकार, लेखक, विचारक नेता और अभिनेताओं ने मंच साझा किया. पहले दिन डिग्गी पैलेस (Diggi Palace) के मुगल टेंट में 'विवेकानन्द, सावरकर एंड पटेल-एकोज फ्रॉम द पास्ट' सेशन खास रहा. इस दौरान हिंडोल सेनगुप्ता ने मकरंद आर परापंजे और विक्रम संपथ के साथ साथ चर्चा की. मजेदार बात ये है कि सत्र के दौरान वक्ताओं द्वारा विवेकानन्द, सावरकर और सरदार पटेल का भारत निर्माण में अहम योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई.

आरएसएस का हिस्‍सा नहीं थे सावरकर
इस दौरान सावरकर पर किताब लिखने वाले लेखक विक्रम संपथ ने कहा कि इतिहास के लेखक की मंशा यह होनी चाहिए कि जो सही है, लोग उसे आपकी किताब से जानें. उन्होंने कहा कि सावरकर को आरएसएस से जोड़ा जाता है, जबकि वे इसका हिस्सा नहीं थे बल्कि उनके भाई बाबाराव सावरकर संघ के संस्थापक सदस्य थे. यही नहीं, उनके छोटे भाई महात्मा गांधी के अनुयायी थे, लेकिन उनकी अलग विचारधारा थी. इसके बावजूद तीन भाई एक ही छत के नीचे रहते थे. सावरकर को इस्लाम विरुद्ध माना जाता है, लेकिन उन्होंने सभी के लिए एक कानून की बात रखी थी. वे भेदभाव के सख्त खिलाफ थे. यहां तक कि वह गाय को पूजने से भी मना करते थे.
दरअसल, यह हमारी अज्ञानता और कम शोध की वजह से है कि उनके खिलाफ ऐसी बातें की जाती हैं. दूसरों की वजह से किसी भी स्वतंत्रता सेनानी का योगदान कम नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर की तरह स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद बिस्मिल और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के संस्थापक सदस्य श्रीपद डांगे ने भी अंग्रेजों को दया याचिका लिखी थी, लेकिन वर्तमान राजनीति के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो सिर्फ सावरकर की दया याचिका पर ही सवाल उठाए जाते हैं. हो सकता है यह एक रणनीति का एक हिस्सा हो या फिर उस समय के हालात ऐसे हों. यदि लेखक भी वर्तमान माहौल से प्रभावित होकर तथ्यों को बदल दें, तो यह सही नहीं है.

 

ये भी पढ़ें-
JLF 2020: साहित्य के महाकुंभ में प्रसून जोशी का जलवा, मां की कविता पर भावुक हुए लोग 

जयपुर: 20 साल बाद महिला RPS अधिकारी बनी आईपीएस, जानिए कौन हैं मारुति जोशी

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जयपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 23, 2020, 10:16 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर