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वोट बैंक की राजनीति : सहकारी बैंकों की सेहत पर भारी पड़ रही है 'कर्ज माफी'

Dinesh Sharma | News18 Rajasthan
Updated: January 19, 2019, 1:11 PM IST
वोट बैंक की राजनीति : सहकारी बैंकों की सेहत पर भारी पड़ रही है 'कर्ज माफी'
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

वोट बैंक की राजनीति प्रदेश के सहकारी बैंकों की आर्थिक सेहत पर भारी पड़ रही है. राजनीतिक दल चुनावी लाभ लेने के लिए किसान ऋण माफी की घोषणा तो करते हैं, लेकिन इसका खामियाजा सहकारी बैंकों को भुगतना पड़ रहा है.

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वोट बैंक की राजनीति प्रदेश के सहकारी बैंकों की आर्थिक सेहत पर भारी पड़ रही है. राजनीतिक दल चुनावी लाभ लेने के लिए किसान ऋण माफी की घोषणा तो करते हैं, लेकिन इसका खामियाजा सहकारी बैंकों को भुगतना पड़ रहा है. हालात ये हैं कि ना तो सरकार से सहकारी बैंकों को पैसा मिल रहा और ना किसान बैंकों का पैसा चुका रहे हैं. पर्याप्त प्रावधान और नीतियां सही नहीं होने के कारण सहकारी बैंकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है.

पिछली सरकार ने 8 हजार करोड़ रुपए की ऋण माफी की घोषणा की थी. लेकिन इसके लिए महज 2 हजार करोड़ रुपए की राशि का ही प्रावधान किया था. शेष 6 हजार करोड़ रुपए सरकारी गारंटी पर एनसीडीसी से कर्जा लेने को कहा गया. एनसीडीसी से 8.60 प्रतिशत की ब्याज दर पर कर्जा लिया गया, जबकि किसानों का जो कर्जा माफ हुआ था उस पर जीरो प्रतिशत ब्याज था. सरकार ने अभी उस पेटे सहकारी बैंकों को पैसा नहीं दिया है, जबकि सहकारी बैंकों को एनसीडीसी को राशि चुकानी है.

नाबार्ड सहकारी बैंकों को कोई रियायत नहीं देता है
नाबार्ड सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त उपलब्ध करवाता है. सहकारी बैंकों को तय समयावधि में इस राशि का पुन: भुगतान करना होता है. ऋण माफी के मद्देनजर नाबार्ड सहकारी बैंकों को कोई रियायत नहीं देता है, लेकिन ऋणमाफी की घोषणा के चलते बैंकों के पास रिकवरी नहीं हुई. यानि ना तो बैंकों के पास सरकार से पैसा आया और ना किसान से. ऐसे में सहकारी बैंकों को उच्च लागत के संसाधनों से नाबार्ड को भुगतान करना पड़ेगा.

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बैंकों के सामने यह चुनौती भी है
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जब सहकारी बैंक उच्च लागत के संसाधनों से नाबार्ड को भुगतान करेंगे तो उनकी आर्थिक सेहत बिगड़ना स्वाभाविक है. लेकिन कर्ज माफी की घोषणा करने वाली सरकारों को इससे कोई सरोकार नजर नहीं आता. सहकारी बैंकों के सामने चुनौती यह भी है कि उन्हें अगले चक्र में भी किसानों को कर्जा वितरित करना है. लेकिन जब उनके पास वित्त की व्यवस्था ही नहीं होगी तो यह कैसे संभव हो पाएगा. ऋण माफी की घोषणा के चलते वे किसान भी बैंकों का कर्जा नहीं चुका रहे हैं जो कर्जा चुकाने की स्थिति में हैं.

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First published: January 19, 2019, 1:11 PM IST
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