Rajasthan: बारिश और ओलावृष्टि, थोड़ी खुशी, थोड़ा गम, बुवाई के आंकड़ाें में आएगा उछाल

राजधानी जयपुर में रविवार को आये मौसम के बदलाव के बाद शहर समेत आसपास के इलाकों में जबर्दस्त ओले गिरे थे.
राजधानी जयपुर में रविवार को आये मौसम के बदलाव के बाद शहर समेत आसपास के इलाकों में जबर्दस्त ओले गिरे थे.

Rain and Hailstorm in Rajasthan: कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक राजस्थान में रविवार को हुई बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को फायदा और नुकसान (Advantage and disadvantage) दोनों ही होगा.

  • Share this:
जयपुर. प्रदेश के विभिन्न जिलों में रविवार को हुई बारिश (Rain) से किसानों के चेहरे खिल गए हैं वहीं ओलावृष्टि (Hailstorm) ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है. सीजन की यह पहली मावठ फसल के लिए फायदेमंद साबित होने वाली है. वहीं जिन इलाकों में ओले गिरे हैं वहां फसल (Crop) को नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुदेश कुमार के मुताबिक यह बारिश गेहूं, चना और सरसों की फसल के लिए फायदेमंद साबित होगी. लेकिन जिन इलाकों में बड़े आकार के ओले गिरे हैं वहां अंकुरित हुई फसल को नुकसान हो सकता है. उनके मुताबिक बारिश अगर तेज भी होती है तो भी फसल को फायदा ही करेगी लेकिन यदि ओलावृष्टि ज्यादा होती है तो नुकसान कर सकती है.

बुवाई का मिलेगा एक और मौका
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुदेश कुमार के मुताबिक यह बारिश इस लिहाज से भी फायदेमंद साबित होगी कि जो किसान जमीन में कम नमी की वजह से बुवाई करने से चूक गए थे उन्हें एक बार फिर से बुवाई का मौका मिलेगा. चना और सरसों की बुवाई के लिहाज से हालांकि देरी हो चुकी है लेकिन किसान अभी भी जौ आदि फसलों की बुवाई कर सकते हैं. इस तरह से यह बारिश बुवाई का रकबा बढ़ाने में मददगार साबित होगी. बारिश से किसानों के चेहरों पर मुस्कान इसलिए भी आई है क्योंकि उन्हें फसल में अभी पानी नहीं देना पड़ेगा और उनके डीजल की भी बचत होगी.

Rajasthan: जयपुर में तूफान का कहर, तस्वीरों में देखें बदले मौसम की बानगी



अभी आधी ही बुवाई
प्रदेश में रबी की बुवाई की स्थिति अभी बहुत ज्यादा सुकूनदेह नहीं है. कृषि विभाग द्वारा तय लक्ष्य की अभी तक करीब आधी ही बुवाई हो पाई है. 11 नवंबर तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 46.44 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुवाई हो पाई थी. कृषि विभाग द्वारा 98 लाख 80 हजार हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन लक्ष्य के मुताबिक इसमें से 11 नवबंर तक 45 लाख 88 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो पाई है. इस बार तापमान ज्यादा समय तक बढ़ा हुआ रहने से रबी की बुवाई देरी से शुरू हो पाई थी. अब मावठ से बुवाई के आंकड़ें में तेजी आने की उम्मीद है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज