अलवर गैंगरेप केस: CM गहलोत से इस्तीफे की मांग, BJP क्यों बता रही राजनीतिक षड़यंत्र?

राजस्थान के अलवर गैंगरेप और पति के सामने पत्नी से दरिंदगी केस को 10 दिन तक छिपाने के पीछे राजनीतिक षड़यंत्र है? बीजेपी ने ऐसे ही आरोप कांग्रेस सरकार पर लगाए हैं और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस्तीफा मांगा है.

sambrat chaturvedi | News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 3:52 PM IST
sambrat chaturvedi
sambrat chaturvedi | News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 3:52 PM IST
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत या नागरिकों के मूल अधिकारों का ही जब हनन हो तो फिर कोई आचार संहिता की आड़ में लापरवाही या राजनीतिक लाभ-हानी की सोच भी कैसे सकता है. राजस्थान के अलवर में पति के सामने युवती से बदसलूकी और गैंगरेप जैसी शर्मानाक वारदात के बाद पुलिस की लापरवाही और सरकार के मौन पर विपक्ष, दलित संगठन, महिला संगठन और तमाम सामाजिक संगठन आवाज उठा रहे हैं. सब ओर इस दरिंदगी के साथ लापरवाह पुलिस को लेकर आलोचना हो रही है. बीजेपी ने तो इस घटना के बाद प्रदेश में कानून व्यवस्था समाप्त होने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस्तीफा तक मांग लिया है.

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alwar gang rape accused
अलवर गैंगरेप के आरोपी.


बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी ने इस पूरी घटना में पुलिस के मौन को 'राजनीतिक षड़यंत्र' करार दिया है. सैनी ने कहा है कि 'घटना के 11 दिन बाद भी पुलिस प्रशासन और सरकार मौन है, इससे यह साबित होता है कि प्रदेश में काननू व्यवस्था समाप्त हो गई है. गैंगरेप और पति के सामने पत्नी से दरिंदगी केस को 10 दिन तक छिपाने के पीछे राजनीतिक षड़यंत्र नजर आ रहा है. गृहमंत्री यानी खुद सीएम गहलोत को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए'.

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6 दिन बाद FIR लिखी, 10 दिन तक मामला दबाया गया

थानागाजी इलाके में पीड़ित दंपती के साथ ये शर्मनाक वारदात 26 अप्रैल को हुई थी. 4 दिन तक पीड़ित आरोपियों से याचना करते हुए लेकिन कथितरूप से रुपए ऐंठने के बाद भी आरोपियों ने दरिंदगी का अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. 30 अप्रैल को दंपती के परिजन अलवर एसपी के पास फरियाद लेकर पहुंचे लेकिन त्वरित कार्रवाई नहीं हुई. आखिर 2 मई को थानागाजी थाने में एफआईआर दर्ज की गई. लेकिन चुनाव के चलते मामला दबाया गया और 10 दिन तक आरोपियों को पकड़ने का कोई प्रयास नहीं हुआ. वायरल वीडियो मीडिया तक पहुंचा तो 6 मई शाम को पुलिस हरकत में आई लेकिन तब भी मामला दबाने की पूरी कोशिश हुईं. 7 मई को डीजीपी ने एसपी को एपीओ और थानागाजी थानेदार को सस्पेंड कर आरोपियों को पकड़ने के लिए 14 टीमों के गठन की जानकारी दी.
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बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस मसले पर कहा है कि 'राजनीतिक लाभ के लिए गहलोत ने चार दिन तक पीड़ित परिवार की एफआईआर दर्जन नहीं होने दी. दलित समाज के लिए कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया है'


राजनीतिक षड़यंत्र की बात क्यों?

यहां राजनीतिक षड़यंत्र या 'राजनीतक लाभ' से मतलब अलवर, भरतपुर, दौसा और जयपुर ग्रामीण में पांचवें चरण में होने वाले लोकसभा चुनाव और गुर्जर-दलित वोट बैंक से जुड़ा है.  दअसल, पीड़ित दंपती दलित समुदाय से है और उनपर अत्याचार करने वाले पांचों युवक गुर्जर समाज से. गुर्जरों पर कार्रवाई या दलित पर अत्याचार किसी भी मुद्दे पर जातिगत वोट पार्टी से खिसक सकते थे. कांग्रेस की गहलोत सरकार पर इसी वजह से मामला दस दिन तक यानी 6 मई को मतदान पूरा होने तक छिपाने का आरोप लगाए जा रहे हैं.

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बीजेपी ने कमेटी बनाई, जांच के लिए दबाव

मंगलवार को बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी ने सांसद रामकुमार वर्मा, वित्त आयोग की पूर्व अध्यक्ष ज्योति किरण और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुमन शर्मा की एक कमेटी का गठन की. इस कमेटी ने मंगलवार को ही अलवर में परिवार से मुलाकात के बाद अलवर कलेक्टर और एसपी से बात करके परिवार को उचित न्याय और सुरक्षा की मांग की है.



पुलिस ने बात संभाली, सीएम ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया

उधर, जब बात बिगड़ते दिखी तो पुलिस ने चुप्पी तोड़ते हुए मंगलवार को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक आरोपी को पकड़ने की जानकारी दी. खबर लिखे जाने तक दो और आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना मिली है. उधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सरकार को महिला सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध बताया है. हालांकि ऐसे मौकों पर अमूमन ट्विटर और फेसबुक पर अपनी बात और संवेदनाएं प्रकट करने के वाले सीएम गहलोत और डिप्टी सीएम पायलट दोनों ने ही ट्वीट करने से परहेज किया है.

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