आपके लिये इसका मतलब: रीट परीक्षा में BSTC के स्टूडेंट्स को मिली बड़ी राहत, ये होगा फायदा

बीएसटीसी धारकों का कहना था कि जब कक्षा पहली से पांचवीं तक पढ़ाने के लिए बाहरवीं कक्षा पास युवाओं को बीएसटीसी का विशेष डिप्लोमा कराया गया है तो फिर उच्च योग्यता वाले बीएड डिग्रीधारियों को इसमें शामिल क्यों किया जा रहा है.

बीएसटीसी धारकों का कहना था कि जब कक्षा पहली से पांचवीं तक पढ़ाने के लिए बाहरवीं कक्षा पास युवाओं को बीएसटीसी का विशेष डिप्लोमा कराया गया है तो फिर उच्च योग्यता वाले बीएड डिग्रीधारियों को इसमें शामिल क्यों किया जा रहा है.

रीट परीक्षा (REET Exam) के लेवल वन से बीएड डिग्रीधारकों को बाहर करने का फैसला बीएसटीसी (BSTC) पास लाखों युवाओं के सपनों के पंख लगने जैसा है. ये उनके करियर के लिये बहुत मायने रखता है.

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जयपुर. रीट परीक्षा-2021 की तैयारी करने में जुटे बीएसटीसी (BSTC) के लाखों अभ्यर्थियों को आखिरकार आज राहत मिल गई. सरकार ने रीट परीक्षा (REET Exam) के लेवल वन में केवल बीएसटीसी के स्टूडेंट्स को ही शामिल करने के फैसले पर मुहर लगा दी है. सरकार से इसी फैसले की मांग कर रहे बीएसटीसी अभ्यर्थी हाल ही में बड़े आंदोलन को आगे बढ़ा रहे थे. हालांकि सरकार के इस फैसले से बीएड डिग्रीधारियों को थोड़ी मायूसी जरुर होगी, लेकिन उनके पास रीट परीक्षा के लेवल टू का बड़ा ऑप्सन उपलब्ध है.

दरअसल बीएड डिग्रीधारियों के पास पहले रीट परीक्षा के लेवल वन और टू दोनों उपलब्ध थे. लेकिन बीएसटीसी के पास केवल लेवल वन का एक ही ऑप्शन था. इनकी मांग भी जायज थी कि अगर उनके एकमात्र ऑप्शन में भी बीएड डिग्रीधारी घुस आयेंगे तो उनका भविष्य संकट में आ जायेगा. क्योंकि बीएड डिग्रीधारी अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिये दोनों ऑप्शन को भुनायेंगे. ऐसे में बीएसटीसी धारकों का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा.

क्यों हो रहा था ऐसा

हाल ही में शिक्षा विभाग की ओर से एनसीटीई गाइडलाइन के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया अपनाने से यह संकट खड़ा हो गया था. इसके चलते रीट शिक्षक भर्ती और पात्रता परीक्षा के लेवल वन में प्रदेश के करीब 8 लाख बीएड डिग्रीधारकों को शामिल करने की तैयारी कर ली गई थी. इससे बीएसटीसी धारकों को लग गया कि यह उनके हक पर डाका है. लिहाजा उन्होंने आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया. अतंत: सरकार ने उनकी सुनी और उनके मागों को जायज मानते हुये बीएड डिग्रीधारकों को लेवल वन से अलग कर दिया.
यह तर्क था बीएसटीसी धारकों का

उनका कहना था कि जब कक्षा पहली से पांचवीं तक पढ़ाने के लिए बाहरवीं कक्षा पास युवाओं को बीएसटीसी का विशेष डिप्लोमा कराया गया है तो फिर उच्च योग्यता वाले बीएड डिग्रीधारियों को इसमें शामिल क्यों किया जा रहा है. वे कक्षा छह से आठवीं तक पढ़ाई कराने वाले होते हैं. उनके पास रीट परीक्षा का लेवल टू उपलब्ध है. वहीं उन्हें बीएड के साथ एमए कर लेने पर तृतीय श्रेणी से लेकर प्रथम श्रेणी के शिक्षक भर्ती में शामिल होने का मौका मिल जाता है. जबकि बीएसटीसी डिप्लोमा धारकों के पास तो केवल थर्ड ग्रेड के लेवल वन भर्ती का ही अवसर है. प्रदेशभर में करीब बीएसटीसी डिप्लोमा प्राप्त करीब तीन लाख स्टूडेंट्स हैं. अब लेवल वन में बीएसटीसी धारकों में ही मुकाबला होगा. उन्हें उच्च योग्यता वालों से मुकाबला नहीं करना पड़ेगा.
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