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आपके लिये इसका मतलब: प्रदेश में कड़ाके की सर्दी, कोरोना का नया स्ट्रेन और नये साल का जश्न, संभलकर रहें

माउंट आबू में कड़ाके की सर्दी के चलते वाहनों पर बर्फ जम रही है. (फाइल फोटो)
माउंट आबू में कड़ाके की सर्दी के चलते वाहनों पर बर्फ जम रही है. (फाइल फोटो)

कड़ाके की सर्दी (Severe winter) ने पूरे प्रदेश को अपनी जकड़ मे ले लिया है. एक दिन बाद नया साल आने वाला है, लेकिन फिलहाल मौसम में कोई बदलाव नहीं आने वाला है. लिहाजा ऐसे मौसम और कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुये न्यू ईयर के जश्न (New year celebration) की खुमारी में डूबकर बीमारी को न्यौता देने से बचें.

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जयपुर. पूरा राजस्थान जबर्दस्त सर्दी (Severe winter) की चपेट में है. हाथ-पैरों की सुन्न कर देने वाली सर्दी ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है. राज्य कई शहरों का तापमान शून्य से नीचे जा पहुंचा है. ऐसे मौसम और कोरोना संक्रमण के नये स्ट्रेन (Corona's new strain) की धमक की खबरों के बावजूद कई लोग न्यू ईयर का जश्न (New year celebration) मनाने के लिये बेताब हो रहे हैं. लेकिन क्या इन परिस्थितियों में भीड़भाड़ के बीच जश्न मनाना ठीक होगा. इस पर विचार किजियेगा.

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक ही दिसंबर के आखिरी सप्ताह में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी पड़ रही है. प्रदेश के एक मात्र हिल स्टेशन माउंट आबू और सर्दी तथा गर्मी दोनों ही मौसम में जबर्दस्त सर्दी और गर्मी का रिकॉर्ड कायम करने वाले चूरू पारा शून्य पर टिका हुआ है. प्रदेश के अन्य इलाकों में भी जबर्दस्त सर्दी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है. ऐसे माहौल में सर्द रात में न्यू ईयर को सेलिब्रेट करने वाले सावधानी बरतें.

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अन्यथा यह होगा


कड़ाके की सर्दी बीच हर साल लोग नये साल का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग है. कोरोना संक्रमण अभी गया नहीं है. बल्कि वह नये रूप में आने के लिये रास्ते खोज रहा है. करीब 9 महीने की कड़ी मशक्कत और सावधानियों के बाद वह थोड़ा काबू में आया है. ऐसे में न्यू ईयर का जश्न ऐसा नहीं हो कि वह उसे फिर से फैलने का मौका दे दे. लिहाजा सतर्कता बेहद जरूरी है.

कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुये अपने-अपने घरों में रहें
जश्न तो कुछ घंटो का ही होगा. लेकिन खुदा ना खास्ता भीड़भाड़ की वजह से फिर कुछ ऐसा नहीं हो जाये कि उसे सुधारने में महीनों लग जाये. इसलिये मौसम के मिजाज और कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुये अपने-अपने घरों में रहें. अनावश्यक रूप से एक दूसरे के घरों में एकत्र ना हो. ऐसा नहीं हो की नये साल की खुमारी बीमारी बन जाये.
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