आपके लिये इसका मतलब: पड़ोसी ने ही मारा था SDM की बहन को, संभलकर रहें

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बदलते परिवेश में लोगों में सहनशक्ति तेजी से घट रही है.

राजधानी जयपुर में अध्यापिका विद्यादेवी की हुई हत्या (Mudrder) की घटना ने एक बार फिर ये जता दिया कि लोगों में सहनशक्ति (Patience) किस कदर कम होती जा रही है. छोटी-छोटी बातों पर लोग जान लेने पर उतारू हो रहे हैं.

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जयपुर. प्रदेश की राजधानी जयपुर में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारी की बहन अध्यापिका विद्यादेवी (55) की दिनदहाड़े हुई हत्या (Murder) से गुलाबीनगरी सन्न है. हालांकि पुलिस ने वारदात के महज 8 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर आरोपी को अपनी गिरफ्त में ले लिया, लेकिन इस घटना ने यह दर्शा दिया कि वर्तमान में लोग किस कदर धैर्य (Patience) खो रहे हैं. छोटी-छोटी बात जान लेने पर उतारू हो रहे हैं. ऐसे हालात में संभलकर रहने की जरूरत है. क्योंकि विद्यादेवी की हत्या का जो कारण सामने आया है वह दिल को दहला देने वाला है.

आरोपी कृष्ण कुमार ने विद्यादेवी की हत्या महज इसलिये कर दी थी कि उसने उसने घर के आसपास कुत्ता घुमाने के लिये टोका था. यही बात आरोपी कृष्ण को खटक गई और उसने मौका देखते ही अपनी खुन्नस निकालने के लिये विद्यादेवी को मौत के घाट उतार दिया. गांव-गुवाड़, गली मोहल्लों, कस्बों और शहरों इस तरह की बात पर टोकना कोई बड़ी बात नहीं है. ये रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. लेकिन इसकी परिणिति मर्डर के रूप में भी सामने आये ऐसा कम होता है।.

लोगों में सहनशक्ति तेजी से घट रही है
मनोवैज्ञानिकों की मानें तो बदलते परिवेश में लोगों में सहनशक्ति तेजी से घट रही है. हालात इस कदर पहुंच चुके हैं कि बच्चों को परिवार के अन्य लोगों को छोड़ खुद के माता-पिता की टोकाटाकी पसंद नहीं आती. पड़ोसी तो अब बहुत दूर की बात हो गई. हालांकि गलत बात पर टोकना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन अब जिस तरह से लोगों की सहनशक्ति घट रही है उसमें यह टोकने वाले व्यक्ति के लिये घातक सिद्ध हो रही है. विद्यादेवी की हत्या इसका बहुत बड़ा उदाहरण है.

शिकवा शिकायत को बेहद संजीदा तरीके से सुलझायें
लिहाजा अपने आसपड़ोस में होने वाली असामान्य घटनाओं और शिकवा शिकायत को बेहद संजीदा तरीके से सुलझायें. इसके लिये संबंधित व्यक्ति के परिजनों को कॉन्फिडेंस में लेकर इस तरह मसलों को सुलझायें. ऐसा नहीं है कि इस तरह क घटनाओं से हम डर जायें और सही-गलत में फर्क करना छोड़ दें. लेकिन बदले हालात में समझाइश और शिकायत का तरीका भी बदलना तो होगा. क्योंकि वर्तमान में हर चीज बदल रही है. उसके साथ-साथ व्यक्ति के व्यवहार में भी आमूलचूल परिवर्तन आ रहा है. छोटी-छोटी बातों से तनाव में ना आये, बल्कि समस्या के समाधान के लिये नये तरीके खोंजे. अन्यथा इस दुनिया में सिरफिरों की कमी नहीं है. आपकी दूसरे के प्रति भलाई कब आपके गले पड़ जाये कुछ नहीं कहा जा सकता है.

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