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जब शिकवे भुलाकर वसुंधरा के पास पहुंचे सतीश पूनिया, पूछने लगे- खाने में और क्या चाहिए?


सतीश पूनिया ने मंच से अपने भाषण में राजे के पिछले कार्यकाल की तारीफ की.

सतीश पूनिया ने मंच से अपने भाषण में राजे के पिछले कार्यकाल की तारीफ की.

JP Nadda Rajasthan Visit: वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया लंबे समय से एकदूसरे से नजरें नहीं मिला रहे थे. दोनों के बीच संघर्ष विराम का दूसरा संदेश तब मिला जब कार्य समिति की बैठक के बाद नेता लंच कर रहे थे. सतीश पूनिया वसुंधरा राजे के पास गए. खाने के बारे में पूछा. मनुहार की. जबाब में राजे मुस्कराई.

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जयपुर. कहते हैं कि तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है. आज ऐसा ही हुआ, जब बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया औऱ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का हाथ पकड़ कर ऊपर किया. दोनों के हाथ इस तरह पकड़कर नड्डा ने उन हजार सवालों का एक साथ जवाब दिया, जिनके जवाब का इंतजार राजस्थान में लाखों बीजेपी कार्यकर्ता औऱ नेता कई महीनों से कर रहे थे.

नड्डा ने दोनों के हाथ पकड़ संदेश दिया राजस्थान बीजेपी में कलह खत्म करने का, एकजुटता का. वसुंधरा राजे और पूनिया के बीच सुलह का. दोनों के गुट को भी संदेश दिया कि एकदूसरे के खिलाफ हाथ मत उठाइए, बल्कि एकदूसरे से हाथ मिलाइए. वैसे सिर्फ इन दो नेताओं के ही नहीं. गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, गजेंद्र शेखावत और ओंम प्रकाश के हाथ भी इसी तरह एक दूसरे से पकड़वा कर ऊपर करवाए. वैसे ऐसी ही एक तस्वीर दो साल पहले की कांग्रेस की है. जब राहुल गांधी ने अशोक गहलोत औऱ सचिन पायलट के हाथ पकड़कर दोनों में सुलह औऱ एकजुटता का संदेश दिया था. ये नौबत तब आई थी जब गहलोत पायलट दोनों सीएम की कुर्सी के लिए अड़ गए थे. हालांकि ये एकजुटता महज डेढ़ साल ही चल पाई. पायलट ने डेढ़ साल बाद गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत कर दी थी.

वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया लंबे समय से एक दूसरे से नजरें नहीं मिला रहे थे. दोनों गुट एकदूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल रहे थे लेकिन आज दोनों के बीच संघर्ष विराम का दूसरा संदेश तब मिला जब कार्य समिति की बैठक के बाद नेता लंच कर रहे थे. सतीश पूनिया वसुंधरा राजे के पास गए. खाने के बारे में पूछा. मनुहार की. जबाब में राजे मुस्कराईंं.



इससे पहले सतीश पूनिया ने मंच से अपने भाषण में राजे के पिछले कार्यकाल की तारीफ की. जेपी नड्डा के दौरे का मकसद भी यही था राजे और पूनिया गुट के बीच संघर्ष विराम कराना. दोनों को साथ काम करने के लिए तैयार करना. पहले कार्यसमिति की बैठक में भाषण में दोनों को बिना नाम लिए कड़ा संदेश दिया कि पार्टी के लिए एकजुट होकर काम करे. फिर दोनों को करीब लाने की कोशिश की. गिले-शिकवे भुलाकार पार्टी हित में साथ काम करने का संदेश दिया. नड्डा इस वक्त पांच राज्यों के चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं. बावजूद इसके जयपुर आए. उसकी वजह है राजस्थान में लगातार पार्टी में बढती कलह औऱ गुटबाजी. आने वाले चार विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है.
दूसरी वजह वसुंधरा राजे की ओर से की जा रही देव दर्शन यात्रा की तैयारी है. 8 मार्च को राजे समर्थक राजे के जन्म दिवस को भरतपुर के ब्रज चौरासी में धार्मिक यात्रा के बहाने शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं. नड्डा के इस दौरे के बाद अब इंतजार होगा कि राजे और उनका गुट मौन धारण करेगा या फिर 8 मार्च को शक्ति प्रदर्शन करेगा. बीजेपी नेतृत्व की चिंता की दूसरी वजह ये भी है कि गहलोत-पायलट में सुलह होने से बीजेपी की चार उपचुनाव में चुन्नौती बढ़ जाना तय माना जा रहा है. ​
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