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Rajasthan Politics: क्या 9 और 99 के फेर में अटका है गहलोत मंत्रिमंडल का विस्तार?

राजस्थान में गहलोत मंत्रिमंडल का विस्तार करना एक बड़ी चुनौती है और कांग्रेस इसमें उलझ गई है.

राजस्थान में गहलोत मंत्रिमंडल का विस्तार करना एक बड़ी चुनौती है और कांग्रेस इसमें उलझ गई है.

Rajasthan Political Crisis: गहलोत सरकार में अभी 20 मंत्री हैं. इनमें एक आरएलडी से सुभाष गर्ग हैं. बसपा से कांग्रेस में शामिल 6 विधायकों सहित कांग्रेस के अभी कुल विधायक 106 है. गहलोत और 19 कांग्रेस मंत्रियों के अलावा 86 विधायक बचते हैं.

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    जयपुर. राजस्थान में कांग्रेस का मंत्रिमंडल विस्तार 9 और 99 के फेर में उलझ गया है. राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अजय माकन और एआईसीसी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के जयपुर दौरे के बाद गहलोत सरकार के मंत्रियों की धड़कने बढ़ गई थीं. वेणुगोपाल और अजय माकन दोनों ने यही कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार पर फैसला जल्द होगा. सूत्रों का कहना है कि मोटे तौर पर इस बात को लेकर सहमति बन गई है कि मंत्रिमंडल फेरबदल की जगह सिर्फ विस्तार होगा, लेकिन खाली पड़े 9 पदों के लिए पार्टी के 99 विधायक टकटकी लगाए बैठे हैं.

    गहलोत सरकार में अभी 20 मंत्री हैं. इनमें एक आरएलडी से सुभाष गर्ग हैं. बसपा से कांग्रेस में शामिल 6 विधायकों सहित कांग्रेस के कुल विधायक 106 हैं. गहलोत और 19 कांग्रेस मंत्रियों के अलावा 86 विधायक बचते हैं. इनमें विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी भी शामिल हैं. 13 विधायक निर्दलीय हैं. यानी 99 विधायक हैं जो मंत्री नहीं हैं. इनमें 17 विधायक वे हैं जो पायलट के साथ सरकार के खिलाफ मानेसर गए थे. गहलोत के उन वफादारों की गिनती भी कम नहीं है, जिनका पहली बार में नंबर नहीं आया.

    जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की चुनौती
    मंत्रिमंडल विस्तार होगा तो उसमें गहलोत-पायलट समर्थकों को हिस्सेदारी देने के साथ क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी साधना होगा. जल्द ही वल्लभनगर और धारियावाद विधानसभा में उपचुनाव होने हैं. पायलट समर्थकों का यह मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार की जगह पुनर्गठन होगा और 15 अगस्त से पहले सब कुछ कर लिया जाएगा. स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा बुधवार को परिवार सहित छुट्टियां मनाने गोवा चले गए. वहीं वायरल वीडियो में खुद को 4-5 दिन का मेहमान बताने वाले शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के कहने पर विभाग के सचिव को भी बदल कर सरकार ने मैसेज दिया है कि फिलहाल वे कहीं नहीं जा रहे हैं.

    पायलट और समर्थकों को खुश रखने की चुनौती
    सचिन पायलट और उनके समर्थकों को उम्मीद है कि आलाकमान ने सभी पक्षों की बात सुन ली है और जो भी फैसला किया जाना है वह जल्द होगा. पायलट समर्थक यह भी कह रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में देरी होती है तो इससे पार्टी की प्रतिष्ठा पर ही असर पड़ेगा क्योंकि इससे यह मैसेज जाएगा कि कांग्रेस आलाकमान राजस्थान का सियासी संकट सुलझाने में नाकाम रहा है. कई पायलट समर्थक विधायक पिछले दिनों मुख्यमंत्री से मुलाकात भी कर चुके हैं. बीते एक साल से मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर पायलट कई बार दिल्ली में माकन और प्रियंका गांधी तक से मुलाकात कर चुके हैं.

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